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बच्चों की सेहत में भारी पड़ सकती है खानपान में चूक
अमर उजाला कुल्लू
Updated Sun, 03 Apr 2016 10:01 PM IST
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कुल्लू जिला के आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे करीब 2586 नौनिहाल अल्प कुपोषित हैं। इन नौनिहालों के खान-पान में जरा सी भी चूक अभिभावकों के लिए भारी साबित हो सकती है। ध्यान न रखने पर ये नौनिहाल अति कुषोषित जोन में जा सकते हैं। वर्तमान में जिला में 12 नौनिहाल अति कुपोषित हैं।
जिला के आंगनबाड़ी में पढ़ रहे नौनिहाल तीन श्रेणी में रखे गए हैं। जिनमें ग्रीन जोन में सामान्य, येलो में अल्प कुपोषित और ऑरेंज जोन में अति कुपोषित नौनिहाल शामिल हैं। अल्प कुपोषित नौनिहालों के खानपान पर विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। खानपान में लापरवाही पर उक्त नौनिहाल अति कुपोषित हो सकते हैं। अकेले कुल्लू खंड में करीब 1155 नौनिहाल अल्प कुपोषित हैं, जो चिंताजनक है। येलो जोन में आने वाले नौनिहाल उम्र के हिसाब से भार से कम होते हैं। आनी खंड में येलो जोन में 313, ऑरेंज में शून्य, बंजार खंड में येलो जोन में 412 और ऑरेंज जोन में शून्य, कटराईं में 603 येलो जोन में और सात ऑरेंज जोन में, नित्थर में 103 नौनिहाल येलो जोन और एक नौनिहाल ऑरेंज जोन में है। कुल्लू खंड में 1155 येलो जोन में और चार ऑरेंज जोन में हैं।
इधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश शर्मा ने बताया कि समय-समय पर नौनिहालों का भार जांचा जाता है। भार कम होने पर अभिभावकों को परामर्श दिया जाता है, ताकि बच्चे को सामान्य श्रेणी में लाया जा सके। बच्चों का डॉक्टर से चेकअप भी करवाया जाता है। पिछले वर्ष के मुुकाबले इस बार अति कुपोषित नौनिहालों की संख्या का ग्राफ गिरा है।
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बाक्स
बीमारी के लक्षण
बच्चों में कुपोषण के लक्षणों में विकास में विफलता, चिड़चिड़ापन, मंदी और चिंता की तरह व्यवहार में बदलाव के साथ अत्यधिक रोना, त्वचा सूखी और परतदार होना, मांसपेशियों में शक्ति का अभाव, पेट और पैरों की सूजन और अन्य शामिल है।
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ऐसे करें बचाव
बच्चों को नियमित रूप से कैलोरी और प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन दें। बहुत अधिक संक्रमित बच्चों को तत्काल डॉक्टर से पास ले जाएं। नियमित रूप से बच्चे का भार करें। आयु के अनुसार भार न होने पर खान पर विशेष ध्यान दें।
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जिला के आंगनबाड़ी में पढ़ रहे नौनिहाल तीन श्रेणी में रखे गए हैं। जिनमें ग्रीन जोन में सामान्य, येलो में अल्प कुपोषित और ऑरेंज जोन में अति कुपोषित नौनिहाल शामिल हैं। अल्प कुपोषित नौनिहालों के खानपान पर विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। खानपान में लापरवाही पर उक्त नौनिहाल अति कुपोषित हो सकते हैं। अकेले कुल्लू खंड में करीब 1155 नौनिहाल अल्प कुपोषित हैं, जो चिंताजनक है। येलो जोन में आने वाले नौनिहाल उम्र के हिसाब से भार से कम होते हैं। आनी खंड में येलो जोन में 313, ऑरेंज में शून्य, बंजार खंड में येलो जोन में 412 और ऑरेंज जोन में शून्य, कटराईं में 603 येलो जोन में और सात ऑरेंज जोन में, नित्थर में 103 नौनिहाल येलो जोन और एक नौनिहाल ऑरेंज जोन में है। कुल्लू खंड में 1155 येलो जोन में और चार ऑरेंज जोन में हैं।
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इधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश शर्मा ने बताया कि समय-समय पर नौनिहालों का भार जांचा जाता है। भार कम होने पर अभिभावकों को परामर्श दिया जाता है, ताकि बच्चे को सामान्य श्रेणी में लाया जा सके। बच्चों का डॉक्टर से चेकअप भी करवाया जाता है। पिछले वर्ष के मुुकाबले इस बार अति कुपोषित नौनिहालों की संख्या का ग्राफ गिरा है।
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बीमारी के लक्षण
बच्चों में कुपोषण के लक्षणों में विकास में विफलता, चिड़चिड़ापन, मंदी और चिंता की तरह व्यवहार में बदलाव के साथ अत्यधिक रोना, त्वचा सूखी और परतदार होना, मांसपेशियों में शक्ति का अभाव, पेट और पैरों की सूजन और अन्य शामिल है।
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ऐसे करें बचाव
बच्चों को नियमित रूप से कैलोरी और प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन दें। बहुत अधिक संक्रमित बच्चों को तत्काल डॉक्टर से पास ले जाएं। नियमित रूप से बच्चे का भार करें। आयु के अनुसार भार न होने पर खान पर विशेष ध्यान दें।