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Mandi News: 80 प्रतिशत प्रभावितों को नहीं मिली सांत्वना राशि
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सुंदरनगर (मंडी)। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के लिए 2012 में अधिग्रहित की गई भूमि के प्रभावित किसानों और परिवारों की बैठक रविवार को डैहर में हुई।
इसमें बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता अधिवक्ता अरुण प्रकाश आर्य ने की। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के बाद भी प्रभावित परिवारों को अब तक उनके वैधानिक अधिकारों के तहत सांत्वना राशि (सोलेशियम) एवं ब्याज का भुगतान नहीं किया गया है। 2015-16 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रभावित परिवारों को 30 प्रतिशत सोलेशियम ब्याज सहित देने का आदेश दिया था।
इसे एनएचएआई ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वर्ष 2019 में तरसेम सिंह बनाम एनएचएआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रभावितों के हक में फैसला सुनाया। इसके बावजूद वर्ष 2020 में केवल लगभग 20 प्रतिशत प्रभावितों को ही भुगतान किया गया, शेष 80 प्रतिशत परिवार आज भी अपने अधिकार से वंचित हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रभावित परिवार एक ज्ञापन तैयार कर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजेंगे ताकि मामले में शीघ्र न्याय मिल सके। साथ ही, प्रभावितों की ओर से एक संघर्ष समिति का गठन भी किया जाएगा, जो इस मुद्दे को संगठित तरीके से आगे बढ़ाएगी। प्रभावित परिवारों ने कहा कि उन्होंने देश की प्रगति और विकास के लिए अपनी जमीन दी थी, लेकिन आज न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। अब यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सभी प्रभावितों को उनका हक नहीं मिल जाता।
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इसमें बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता अधिवक्ता अरुण प्रकाश आर्य ने की। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के बाद भी प्रभावित परिवारों को अब तक उनके वैधानिक अधिकारों के तहत सांत्वना राशि (सोलेशियम) एवं ब्याज का भुगतान नहीं किया गया है। 2015-16 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रभावित परिवारों को 30 प्रतिशत सोलेशियम ब्याज सहित देने का आदेश दिया था।
इसे एनएचएआई ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वर्ष 2019 में तरसेम सिंह बनाम एनएचएआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रभावितों के हक में फैसला सुनाया। इसके बावजूद वर्ष 2020 में केवल लगभग 20 प्रतिशत प्रभावितों को ही भुगतान किया गया, शेष 80 प्रतिशत परिवार आज भी अपने अधिकार से वंचित हैं।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रभावित परिवार एक ज्ञापन तैयार कर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजेंगे ताकि मामले में शीघ्र न्याय मिल सके। साथ ही, प्रभावितों की ओर से एक संघर्ष समिति का गठन भी किया जाएगा, जो इस मुद्दे को संगठित तरीके से आगे बढ़ाएगी। प्रभावित परिवारों ने कहा कि उन्होंने देश की प्रगति और विकास के लिए अपनी जमीन दी थी, लेकिन आज न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है। अब यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सभी प्रभावितों को उनका हक नहीं मिल जाता।
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