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खेल विभाग की मनाही के बाद जोखिम भरे ट्रैक पर दौड़ा दिए दिव्यांग
Updated Fri, 30 Mar 2018 10:17 PM IST
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खेलो इंडिया खेलो योजना के तहत जिलास्तरीय विशेष एथलीट प्रतियोगिता में ऊबड़ खाबड़ और खतरनाक ट्रैक पर दौड़ते दिव्यांग।
- फोटो : अमर उजाला
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मंडी। खेलो इंडिया खेलो योजना के तहत जिला स्तरीय विशेष एथलीट प्रतियोगिताओं में दो सौ दिव्यांगों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया है। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के बाद ऊबड़-खाबड़ और जर्जर पड्डल मैदान में ही दिव्यांगों को दौड़ा दिया गया। जबकि, सुरक्षा की दृष्टि से खेल विभाग पड्डल मैदान में प्रतियोगिता के लिए मनाही कर दी गई थी लेकिन खेल विभाग के प्रतियोगिताएं न करवाने के तकनीकी मश्वरे को दरकिनार करते हुए आयोजनकर्ताओं ने किसी अनहोनी की जिम्मेदारी लिखित में लेते हुए प्रतियोगिता करवाने का जोखिम उठा लिया। गनीमत रही कि जर्जर मैदान में कोई खिलाड़ी चोटिल नहीं हुआ लेकिन खेलकूद के लिए खतरनाक और खराब हो चुके पड्डल मैदान में आनन-फानन में इस तरह के आयोजन को लेकर न केवल खेल विभाग बल्कि जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, संस्था का दावा है कि दौड़ आदि प्रतियोगिता करवाने से पहले संबंधित जगह की साफ-सफाई की गई है। शुक्रवार को दो दिवसीय इस खेलकूद प्रतियोगिता का समापन था। पहले दिन की प्रतियोगिता नागचला में हुई। प्रतियोगिता के समापन पर एडीसी मंडी राघव शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
पड्डल मैदान पर करोड़ों फूंक रहा प्रशासन
ऐतिहासिक पड्डल मैदान अपनी गरिमा को खो रहा है। किसी समय पड्डल खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त मैदान था तो वहीं सुबह-शाम सैर करने वालों के लिए बेहतर सैरगाह। लेकिन धीरे-धीरे इस ग्राउंड को व्यवसायिक गतिविधियों के लिए इसका प्रयोग किया जाने लगा और यह ग्राउंड मल्टीपर्पस ग्राउंड बन गया। राजनेता अपनी रैलियों के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे। मैदान का स्वरूप बिगड़ गया। विरोध शुरू हुआ तो सालाना लाखों रुपये मैदान के जीर्णोद्धार के लिए खर्चे जाने लगे। हाल में डेढ़ करोड़ इस मैदान के जीर्णोद्धार पर खर्चा किया गया लेकिन विरोध का नतीजा सिफर रहा।
कुछ इस तरह दी सफाई
जिला खेल अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि मैदान असुरक्षित है। यहां दिव्यांगों की खेलकूद प्रतियोगिताएं न करवाने की सलाह दी गई थी। तकनीकी रूप से मैदान अभी सही नहीं है। संबंधित संस्था ने अपने रिस्क पर प्रतियोगिता करवाने के लिए लिखित में दिया। संस्था ने रिस्क लिया कि यदि खेल के दौरान किसी प्रकार की कोई घटना होती है तो वह इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। उन्होंने अपनी ओर से प्रतियोगिता को करवाने की अनुमति नहीं दी है। सहयोग संस्था के सचिव डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि अपने रिस्क पर प्रतियोगिता करवाई है। सहयोगी स्पेशल स्कूल नागचला इकाई के इंचार्ज और स्पेशल ओलंपिक के जिला समन्वयक गीता पुरोहित ने बताया कि खेल विभाग को लिखित में दिया गया है कि यदि कुछ होता है को जिम्मेदारी संस्था लेगी।
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पड्डल मैदान पर करोड़ों फूंक रहा प्रशासन
ऐतिहासिक पड्डल मैदान अपनी गरिमा को खो रहा है। किसी समय पड्डल खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त मैदान था तो वहीं सुबह-शाम सैर करने वालों के लिए बेहतर सैरगाह। लेकिन धीरे-धीरे इस ग्राउंड को व्यवसायिक गतिविधियों के लिए इसका प्रयोग किया जाने लगा और यह ग्राउंड मल्टीपर्पस ग्राउंड बन गया। राजनेता अपनी रैलियों के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे। मैदान का स्वरूप बिगड़ गया। विरोध शुरू हुआ तो सालाना लाखों रुपये मैदान के जीर्णोद्धार के लिए खर्चे जाने लगे। हाल में डेढ़ करोड़ इस मैदान के जीर्णोद्धार पर खर्चा किया गया लेकिन विरोध का नतीजा सिफर रहा।
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कुछ इस तरह दी सफाई
जिला खेल अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि मैदान असुरक्षित है। यहां दिव्यांगों की खेलकूद प्रतियोगिताएं न करवाने की सलाह दी गई थी। तकनीकी रूप से मैदान अभी सही नहीं है। संबंधित संस्था ने अपने रिस्क पर प्रतियोगिता करवाने के लिए लिखित में दिया। संस्था ने रिस्क लिया कि यदि खेल के दौरान किसी प्रकार की कोई घटना होती है तो वह इसके लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। उन्होंने अपनी ओर से प्रतियोगिता को करवाने की अनुमति नहीं दी है। सहयोग संस्था के सचिव डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि अपने रिस्क पर प्रतियोगिता करवाई है। सहयोगी स्पेशल स्कूल नागचला इकाई के इंचार्ज और स्पेशल ओलंपिक के जिला समन्वयक गीता पुरोहित ने बताया कि खेल विभाग को लिखित में दिया गया है कि यदि कुछ होता है को जिम्मेदारी संस्था लेगी।
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