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डीसी ऋग्वेद ठाकुर ने कोटरोपी में लिया स्थिति का जायजा
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:02 PM IST
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पधर (मंडी)। मंडी जोगिंद्रनगर मार्ग पर स्थित कोटरोपी फिर किसी बड़ी प्राकृतिक त्रासदी का सबब न बने, इसके लिए जिला प्रशासन ने बरसात से पहले कोटरोपी घटनास्थल का दौरा किया। डीसी ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर की अध्यक्षता में टीम ने सुरक्षा को लेकर किए जा रहे कार्य का जायजा लिया। यहां सुरक्षा और एहतियात के तौर पर उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों को लेकर आईआईटी विशेषज्ञों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात के साथ प्रभावित गांव तथा घरों में जाकर लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। कहा कि कोटरोपी के पास आईआईटी मंडी के सहयोग से दो सेंसर लगाए जाएंगे। इन्हें जल्द ही स्थापित कर दिया जाएगा। यह सेंसर भूस्खलन की चेतावनी जारी करेंगे। मिट्टी के खिसकने का क्रम शुरू होते ही एक मैसेज मोबाइल पर चला जाएगा और यदि खतरा ज्यादा बड़ा हुआ तो जोर का हूटर बजेगा। इसके अलावा अन्य जो संवेदनशील स्पॉट हैं वहां पर भी ऐसे ही सेंसर लगाए जाएंगे। इस सेंसर को आईआईटी मंडी के स्टूडेंट्स ने बनाया है और इसका प्रयोग काफी सफल रहा है। इसके साथ ही प्रशासन घटनास्थल के दोनों तरफ पुलिस चौकी और रेड लाइट भी लगाएगा ताकि लोग यहां से सावधानी से गुजरें। इसके साथ ही बरसात के समय में यहां बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को भी फिर से ऑन करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने घटनास्थल के पास वाले गांवों सराज, बागला, जगेहड़, बड़वाहन और पंदलाही के ग्रामीणों को एहतियात बरतने को कहा है। ग्रामीण किसी भी समय प्रशासन की मदद ले सकते हैं। इस दौरान एडीएम मंडी राजीव कुमार, आशीष शर्मा मौजूद रहे।
पानी की सही ढंग से करें निकासी
डीसी ने पाया कि यहां पानी की निकासी के लिए उचित प्रबंध नहीं है। इसलिए विभाग को निर्देश दिए कि यहां और पाइप डाले जाएं ताकि पानी सही ढंग से बाहर निकल सके। उन्होंने प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जाना। उन्होंने बताया कि इलाके में वन विभाग की जमीन के सिवा और कोई जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए सरकार को स्पेशल केस बनाकर भेजा गया है। उसकी मंजूरी मिलते ही प्रभावितों को जमीन आवंटित कर दी जाएगी।
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पानी की सही ढंग से करें निकासी
डीसी ने पाया कि यहां पानी की निकासी के लिए उचित प्रबंध नहीं है। इसलिए विभाग को निर्देश दिए कि यहां और पाइप डाले जाएं ताकि पानी सही ढंग से बाहर निकल सके। उन्होंने प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जाना। उन्होंने बताया कि इलाके में वन विभाग की जमीन के सिवा और कोई जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए सरकार को स्पेशल केस बनाकर भेजा गया है। उसकी मंजूरी मिलते ही प्रभावितों को जमीन आवंटित कर दी जाएगी।
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