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रावण के दरबार में अंगद ने जमाया पांव
Mandi
Updated Sat, 04 Oct 2014 05:32 AM IST
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रावण के दरबार में अंगद ने जमाया पांव
कोटली (मंडी)। तुंगलघाटी के मुख्यालय कोटली में 40 सालों से जारी रामलीला के दौरान रावण के दरबार में अंगद ने अपना पैर जमाकर प्रभु राम की शक्ति का परिचय दिया। भगवान श्रीराम के दूत के रूप में गए अंगद ने रावण को समझाने के लिए अनेक तर्क दिए कि वह सीता माता को सम्मान सहित वापस भगवान श्रीराम को वापस लौटा दे और उनके चरणों में पड़कर क्षमा मांगें तो वे उसे क्षमा कर देंगे। लेकिन सत्ता और शक्ति के अहंकार में चूर रावण अपनी कुटिलता से अंगद के तर्कों को निर्मूल साबित करते हुए किसी भी सूरत में उसकी बात मानने से इंकार कर दिया।
रावण ने कहा कि राम पत्नी के वियोग में है तो लक्ष्मण भाई के दुख से दुखी है। विभीषण डरपोक है तो जामवंत बूढ़ा हो गया है। हां, एक बंदर ने अपनी पूंछ से हमारी लंका को जलाया था। मगर उसके बारे में अभी क्यों सोचें जब मुकाबला होगा तब देख जाएगा। इस पर क्रोधित अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाकर उसके सभासदाें को अपना पैर उठाने की चुनौती दी। कोई भी अंगद का पैर नहीं उखाड़ पाया। अंगद के समझाने पर भी जब रावण नहीं माना तो उसने रावण से युद्ध का ऐलान कर दिया। रावण की भूमिका में प्रशांत मोहन ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। इस अवसर पर छायाकार एवं मंडी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष बीरबल शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार हेमकांत कात्यायन भी इस अवसर पर मौजूद थे। रामलीला कमेटी के प्रधान मोहन सिंह, मुख्य सलाहकार रामजीदास, ठाकुर सिंह वर्मा, अश्वनी, डॉ. महेंद्र, व्यापार मंडल कोटली के प्रधान मनीष शर्मा, महिला मंडल कोटली की प्रधान अंजली, सकसवाल की प्रधान योगेश्वरी और आवला टला की प्रधान संतोष भी मौजूद थीं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अपनी ओर से रामलीला कमेटी को 5100 भेंट किए।
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कोटली (मंडी)। तुंगलघाटी के मुख्यालय कोटली में 40 सालों से जारी रामलीला के दौरान रावण के दरबार में अंगद ने अपना पैर जमाकर प्रभु राम की शक्ति का परिचय दिया। भगवान श्रीराम के दूत के रूप में गए अंगद ने रावण को समझाने के लिए अनेक तर्क दिए कि वह सीता माता को सम्मान सहित वापस भगवान श्रीराम को वापस लौटा दे और उनके चरणों में पड़कर क्षमा मांगें तो वे उसे क्षमा कर देंगे। लेकिन सत्ता और शक्ति के अहंकार में चूर रावण अपनी कुटिलता से अंगद के तर्कों को निर्मूल साबित करते हुए किसी भी सूरत में उसकी बात मानने से इंकार कर दिया।
रावण ने कहा कि राम पत्नी के वियोग में है तो लक्ष्मण भाई के दुख से दुखी है। विभीषण डरपोक है तो जामवंत बूढ़ा हो गया है। हां, एक बंदर ने अपनी पूंछ से हमारी लंका को जलाया था। मगर उसके बारे में अभी क्यों सोचें जब मुकाबला होगा तब देख जाएगा। इस पर क्रोधित अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाकर उसके सभासदाें को अपना पैर उठाने की चुनौती दी। कोई भी अंगद का पैर नहीं उखाड़ पाया। अंगद के समझाने पर भी जब रावण नहीं माना तो उसने रावण से युद्ध का ऐलान कर दिया। रावण की भूमिका में प्रशांत मोहन ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। इस अवसर पर छायाकार एवं मंडी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष बीरबल शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार हेमकांत कात्यायन भी इस अवसर पर मौजूद थे। रामलीला कमेटी के प्रधान मोहन सिंह, मुख्य सलाहकार रामजीदास, ठाकुर सिंह वर्मा, अश्वनी, डॉ. महेंद्र, व्यापार मंडल कोटली के प्रधान मनीष शर्मा, महिला मंडल कोटली की प्रधान अंजली, सकसवाल की प्रधान योगेश्वरी और आवला टला की प्रधान संतोष भी मौजूद थीं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने अपनी ओर से रामलीला कमेटी को 5100 भेंट किए।
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