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बल्ह नहीं, दूसरी जगह बने एयरपोर्ट
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नेरचौक (मंडी)। बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति ने मंडी एयरपोर्ट के विरोध में फिर से आवाज बुलंद कर दी है। समिति का कहना है कि ओएलएस सर्वे के अनुसार बल्ह में 2150 मीटर रनवे ही संभव है। इसमें एटीआर-72 सीटर छोटा हवाई जहाज घरेलू उड़ान के लिए ही उड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बोइंग 320 के लिए बनाना है तो उसके लिए 3150 मीटर लंबी हवाई पट्टी बनानी पड़ेगी। सुंदरनगर की पहाड़ी (बंदली धार) 500 मीटर तक काटनी पड़ेगी, जो संभव नहीं है। अब दूसरी तरफ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अब नए सिरे से 5 करोड़ खर्च कर लिडार सर्वे के माध्यम से हर हालत में अपने ड्रीम परियोजना को पूरा करना चाहते हैं, यह भी संभव नहीं है।
बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया, सचिव नंद लाल वर्मा का कहना है कि जब ओएलएस सर्वे हो चुका है तो लिडार सर्वे की क्या जरूरत। उन्होंने मांग उठाई कि हवाई अड्डे का निर्माण किसी अन्य स्थान पर किया जाए। प्रस्तावित 72 सीटर हवाई जहाज के लिए मंडी जिले में ही नंदगढ़, ढांगसीधार, मौवीसेरी आदि उपयुक्त जगह में एयरपोर्ट बनाया जाए। बल्ह में प्रस्तावित हवाई अड्डे से आठ गांव सियांह, टान्वा, जरलू, कुम्मी, छात्तरू, ढाबण, भौर, डुंगराई के लगभग 2500 स्थानीय परिवार प्रभावित होंगे।
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करीब 12000 की आबादी को परेशानी होगी। अधिकांश किसान प्रस्तावित हवाई अड्डे की वजह से भूमिहीन तथा विस्थापित हो जाएंगे। सरकार प्रभावितों को दरकिनार कर एयरपोर्ट की कवायद को आगे बढ़ा रही है जो कि उचित नहीं है।
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अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बोइंग 320 के लिए बनाना है तो उसके लिए 3150 मीटर लंबी हवाई पट्टी बनानी पड़ेगी। सुंदरनगर की पहाड़ी (बंदली धार) 500 मीटर तक काटनी पड़ेगी, जो संभव नहीं है। अब दूसरी तरफ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अब नए सिरे से 5 करोड़ खर्च कर लिडार सर्वे के माध्यम से हर हालत में अपने ड्रीम परियोजना को पूरा करना चाहते हैं, यह भी संभव नहीं है।
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बल्ह बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जोगिंद्र वालिया, सचिव नंद लाल वर्मा का कहना है कि जब ओएलएस सर्वे हो चुका है तो लिडार सर्वे की क्या जरूरत। उन्होंने मांग उठाई कि हवाई अड्डे का निर्माण किसी अन्य स्थान पर किया जाए। प्रस्तावित 72 सीटर हवाई जहाज के लिए मंडी जिले में ही नंदगढ़, ढांगसीधार, मौवीसेरी आदि उपयुक्त जगह में एयरपोर्ट बनाया जाए। बल्ह में प्रस्तावित हवाई अड्डे से आठ गांव सियांह, टान्वा, जरलू, कुम्मी, छात्तरू, ढाबण, भौर, डुंगराई के लगभग 2500 स्थानीय परिवार प्रभावित होंगे।
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करीब 12000 की आबादी को परेशानी होगी। अधिकांश किसान प्रस्तावित हवाई अड्डे की वजह से भूमिहीन तथा विस्थापित हो जाएंगे। सरकार प्रभावितों को दरकिनार कर एयरपोर्ट की कवायद को आगे बढ़ा रही है जो कि उचित नहीं है।
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