तिरंगे में लिपटे शहीद इंद्र के पार्थिव शरीर को देख रो पड़ा पूरा गांव

Shimla Bureau Updated Wed, 15 Nov 2017 09:50 PM IST
तिरंगे में लिपटे शहीद इंद्र के पार्थिव शरीर को देख रो पड़ा पूरा गांव
गोहर (मंडी)। तिरंगे में लिपटे शहीद इंद्र सिंह के पार्थिव शरीर के उनके पैतृक गांव पंडोह पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। शहीद की पत्नी, बेटे, माता और भाई को रोता-बिलखता देख वहां पहुंचे गांव के लोग भी आंसू नहीं रोक सके। चीखो पुकार मच गई। इसी बीच शहीद की माता बोली, बेटा तू भारत माता के काम आया है, मुझे तुम पर गर्व है। शहीद की पत्नी ने भी पति की शहादत को गर्व की बात कही।
समय बुधवार सुबह 8:30 बजे। अपर पंडोह में शहीद इंद्र सिंह के घर में मौजूद परिजनों और रिश्तेदारों के अलावा पंडोह और आसपास के गांवों के लोगों का पहुंचना शुरू हो जाता है। सबको खबर थी कि शहीद इंद्र का पार्थिव शरीर ट्रांजिट कैंप पंडोह बुधवार तड़के 4 बजे सेना ने पहुंचा दिया है। सुबह 4 बजे शहीद इंद्र सिंह के मामा मान सिंह को सेना के अधिकारी ने फोन पर सूचना दी थी कि शहीद का शव 9 बजे उनके घर पहुंचाया दिया जाएगा। बुधवार प्रात: 9 बजे। गांव की महिलाएं शहीद इंद्र सिंह के घर पहुंचना शुरू होती हैं। इस दौरान शहीद इंद्र के रिश्तेदार रोते बिलखते उसके घर पहुंचते हैं और शहीद की मां और पत्नी समेत उसके बेटे उदय को गले लगाते हैं। पंडोह बाजार में 9:30 बजे शहीद का पार्थिव शरीर सेना के वाहन में पंडोह ट्रांजिट कैंप से पहुंचाया जाता है। जहां सैकड़ों की संख्या में सड़क किनारे खड़े स्कूली बच्चे, व्यापार मंडल के सदस्य और आसपास की पंचायतों के लोग इंद्र सिंह अमर रहे के नारे लगाना शुरू करते हैं। पंडोह बाजार से अपर पंडोह के लिए आगे सेना के वाहन में शहीद इंद्र का पार्थिव शरीर और पीछे पूरा पंडोह नारों के साथ रोता बिलखता इंद्र के घर पहुंचता है। जहां चीखो पुकार से माहौल गमगीन है। शहीद के घर पर उसका 8 वर्षीय बेटा उदय इस बात से बेखबर था कि उसके पापा अब उसे हमेशा के लिए छोड़कर चले गए हैं। बेटा उदय सबके हाथों में फूल देखकर लोगों से फूल मांग रहा था। शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही उसके घर पहुंचता है तो सबसे पहले शव के पास इंद्र के ससुर नागणु राम बिलख बिलख कर रोते हैं और कहते हैं बेटा ऊपर जाकर दुश्मनों से जरूर बदला लेना। जिसके बाद उसका भाई तेज सिंह विलाप करता है। जिसके आवाज सुन शहीद की मां रुकमणि बाहर आती है और दौड़कर अपने शहीद बेटे के शव से रोते बिलखते लिपट जाती है। इसे देख शहीद की पत्नी इंद्रा देवी भी रोते-बिलखते पति के पास पहुंच गई और उसके शरीर से लिपटकर जोर जोर से रोने लगी। गमगीन माहौल देख हजारों लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। मां, दादी को रोता देखा शहीद का बेटा उदय भी आंसू नहीं रोक सका और रोने लगा। पत्नी इंद्रा सेना के अधिकारियों से अपने पति के अंतिम दर्शन करने को कहने लगी। मगर सेना ने इनकार कर दिया। इंद्रा ने पति के हाथ और पांव देखने और छूने की अरदास लगाई। मगर वह भी पूरी नहीं हो पाई। जिससे वह धरती पर बिलख बिलख कर रोने लगी। इंद्रा बेटे को कहने लगी बेटा उदय पापा को उठाओ मगर सब कोशिशें बेकार सी हो गई थी इंद्रा के लिए। परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिसके बाद अंतिम यात्रा में शहीद की पत्नी इंद्रा बेटे के साथ राफी शमशान घाट तक पहुंची।

13 को ही पिता ने दी थी प्राणों की आहुति
इंद्र सिंह ने चार वर्ष पूर अपर पंडोह में जमीन ली थी तथा उस पर मकान बनाकर वह यहां परिवार समेत रह रहा था। उसकी मां रुकमणि और छोटा भाई तेज सिंह धार पंचायत बगयोध गांव में रहते थे। बताया जा रहा है कि शहीद के पिता बीबीएमबी में कार्यरत थे तथा करीब 10 वर्ष पूर्व उनकी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। यह भी बताया जा रहा है कि 13 तारीख को इंद्र सिंह भी शहीद हुआ और 10 वर्ष पहले 13 तारीख को उसके पिता की भी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी।

परिवार के लिए खरीदी थी कार
अपर पंडोह में मकान बनाने के बाद इंद्र सिंह ने परिवार के लिए कार खरीदी थी। उसके मामा मान सिंह ने बताया कि उसका सपना था कि एक अच्छा घर हो और घर में खड़ी उसकी कार हो। मगर शहीद होने के बाद इंद्र सिंह के सारे सपने यहीं रह गए।

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