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जौ के आटे का गुलाल हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आहवान
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मंडी शहर की खुशहाली को देव
आदि ब्रह्मा ने बांधी सुरक्षा कार
जौ के आटे का गुलाल हवा में उछाल बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान
अगले वर्ष तक लोगों की सुरक्षा करने का किया वादा
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। प्राचीन परंपरा के अनुसार सोमवार को शिवरात्रि पर्व के समापन पर उत्तरशाल क्षेत्र के देव आदि ब्रह्मा ने मंडी शहर की परिक्रमा कर खुशहाली के लिए कार बांधी। देवता के साथ सैकड़ों लोग वाद्य यंत्रों पर तलवारों के साथ नाचते गाते हुए चल रहे थे। देव रथ के साथ गुर ने नंगे पांव शहर की परिक्रमा करते हुए नगर वासियों की सुख समृद्धि के लिए कामना की। परिक्रमा सेरी मंच से शुरू होकर भूतनाथ गली से होते हुए विक्टोरिया पुल के पास से समेखतर से दोबारा चौहाटा बाजार पहुंची। इस दौरान देवता के देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान किया। सेरी मंच के पास पहुंचकर देवता के गुर और पुजारी ने देवता के आगे अपने यंत्रों के साथ नाचते हुए देव शक्ति को प्रदर्शित किया। इसके पश्चात देव अपने क्षेत्र की ओर रवाना हो गए।
रियासत काल से चली आ रही प्रथा
शिवरात्रि के दौरान जनपद के कई वरिष्ठ देवी-देवता रियासत काल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदि ब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देव आदि ब्रह्मा एकमात्र ऐसे देवता हैं। जिनके रथ की बनावट कुल्लू के देवताओं की रथ शैली की तरह है। देव आदि ब्रह्मा का शिवरात्रि मेलों से अलग जुड़ाव है।
बड़ादेव कमरूनाग ने भी सेरी मंच पर दिए लोगों को दर्शन
टारना मंदिर में सात दिन से ठहरे बड़ादेव कमरूनाग देवी-देवताओं को विदा करने के लिए चौहाटा जातर में पहुंचे। इसके बाद सेरी मंच की पौड़ियों के पास थोड़ी देर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। वहीं, सेरी मंच पर बड़ादेव कमरूनाग के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। शिवरात्रि महोत्सव के आखिरी दिन देव समागम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से छोटी काशी मंडी गूंज उठी। चौहाटा जातर में देवी-देवताओं की विदाई के बाद मंडी शहर में उदासी सी छा गई।
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आदि ब्रह्मा ने बांधी सुरक्षा कार
जौ के आटे का गुलाल हवा में उछाल बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान
अगले वर्ष तक लोगों की सुरक्षा करने का किया वादा
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी। प्राचीन परंपरा के अनुसार सोमवार को शिवरात्रि पर्व के समापन पर उत्तरशाल क्षेत्र के देव आदि ब्रह्मा ने मंडी शहर की परिक्रमा कर खुशहाली के लिए कार बांधी। देवता के साथ सैकड़ों लोग वाद्य यंत्रों पर तलवारों के साथ नाचते गाते हुए चल रहे थे। देव रथ के साथ गुर ने नंगे पांव शहर की परिक्रमा करते हुए नगर वासियों की सुख समृद्धि के लिए कामना की। परिक्रमा सेरी मंच से शुरू होकर भूतनाथ गली से होते हुए विक्टोरिया पुल के पास से समेखतर से दोबारा चौहाटा बाजार पहुंची। इस दौरान देवता के देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान किया। सेरी मंच के पास पहुंचकर देवता के गुर और पुजारी ने देवता के आगे अपने यंत्रों के साथ नाचते हुए देव शक्ति को प्रदर्शित किया। इसके पश्चात देव अपने क्षेत्र की ओर रवाना हो गए।
रियासत काल से चली आ रही प्रथा
शिवरात्रि के दौरान जनपद के कई वरिष्ठ देवी-देवता रियासत काल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदि ब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देव आदि ब्रह्मा एकमात्र ऐसे देवता हैं। जिनके रथ की बनावट कुल्लू के देवताओं की रथ शैली की तरह है। देव आदि ब्रह्मा का शिवरात्रि मेलों से अलग जुड़ाव है।
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बड़ादेव कमरूनाग ने भी सेरी मंच पर दिए लोगों को दर्शन
टारना मंदिर में सात दिन से ठहरे बड़ादेव कमरूनाग देवी-देवताओं को विदा करने के लिए चौहाटा जातर में पहुंचे। इसके बाद सेरी मंच की पौड़ियों के पास थोड़ी देर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। वहीं, सेरी मंच पर बड़ादेव कमरूनाग के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। शिवरात्रि महोत्सव के आखिरी दिन देव समागम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से छोटी काशी मंडी गूंज उठी। चौहाटा जातर में देवी-देवताओं की विदाई के बाद मंडी शहर में उदासी सी छा गई।
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