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बर्फबारी से नाचन और सराज के एक दर्जन मार्ग बंद
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मंडी। जिले में ताजा बर्फबारी से नाचन और सराज घाटी में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। दोनों क्षेत्रों में कई सड़कें आवाजाही के लिए बंद हो गई हैं। दुर्गम क्षेत्रों में बिजली और पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई है। पर्यटन स्थलों कमरूनाग, शिकारी देवी और पराशर में भी खूब बर्फबारी हुई है। शनिवार देर रात शुरू हुई ताजा बर्फबारी के चलते घाटी की शैटाधार, स्पैहनीधार, चुंजबाला धार, जोगिणी धार, देवकांड़ा की पहाड़ियों में एक फीट तक बर्फबारी हुई है। निचले क्षेत्रों में सोमगाड़, थाची, डीडर, थाटा, लोट, सुधराणी, गाड़ागुशैणी, घाट, खौली, थाचधार, कलहणी, करथाच में आधा फीट तक बर्फबारी हुई है। बर्फबारी से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। घाटी की बंजार-गाड़ागुशैणी, खौली-छतरी, थाची-डीडर, सुधराणी- थाटा, गाड़ागुशैणी-घाट, जंजैहली-मगरूगला, छतरी-करसोग, लंबाथाच-चियूणी, लंबाथाच-भाटकीधार, जंजैहली-रायगढ़ सड़कें आवाजाही के लिए बंद हो गई हैं। इसके साथ ही घाटी सराची और कल्हणी में दो सरकारी बसें फंसी हुई हैं।
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पेयजल पाइप में जम गया पानी
सराज घाटी में बुंग जहलगाड़, चलौट, गाड़ागुशैणी, घाट, टील आदि क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते पेयजल पाइप में पानी जम गया है। इसके कारण पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं थुनाग और आस पास के क्षेत्रों में 18 घंटे से बिजली गुल है। अधिक बर्फबारी के कारण बिजली बहाली का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। क्षेत्र के संतोष कुमार, पूर्ण चंद, नीतू परमार, कमल सिंह आदि लोगों का कहना है कि पाइप में पानी जम जाने से पेयजल सप्लाई बाधित हो गई है। बिजली के बार-बार आने जाने की दिक्कत आ रही है।
बालीचौकी के आईपीएच के सहायक अभियंता संजीव ठाकुर ने कहा कि बर्फबारी के चलते ज्यादा दिक्कत आई है। जल्द ही ग्रामीणों की समस्या का समाधान किया जाएगा। वहीं, सराज घाटी के विभिन्न चोटियों पर बर्फबारी होने के बाद पर्यटक बर्फबारी का लुप्त उठाने भी पहुंच रहे हैं।
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आपदा से निपटने को प्रशासन तैयार : सुरेंद्र
एसडीएम थुनाग सुरेंद्र मोहन ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। बर्फबारी के चलते कुछ मार्ग बंद हुए हैं और लोगों को बिजली की दिक्कते भी पेश आई हैं। लेकिन संबंधित विभागों को शीघ्र लोगों की समस्याओं का समाधान करने के आदेश दिए गए हैं।
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बारिश-बर्फबारी किसानों के लिए संजीवनी
बारिश-बर्फबारी ने ऊपरी क्षेत्रों में दुश्वारियां बढ़ा दी हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी के लिए कम नहीं है। निचले इलाकों में शनिवार देर रात हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। गेहूं की फसल जो कि सूखने की कगार पर थी, उसे इस बारिश से बहुत ही लाभ मिलेगा। इसके साथ ही बागबानों को भी बर्फबारी से लाभ होगा। सराज घाटी के रूप लाल, खेम राज, गिरजा ठाकुर, रेशम चंद, बालम चंद आदि लोगों का कहना है कि सेब के पौधे को 7 से लेकर 16 सौ घंटे तक चिलिंग आवर चाहिए। सेब के चिंलिग आवर के लिए यह बारिश काफी फायदेमंद है, वहीं गेहूं, मटर की फसल के लिए बारिश संजीवनी है।
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पेयजल पाइप में जम गया पानी
सराज घाटी में बुंग जहलगाड़, चलौट, गाड़ागुशैणी, घाट, टील आदि क्षेत्रों में बर्फबारी के चलते पेयजल पाइप में पानी जम गया है। इसके कारण पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं थुनाग और आस पास के क्षेत्रों में 18 घंटे से बिजली गुल है। अधिक बर्फबारी के कारण बिजली बहाली का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। क्षेत्र के संतोष कुमार, पूर्ण चंद, नीतू परमार, कमल सिंह आदि लोगों का कहना है कि पाइप में पानी जम जाने से पेयजल सप्लाई बाधित हो गई है। बिजली के बार-बार आने जाने की दिक्कत आ रही है।
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बालीचौकी के आईपीएच के सहायक अभियंता संजीव ठाकुर ने कहा कि बर्फबारी के चलते ज्यादा दिक्कत आई है। जल्द ही ग्रामीणों की समस्या का समाधान किया जाएगा। वहीं, सराज घाटी के विभिन्न चोटियों पर बर्फबारी होने के बाद पर्यटक बर्फबारी का लुप्त उठाने भी पहुंच रहे हैं।
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आपदा से निपटने को प्रशासन तैयार : सुरेंद्र
एसडीएम थुनाग सुरेंद्र मोहन ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। बर्फबारी के चलते कुछ मार्ग बंद हुए हैं और लोगों को बिजली की दिक्कते भी पेश आई हैं। लेकिन संबंधित विभागों को शीघ्र लोगों की समस्याओं का समाधान करने के आदेश दिए गए हैं।
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बारिश-बर्फबारी किसानों के लिए संजीवनी
बारिश-बर्फबारी ने ऊपरी क्षेत्रों में दुश्वारियां बढ़ा दी हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी के लिए कम नहीं है। निचले इलाकों में शनिवार देर रात हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। गेहूं की फसल जो कि सूखने की कगार पर थी, उसे इस बारिश से बहुत ही लाभ मिलेगा। इसके साथ ही बागबानों को भी बर्फबारी से लाभ होगा। सराज घाटी के रूप लाल, खेम राज, गिरजा ठाकुर, रेशम चंद, बालम चंद आदि लोगों का कहना है कि सेब के पौधे को 7 से लेकर 16 सौ घंटे तक चिलिंग आवर चाहिए। सेब के चिंलिग आवर के लिए यह बारिश काफी फायदेमंद है, वहीं गेहूं, मटर की फसल के लिए बारिश संजीवनी है।
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