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किरतपुर- मनाली फ ोरलेन प्रोजेक्ट के दूसरे चरण ने भी पकड़ी रफ्तार
Updated Mon, 26 Mar 2018 10:45 PM IST
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कीरतपुर मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का कार्य।
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
नगवाईं (मंडी)। सामरिक दृष्टि से अहम करीब सात हजार करोड़ के किरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ ली है। पहले चरण में किरतपुर से नागचला तक का निर्माण कार्य चला हुआ है। दूसरे चरण में नागचला से मनाली तक के निर्माण ने रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को थलौट में टनल का निर्माण भूमि पूजन के बाद शुरू कर दिया गया है। पंडोह से औट तक सबसे ज्यादा दस सुरंगों के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। सुरंगों का निर्माण एफ्कान इंफ्रास्ट्रकचर कंपनी कर रही है। इन सुरंगों के निर्माण के बाद पंडोह से टकोली की बीच की दूरी भी लगभग चार किलोमीटर कम हो जाएगी। किरतपुर टू मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट बनने से चंडीगढ़ से मनाली के बीच की दूरी करीब 50 से 60 किमी कम हो जाएगी, जिससे चंडीगढ़ से मनाली तक पहुंचने के लिए पर्यटकों के करीब दो घंटे तक के समय की बचत होगी। चंडीगढ़ से मनाली तक की दूरी जो वर्तमान में लगभग 320 किमी है कम होकर लगभग 260 किमी तक रह जाएगी। चंडीगढ़ से मनाली करीब सात घंटों में पहुंचा जा सकेगा। जबकि, वर्तमान नेशनल हाईवे पर चंडीगढ़ से मनाली पहुंचने के लिए लगभग 9 से 10 घंटे का सफर करना पड़ता है।
साढ़े तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करना लक्ष्य
पंडोह से टकोली तक सबसे ज्यादा दस सुरंगों बन रही हैं। दस सुरंगों में ही करीब 22 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कंपनी के महाप्रबंधक रणजीत सिंह, अधिकारी कर्नल बलजिंदर सिंह और धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि इस परियोजना को साढ़े तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि, पूरा प्रोजेक्ट करीब सात हजार करोड़ रुपये का है लेकिन, निर्माण कार्य की देरी के चलते इसकी प्रोजेक्ट लागत बढ़ती जा रही है। सोमवार को द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर ने भूमिपूजन में शिरकत की।
इस तरह से चल रहा है कार्य
नेरचौक से मनाली तक बनने वाले फोरलेन के निर्माण कार्य पर लगभग 4800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। प्रोजेक्ट के पहले चरण का निर्माण कार्य किरतपुर टू नेरचौक चल रहा है। फोरलेन के प्रथम चरण के इस हिस्से को करीब 2260 करोड़ रुपये से बनाया जा रहा है। नेरचौक से आगे मनाली तक प्रस्तावित फोरलेन का कार्य दूसरे चरण में किया जा रहा है।
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टोल प्लाजा में महंगा होगा सफर
किरतपुर से मनाली तक फोरलेन निर्माण पूरा होने के बाद सफर भी महंगा हो जाएगा। आधा दर्जन के करीब टोल प्लाजा भी स्थापित किए जाने की योजना है। यहां बस, ट्रक, कार आदि की पर्ची कटेगी। बताया जा रहा है कि यह टोल प्लाजा फास्ट टैग की सुविधा से भी लैस होंगे, जिससे टोल टैक्स कटवाने के लिए वाहनों को बैरियरों पर नहीं रुकना पड़ेगा।
कुल्लू-मनाली के बीच लगभग 35 किमी के हिस्से को फोरलेन में कनवर्ट करने के लिए एनएचएआई की ओर से तैयार की गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार फोरलेन बनाने पर खर्चा कम होना है, जबकि जमीन का मुआवजा देने पर ज्यादा राशि खर्च होगी। एनएचएआई की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार कुल्लू से मनाली तक के फोरलेन के हिस्से के निर्माण की अनुमानित लागत जहां लगभग सवा 200 करोड़ रुपये है, वहीं जमीन, घरों और पेड़ पौधों का दिया जाने वाला मुआवजा इससे कहीं अधिक देना पड़ रहा है, जो करीब 300 करोड़ रुपये बनता है। फ ोरलेन प्रोजेक्ट के लिए 35 किमी के इस हिस्से में लगभग 60 हेक्टेयर यानी 700 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
