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वाईन पॉलिसी का खुद ही उल्लंघन कर रहा विभाग
Updated Mon, 17 Dec 2018 11:30 PM IST
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शराब नीति का खुद ही उल्लंघन कर रहा विभाग : लक्ष्मेंद्र
मंडी। हिमाचल प्रदेश वाइन पॉलिसी के मुताबिक कोई भी शराब का ठेकेदार बस अड्डों से सौ मीटर की दूरी के भीतर कोई नहीं खोला जाना चाहिए। इस कानून की पालना करवाने के लिए समस्त हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय बस अड्डा प्रबंधन और जिला सह-आयुक्त आबकारी एवं कराधान अधिकारी को शक्तियां प्रदान की गई हैं, लेकिन मंडी में इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। अभी हाल ही में चर्चित पड्डल बस अड्डा में हिमाचल पथ परिवहन निगम की भूमि में ही बस अड्डे से 20 मीटर की दूरी पर ही ठेके का लाइसेंस जारी कर दिया गया है। दूसरी ओर सुंदरनगर बस अड्डे के निकासी द्वार पर भी ठेका खोल दिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि जागरूक लोगों द्वारा जिला प्रशासन को सूचित करने के बाद भी ठेके हटाने के कोई भी विभागीय निर्देश जारी नहीं हुए, जो अपने आप ही जिला प्रशासन और आबकारी एवं कराधान विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। हिमाचल बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र सिंह और सचिव राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रशासन को चेताया है कि यदि 15 दिन के भीतर इन ठेकों को नहीं हटाया जाता है तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
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मंडी। हिमाचल प्रदेश वाइन पॉलिसी के मुताबिक कोई भी शराब का ठेकेदार बस अड्डों से सौ मीटर की दूरी के भीतर कोई नहीं खोला जाना चाहिए। इस कानून की पालना करवाने के लिए समस्त हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय बस अड्डा प्रबंधन और जिला सह-आयुक्त आबकारी एवं कराधान अधिकारी को शक्तियां प्रदान की गई हैं, लेकिन मंडी में इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। अभी हाल ही में चर्चित पड्डल बस अड्डा में हिमाचल पथ परिवहन निगम की भूमि में ही बस अड्डे से 20 मीटर की दूरी पर ही ठेके का लाइसेंस जारी कर दिया गया है। दूसरी ओर सुंदरनगर बस अड्डे के निकासी द्वार पर भी ठेका खोल दिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि जागरूक लोगों द्वारा जिला प्रशासन को सूचित करने के बाद भी ठेके हटाने के कोई भी विभागीय निर्देश जारी नहीं हुए, जो अपने आप ही जिला प्रशासन और आबकारी एवं कराधान विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करती है। हिमाचल बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र सिंह और सचिव राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रशासन को चेताया है कि यदि 15 दिन के भीतर इन ठेकों को नहीं हटाया जाता है तो उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।