{"_id":"5b1d3b914f1c1bac6e8b71be","slug":"41528642449-mandi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमरजेंसी नंबर पर एक प्रैंक कॉल, दूसरे की जिंदगी पर पड़ सकती है भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमरजेंसी नंबर पर एक प्रैंक कॉल, दूसरे की जिंदगी पर पड़ सकती है भारी
Updated Sun, 10 Jun 2018 08:24 PM IST
विज्ञापन
इमरजेंसी नंबर में आधी प्रैंक कॉल्स, दूसरे की जिंदगी पर पड़ सकती है भारी
108 और 102 इमरजेंसी नंबर लगातार बढ़ रही प्रैंक काल्स
अब पुलिस को इमरजेंसी सेवा प्रबंधन सौंपेगा कॉलर के नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। इमरजेंसी नंबरों 108 और 102 पर लगातार बढ़ रही प्रैंक कॉल्स चिंता का सबब बन गई हैं। इमरजेंसी नंबरों पर एक प्रैंक कॉल आपात स्थिति में फंसे किसी व्यक्ति के जिंदगी और मौत का कारण बन सकती है। 108 एंबुलेंस सेवा को आने वाली 100 फोन कॉल्स में से 50 कॉल प्रैंक पाई गई हैं। कुछ फोन कॉल्स तो अभद्र भाषा का प्रयोग भी कर रहे हैं।
108 एंबुलेंस सर्विस के स्टेट हेड मेहूल सुकुमारन ने कहा कि जीवीके ईएमआरआई 108 में गत वर्ष आई इमरजेंसी कॉल्स में से आधी कॉल्स प्रैंक पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में पुलिस प्रशासन को सूचना दी जाएगी। जिन नंबरों से कॉल्स आ रही उन नंबरों को पुलिस को सौंपा जाएगा ताकि उचित कार्रवाई हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि इमरजेंसी नंबरों पर एक-एक सेकेंड महत्वपूर्ण होता है। यदि टीम का कोई सदस्य इस तरह की कॉल सुनने में व्यस्त रहता है तो यह लाजिमी है कि कोई अन्य कॉलर फोन उठाए जाने के इंतजार में कतार में रहेगा। इससे यह आपात स्थिति में किसी भी व्यक्ति की जान पर भारी पड़ सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि आपात स्थिति में ही फोन करें। 108 और 102 की कार्यप्रणाली इतनी चुस्त-दुरुस्त है कि 99 फीसदी फोन कॉल्स का तुरंत उत्तर दिया जाता हैै। प्रैंक कॉल्स समय की बर्बादी और आपात स्थिति में फंसे व्यक्ति की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2018 से 30 अप्रैल 2018 तक 80 से अधिक कॉल्ज ऐसी थी जिसमें कॉलर ने अश्लील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। अब इन नंबरों को पुलिस को सौंपे जाने की तैयारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
108 और 102 इमरजेंसी नंबर लगातार बढ़ रही प्रैंक काल्स
अब पुलिस को इमरजेंसी सेवा प्रबंधन सौंपेगा कॉलर के नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। इमरजेंसी नंबरों 108 और 102 पर लगातार बढ़ रही प्रैंक कॉल्स चिंता का सबब बन गई हैं। इमरजेंसी नंबरों पर एक प्रैंक कॉल आपात स्थिति में फंसे किसी व्यक्ति के जिंदगी और मौत का कारण बन सकती है। 108 एंबुलेंस सेवा को आने वाली 100 फोन कॉल्स में से 50 कॉल प्रैंक पाई गई हैं। कुछ फोन कॉल्स तो अभद्र भाषा का प्रयोग भी कर रहे हैं।
108 एंबुलेंस सर्विस के स्टेट हेड मेहूल सुकुमारन ने कहा कि जीवीके ईएमआरआई 108 में गत वर्ष आई इमरजेंसी कॉल्स में से आधी कॉल्स प्रैंक पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में पुलिस प्रशासन को सूचना दी जाएगी। जिन नंबरों से कॉल्स आ रही उन नंबरों को पुलिस को सौंपा जाएगा ताकि उचित कार्रवाई हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि इमरजेंसी नंबरों पर एक-एक सेकेंड महत्वपूर्ण होता है। यदि टीम का कोई सदस्य इस तरह की कॉल सुनने में व्यस्त रहता है तो यह लाजिमी है कि कोई अन्य कॉलर फोन उठाए जाने के इंतजार में कतार में रहेगा। इससे यह आपात स्थिति में किसी भी व्यक्ति की जान पर भारी पड़ सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने लोगों से अपील की है कि आपात स्थिति में ही फोन करें। 108 और 102 की कार्यप्रणाली इतनी चुस्त-दुरुस्त है कि 99 फीसदी फोन कॉल्स का तुरंत उत्तर दिया जाता हैै। प्रैंक कॉल्स समय की बर्बादी और आपात स्थिति में फंसे व्यक्ति की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2018 से 30 अप्रैल 2018 तक 80 से अधिक कॉल्ज ऐसी थी जिसमें कॉलर ने अश्लील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। अब इन नंबरों को पुलिस को सौंपे जाने की तैयारी है।
विज्ञापन