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मांगों को लेकर भामसं 17 को करेगा धरना प्रदर्शन
Updated Sun, 12 Nov 2017 10:05 PM IST
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सरकाघाट (मंडी)। भारतीय मजदूर संघ की बैठक में दिल्ली में 17 नवंबर को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी धरना के समर्थन का एलान किया है। साथ ही दिल्ली में भारी संख्या में पहुंचने का दावा किया है। केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी करार देते हुए भामसं दिल्ली में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करने जा रहा है। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश वर्मा और प्रदेश महामंत्री मंगत राम नेगी ने कार्यकर्ताओं से बैठक में आग्रह किया है कि इन इस प्रदर्शन में भारी संख्या में पहुंचकर प्रदर्शन को सफल बनाएं। पदाधिकारियों का कहना है कि संघ केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी गतिविधियों से नाराज है। इसी नाराजगी के चलते सुबह 10 बजे रामलीला मैदान से पैदल चलकर संसद मार्ग तक प्रदर्शन किया जाएगा। इस धरने में देशभर के लाखों मजदूर भाग लेंगे। साथ ही श्रमिक वर्ग की मांगों पर भी विचार किया जाएगा। उनके साथ जिला महामंत्री नरेश कुमार ठाकुर, ब्लॉक प्रधान सुखदेव शर्मा उपस्थित रहे।
ये हैं प्रमुख मांगें
15 मई 2003 से पहले चालू पेंशन योजना को लागू करना, बोर्डों और निगमों के कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना लागू करना, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर्स, मिड-डे-मील वर्कर, सिलाई-कढ़ाई और जलरक्षकों के मानदेय में वृद्धि करना, चरणबद्ध ढंग से उनको नियमित रूप में बदलना, इन वर्गों के कर्मचारियों को नियमित तौर पर लाने के लिए ठोस नीति बनाई जाए तथा इनको ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा से जोड़ा जाए। इसके साथ सरकारी विभागों और बोर्डों में तृतीय श्रेणी और चौथी श्रेणी के पदों को तुरंत भरा जाए। ठेकेदारों की प्रथा पर पूर्ण अंकुश लगाया जाए। औद्योगिक क्षेत्र तथा प्रोजेक्ट्स संभालने में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर केंद्र सरकार की तर्ज पर इस वर्ग को न्यूनतम 14 हजार मासिक वेतन दिया जाए।
ये हैं प्रमुख मांगें
15 मई 2003 से पहले चालू पेंशन योजना को लागू करना, बोर्डों और निगमों के कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना लागू करना, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर्स, मिड-डे-मील वर्कर, सिलाई-कढ़ाई और जलरक्षकों के मानदेय में वृद्धि करना, चरणबद्ध ढंग से उनको नियमित रूप में बदलना, इन वर्गों के कर्मचारियों को नियमित तौर पर लाने के लिए ठोस नीति बनाई जाए तथा इनको ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा से जोड़ा जाए। इसके साथ सरकारी विभागों और बोर्डों में तृतीय श्रेणी और चौथी श्रेणी के पदों को तुरंत भरा जाए। ठेकेदारों की प्रथा पर पूर्ण अंकुश लगाया जाए। औद्योगिक क्षेत्र तथा प्रोजेक्ट्स संभालने में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर केंद्र सरकार की तर्ज पर इस वर्ग को न्यूनतम 14 हजार मासिक वेतन दिया जाए।
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