बिजली कब-कितना समय गुल रही, मीटर में दर्ज होगा

Mandi Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
उरला (मंडी)। उपभोक्ताओं के घरों में हो रही बिजली की कुल खपत का विवरण दर्ज करने के लिए विद्युत विभाग ने अब मेकेनिकल मीटर की जगह इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने की कवायद शुरू की है। इसके लिए प्रदेश भर में विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के घरों में लगे पुराने मेकेनिकल मीटर को बदल कर इलेक्ट्रिक मीटर लगाने का कार्य जोरशोर से शुरू किया गया है। विद्युत उपमंडल पधर के अंतर्गत विभाग द्वारा यह कार्य लगभग 40 फीसदी पूरा कर लिया गया है। शेष बचे मीटरों को बदलने में विभागीय कर्मचारी डटे हुए हैं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो मेकेनिकल मीटर की अपेक्षा इलेक्ट्रानिक मीटर आधुनिक तकनीक से लेस हैं। इससे बिजली की चोरी का पता चलता है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बिजली कब और कितने घंटे गुल रही, यह सारा ब्योरा इसमें दर्ज हो जाता है। कम वोल्टेज वाले प्रयोग किए गए उपकरणों की खपत का भी पूरा आंकड़ा दर्ज होता है, जबकि मेकेनिकल मीटरों में ऐसे उपकरणों की खपत की रीडिंग शो नहीं होती थी। इनमें इंडीकेटर तथा मोबाइल चार्जर आदि ऐसे कई उपकरणों के प्रयोग से मीटर स्टैंड रहता था।
विद्युत उपमंडल पधर के सहायक अभियंता ओसी वर्मा का कहना है कि प्रदेश भर में विभाग द्वारा पुराने मेकेनिकल मीटरों को बदलकर इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। पधर उपमंडल में यह कार्य लगभग 40 फीसदी पूरा कर लिया गया है। शेष बचे मीटरों को बदलने के लिए विभागीय कर्मी जुटे हुए हैं। इलेक्ट्रानिक मीटर लगने से उपभोक्ताओं को भी बेहतर सेवाएं मिलेंगी और विभागीय कर्मियों की लापरवाही पर शिकंजा कसेगा। विभाग को बिजली की पूरी खपत का ब्योरा दर्ज होने से फायदा पहुंचेगा।

इलेक्ट्रानिक मीटर की विशेषताएं
आधुनिक तकनीक से लेस इलेक्ट्रानिक मीटर में बिजली कब और कितने घंटे गुल रही, यह सारा ब्योरा दर्ज होता है। कम वोल्टेज वाले प्रयोग किए गए उपकरणों की खपत का भी पूरा आंकड़ा दर्ज होता है। मेकेनिकल मीटरों में ऐसे उपकरणों की खपत तथा बिजली कितने समय तक बंद रही, यह रीडिंग शो नहीं होती थी।

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