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उपभोक्ता को देना होगा 316500 रुपये मुआवजा
Mandi
Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
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मंडी। जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता के वाहन की 316500 रुपये मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। इसके अलावा कंपनी की सेवाओं में कमी के कारण उपभोक्ता को पहुंची परेशानी के बदले 3000 रुपये हर्जाना और 2000 रुपये शिकायत व्यय भी अदा करने के आदेश दिए।
जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज और सदस्यों सत्या भामा एवं केपी सहगल ने बलाबेड (ढालपूर) निवासी सूरजमणी पुत्र हीरा सिंह की शिकायत को उचित मानते इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा राशि 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने के आदेश दिए। अधिवक्ता प्रताप परमार के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने कंपनी के पास अपने वाहन का बीमा करवाया था। बीमा अवधि में ही उपभोक्ता का वाहन एक दुर्घटना में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उपभोक्ता ने घटना की सूचना पुलिस को देकर प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इस बारे में कंपनी के सर्वेयर ने मौका पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के नुकसान का आकलन भी किया था। लेकिन कंपनी ने उपभोक्ता के वाहन का मुआवजा जारी नहीं किया। ऐसे में उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के जवाब में कंपनी का कहना था कि दुर्घटना के समय वाहन में क्षमता से अधिक यात्री बिठाए थे जो बीमा पालिसी का उल्लंघन है। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी के सर्वेयर की दी गई रिपोर्ट मुआवजा तय करने के लिए पूरी तरह से विश्वसनीय है। इसके अलावा बीमा कंपनी ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह जाहिर होता हो कि वाहन में क्षमता से अधिक बिठाए गए यात्रियों के कारण यह घटना घटित हुई थी। फोरम ने कंपनी के मुआवजा तय न करने को सेवाओं में कमी देते हुए मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। इसके अलावा कंपनी की सेवाओं में कमी से उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया।
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जिला उपभोक्ता फोरम कुल्लू के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज और सदस्यों सत्या भामा एवं केपी सहगल ने बलाबेड (ढालपूर) निवासी सूरजमणी पुत्र हीरा सिंह की शिकायत को उचित मानते इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा राशि 9 प्रतिशत ब्याज दर सहित अदा करने के आदेश दिए। अधिवक्ता प्रताप परमार के माध्यम से फोरम में दायर शिकायत के अनुसार उपभोक्ता ने कंपनी के पास अपने वाहन का बीमा करवाया था। बीमा अवधि में ही उपभोक्ता का वाहन एक दुर्घटना में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उपभोक्ता ने घटना की सूचना पुलिस को देकर प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इस बारे में कंपनी के सर्वेयर ने मौका पर जाकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के नुकसान का आकलन भी किया था। लेकिन कंपनी ने उपभोक्ता के वाहन का मुआवजा जारी नहीं किया। ऐसे में उपभोक्ता ने फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के जवाब में कंपनी का कहना था कि दुर्घटना के समय वाहन में क्षमता से अधिक यात्री बिठाए थे जो बीमा पालिसी का उल्लंघन है। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी के सर्वेयर की दी गई रिपोर्ट मुआवजा तय करने के लिए पूरी तरह से विश्वसनीय है। इसके अलावा बीमा कंपनी ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह जाहिर होता हो कि वाहन में क्षमता से अधिक बिठाए गए यात्रियों के कारण यह घटना घटित हुई थी। फोरम ने कंपनी के मुआवजा तय न करने को सेवाओं में कमी देते हुए मुआवजा राशि ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। इसके अलावा कंपनी की सेवाओं में कमी से उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के बदले हर्जाना और शिकायत व्यय भी अदा करने का फैसला सुनाया।
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