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नगवाईं (मंडी)। सामरिक दृष्टि से अहम करीब सात हजार करोड़ के किरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट ने रफ्तार पकड़ ली है। पहले चरण में किरतपुर से नागचला तक का निर्माण कार्य चला हुआ है। दूसरे चरण में नागचला से मनाली तक के निर्माण ने रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को थलौट में टनल का निर्माण भूमि पूजन के बाद शुरू कर दिया गया है। पंडोह से औट तक सबसे ज्यादा दस सुरंगों के निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। सुरंगों का निर्माण एफ्कान इंफ्रास्ट्रकचर कंपनी कर रही है। इन सुरंगों के निर्माण के बाद पंडोह से टकोली की बीच की दूरी भी लगभग चार किलोमीटर कम हो जाएगी। किरतपुर टू मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट बनने से चंडीगढ़ से मनाली के बीच की दूरी करीब 50 से 60 किमी कम हो जाएगी, जिससे चंडीगढ़ से मनाली तक पहुंचने के लिए पर्यटकों के करीब दो घंटे तक के समय की बचत होगी। चंडीगढ़ से मनाली तक की दूरी जो वर्तमान में लगभग 320 किमी है कम होकर लगभग 260 किमी तक रह जाएगी। चंडीगढ़ से मनाली करीब सात घंटों में पहुंचा जा सकेगा। जबकि, वर्तमान नेशनल हाईवे पर चंडीगढ़ से मनाली पहुंचने के लिए लगभग 9 से 10 घंटे का सफर करना पड़ता है।
साढ़े तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करना लक्ष्य
पंडोह से टकोली तक सबसे ज्यादा दस सुरंगों बन रही हैं। दस सुरंगों में ही करीब 22 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कंपनी के महाप्रबंधक रणजीत सिंह, अधिकारी कर्नल बलजिंदर सिंह और धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि इस परियोजना को साढ़े तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि, पूरा प्रोजेक्ट करीब सात हजार करोड़ रुपये का है लेकिन, निर्माण कार्य की देरी के चलते इसकी प्रोजेक्ट लागत बढ़ती जा रही है। सोमवार को द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर ने भूमिपूजन में शिरकत की।
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इस तरह से चल रहा है कार्य
नेरचौक से मनाली तक बनने वाले फोरलेन के निर्माण कार्य पर लगभग 4800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। प्रोजेक्ट के पहले चरण का निर्माण कार्य किरतपुर टू नेरचौक चल रहा है। फोरलेन के प्रथम चरण के इस हिस्से को करीब 2260 करोड़ रुपये से बनाया जा रहा है। नेरचौक से आगे मनाली तक प्रस्तावित फोरलेन का कार्य दूसरे चरण में किया जा रहा है।
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टोल प्लाजा में महंगा होगा सफर
किरतपुर से मनाली तक फोरलेन निर्माण पूरा होने के बाद सफर भी महंगा हो जाएगा। आधा दर्जन के करीब टोल प्लाजा भी स्थापित किए जाने की योजना है। यहां बस, ट्रक, कार आदि की पर्ची कटेगी। बताया जा रहा है कि यह टोल प्लाजा फास्ट टैग की सुविधा से भी लैस होंगे, जिससे टोल टैक्स कटवाने के लिए वाहनों को बैरियरों पर नहीं रुकना पड़ेगा।
कुल्लू-मनाली के बीच लगभग 35 किमी के हिस्से को फोरलेन में कनवर्ट करने के लिए एनएचएआई की ओर से तैयार की गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार फोरलेन बनाने पर खर्चा कम होना है, जबकि जमीन का मुआवजा देने पर ज्यादा राशि खर्च होगी। एनएचएआई की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार कुल्लू से मनाली तक के फोरलेन के हिस्से के निर्माण की अनुमानित लागत जहां लगभग सवा 200 करोड़ रुपये है, वहीं जमीन, घरों और पेड़ पौधों का दिया जाने वाला मुआवजा इससे कहीं अधिक देना पड़ रहा है, जो करीब 300 करोड़ रुपये बनता है। फ ोरलेन प्रोजेक्ट के लिए 35 किमी के इस हिस्से में लगभग 60 हेक्टेयर यानी 700 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।