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बड़ा देव मतलोड़ा व देव कांढेनाग के बीच खत्म हुआ विवाद
Updated Wed, 31 Oct 2018 11:34 PM IST
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बड़ादेव मतलोड़ा और कांढेनाग में विवाद खत्म
देवलुओं और कार कारिंदों ने माना देवताओं का निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
बालीचौकी (मंडी)। करीब 65 वर्ष बाद सराज घाटी के आराध्य देवता बड़ा देव मतलोड़ा और देव कांढेनाग के देवताओं ने विवाद का हल खुद ही कर लिया है। इस पर दोनों देवताओं के देवलुओं और देवता कार कारिंदों ने सहमति जताई। देवताओं में देवलुओं की पूजा को लेकर करीब 65 वर्षों से विवाद था। देवताओं के देवरथों में आपसी मिलन कई बार होता था लेकिन पूजा वाला विवाद नहीं सुलझ पाया था। देवताओं ने फैसला किया कि देवरथ बड़ा देव देव मतलोड़ा दाहिने और देव कांढेनाग बाएं तरफ बैठेंगे। देव मतलोड़ा का इतिहास है कि देवरथ कभी भी किसी देवता से बाएं नहीं बैठता। देवरथ के फैसले में देवता ने कहा कि पूजा विवाद को वह समाप्त करते हैं। निर्णय में कहा गया कि बड़ा देव मतलोड़ा की पूजा देव मतलोड़ा के पुजारी करेंगे व देव कांढा नाग की पूजा कांढेनाग के पुजारी करेंगे। देवताओं का यह फैसला देवताओं की दोनों हारियों ने भी मान लिया। दोनों देवरथ एक साथ बैठे और पूजा अपनी-अपनी की। देवता के कामी-धामियों और हारियानों ने यह फैसला मान लिया है। देव मतलोड़ा के जज ओम प्रकाश, प्रधान नाहर मल, सचिव जीवन सिंह का कहना है कि फैसला देव रथों की ओर से किया गया है, जो दोनों देवताओं को देवलुओं ने भी मान लिया है। यह फैसला एक सराज घाटी के लिए महत्वपूर्ण है। इससे पहले देव बड़ा देव मतलोड़ा और देव चुंजवाला का आपसी विवाद का फैसला भी देवताओं द्वारा किया गया था। अब सराज में किसी भी देवता का कोई भी विवाद नहीं रहा। सब देवताओं ने प्राचीन परंपरा के अनुसार फैसले लिए हैं।
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देवलुओं और कार कारिंदों ने माना देवताओं का निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
बालीचौकी (मंडी)। करीब 65 वर्ष बाद सराज घाटी के आराध्य देवता बड़ा देव मतलोड़ा और देव कांढेनाग के देवताओं ने विवाद का हल खुद ही कर लिया है। इस पर दोनों देवताओं के देवलुओं और देवता कार कारिंदों ने सहमति जताई। देवताओं में देवलुओं की पूजा को लेकर करीब 65 वर्षों से विवाद था। देवताओं के देवरथों में आपसी मिलन कई बार होता था लेकिन पूजा वाला विवाद नहीं सुलझ पाया था। देवताओं ने फैसला किया कि देवरथ बड़ा देव देव मतलोड़ा दाहिने और देव कांढेनाग बाएं तरफ बैठेंगे। देव मतलोड़ा का इतिहास है कि देवरथ कभी भी किसी देवता से बाएं नहीं बैठता। देवरथ के फैसले में देवता ने कहा कि पूजा विवाद को वह समाप्त करते हैं। निर्णय में कहा गया कि बड़ा देव मतलोड़ा की पूजा देव मतलोड़ा के पुजारी करेंगे व देव कांढा नाग की पूजा कांढेनाग के पुजारी करेंगे। देवताओं का यह फैसला देवताओं की दोनों हारियों ने भी मान लिया। दोनों देवरथ एक साथ बैठे और पूजा अपनी-अपनी की। देवता के कामी-धामियों और हारियानों ने यह फैसला मान लिया है। देव मतलोड़ा के जज ओम प्रकाश, प्रधान नाहर मल, सचिव जीवन सिंह का कहना है कि फैसला देव रथों की ओर से किया गया है, जो दोनों देवताओं को देवलुओं ने भी मान लिया है। यह फैसला एक सराज घाटी के लिए महत्वपूर्ण है। इससे पहले देव बड़ा देव मतलोड़ा और देव चुंजवाला का आपसी विवाद का फैसला भी देवताओं द्वारा किया गया था। अब सराज में किसी भी देवता का कोई भी विवाद नहीं रहा। सब देवताओं ने प्राचीन परंपरा के अनुसार फैसले लिए हैं।