फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi News ›   दूषित हो रही जीवनदायनी ब्यास के लिए मांगा निर्मल पैकेज

दूषित हो रही जीवनदायनी ब्यास के लिए मांगा निर्मल पैकेज

Tue, 06 Jun 2017 11:00 PM IST
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:00 PM IST
विज्ञापन
दूषित हो रही जीवनदायनी ब्यास के लिए मांगा निर्मल पैकेज
मंडी। जीवनदायिनी ब्यास प्रदूषित हो रही है। करीब 80 किमी तक नदी में प्रदूषण की मात्रा दिनोंदिन बढ़ रही है। बायोलॉजीकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर 7 से 9 तक पहुंच चुका है। जो सामान्य से अधिक है। इन नदियों में बढ़ते प्रदूषण से जलीय जीव-जंतुओं और पौधों को हानि होने की संभावना है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नवंबर 2016 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में ब्यास सहित 8 नदियों सुकेती, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, बिनवा और मारकंडा को भी लिया गया है। इसी को आधार मानकर किसान बचाओ हिमाचल बचाओ अभियान के कार्यकर्ताओं ने इन नदियों को साफ-सुथरा बना पर्यावरण बचाने का संदेश देने का संकल्प लिया। अभियान संयोजक देशराज शर्मा, प्रवक्ता कैप्टन ओसी ठाकुर और जीवानंद सराजी ने जिलाधीश मंडी के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से गंगा और यमुना आदि नदियों को मिलने वाले प्रदूषण मुक्ती परियोजना पैकेज की तर्ज पर निर्मल पैकेज की मांग की है। वहीं इन नदियों को किनारों पर जागरूकता यात्रा भी चलाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन


कई क्षेत्रों में जलापूर्ति की गुणवत्ता पर खतरा
ज्ञापन में कहा गया है कि बोर्ड की रिपोर्ट में ब्यास नदी 80 किलोमीटर तक के क्षेत्र में दूषित पाई गई है। इन नदियों से कई क्षेत्रों की बस्तियों में बड़े पैमाने पर पेयजल आपूर्ति होती है। यह पानी भी दूषित पाया गया है। ऐसे में जलापूर्ति की गुणवत्ता पर भी खतरा मंडरा रहा है। राजधानी शिमला और सोलन में दूषित पानी से पीलिया फैल चुका है। लिहाजा यह एक गंभीर मामला है। लिहाजा पैकेज जरूरी है।
विज्ञापन


ब्यास यहां भी खतरे खतरे की जद में
बिजली परियोजनाओं, सीमेंट कारखानों, उद्योगों का प्रदूषित मलबा और कचरा बड़े पैमाने पर नदियों को प्रदूषित कर रहा है। वहीं, नगर परिषद क्षेत्रों की सीवरेज का पानी नदियों में गिर रहा है। इसलिए इन नदियों को बचाने के लिए त्वरित कदम उठाया जाना अति आवश्यक है। इन नदियों के संगम स्थलों व विशेष घाटों पर कई तीर्थ स्थल हैं। जहां प्राचीन घाटों पर विभिन्न समुदायों के लोग आरती, मुक्ति-भुक्ति आदि कर्मकांड करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुंदरनगर नप की डंपिंग साइट का दिया हवाला
यह भी दावा किया गया है कि प्रदूषण की मार सफाई कर्मियों पर भी पड़ रही है। मंडी जिले की सुंदरनगर नगर परिषद की डंपिंग साइट के ठोस कूड़ा-कचरा प्रबंधन का निस्तारण करने वाले 40 कर्मी चर्म रोग से पीड़ित पाए गए हैं। इन कर्मियों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल हैं। इस बात का खुलासा उपमंडलीय आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी सुंदरनगर द्वारा लगाए गए चिकित्सा जांच शिविर में हुआ है। यह भी एक गंभीर मामला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed