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Mandi News: अपील खारिज, तीन महीने की कैद का फैसला बरकरार
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मंडी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुंदरनगर की अदालत ने एक चेक बाउंस मामले में शीला देवी की अपील खारिज कर निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है। अदालत ने शीला देवी को तीन महीने की साधारण कैद और 1.30 लाख रुपये मुआवजा अदा करने का आदेश दिया था।
तथ्यों के अनुसार मामला वर्ष 2018 का है। सीडी कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड पुराना बाजार सुंदरनगर ने शीला देवी के खिलाफ शिकायत दायर की थी कि उन्होंने 1 लाख के ऋण के भुगतान के लिए एक चेक जारी किया था। यह चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। सोसायटी ने शीला देवी को कानूनी नोटिस भेजा। बाद में सोसायटी ने अदालत में शिकायत दायर की। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुंदरनगर ने 13 मई 2025 को शीला देवी को तीन माह कैद और 1.30 लाख रुपये का मुआवजा भरने का आदेश दिया था।
शीला देवी ने इस फैसले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुंदरनगर की अदालत में चुनौती दी। अदालत के समक्ष दलील दी कि उन्होंने 70,000 का ही ऋण लिया था, जिसे चुका दिया गया था। सोसायटी ने गलत तरीके से मुकदमा दायर किया है। अदालत ने कहा कि चेक की वैधता, हस्ताक्षर और खाते के स्वामित्व पर शीला देवी ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया। अदालत ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पाया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और न्यायोचित है। संवाद
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तथ्यों के अनुसार मामला वर्ष 2018 का है। सीडी कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड पुराना बाजार सुंदरनगर ने शीला देवी के खिलाफ शिकायत दायर की थी कि उन्होंने 1 लाख के ऋण के भुगतान के लिए एक चेक जारी किया था। यह चेक अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। सोसायटी ने शीला देवी को कानूनी नोटिस भेजा। बाद में सोसायटी ने अदालत में शिकायत दायर की। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सुंदरनगर ने 13 मई 2025 को शीला देवी को तीन माह कैद और 1.30 लाख रुपये का मुआवजा भरने का आदेश दिया था।
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शीला देवी ने इस फैसले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुंदरनगर की अदालत में चुनौती दी। अदालत के समक्ष दलील दी कि उन्होंने 70,000 का ही ऋण लिया था, जिसे चुका दिया गया था। सोसायटी ने गलत तरीके से मुकदमा दायर किया है। अदालत ने कहा कि चेक की वैधता, हस्ताक्षर और खाते के स्वामित्व पर शीला देवी ने कोई ठोस सबूत नहीं दिया। अदालत ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पाया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और न्यायोचित है। संवाद
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