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Mandi News: छेड़छाड़ के 10 साल बाद आरोपी दोषी करार, 15 माह का कारावास
Thu, 28 Aug 2025 08:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 28 Aug 2025 08:26 AM IST
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मंडी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-1 सुंदरनगर ने महिला से छेड़छाड़ के 10 साल पुराने मामले में नरैन सिंह निवासी सुंदरनगर को दोषी करार दिया है। अदालत ने आईपीसी की धारा 354 के तहत 15 महीने कैद, 500 रुपये जुर्माना और धारा 323 के तहत 6 महीने कैद व 500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। धारा 341 के तहत आरोपी को बरी कर दिया गया।
जुर्माना अदा न करने पर दोषी को 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। एक सितंबर 2015 को महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि घर के पीछे सफाई करते समय आरोपी ने धक्का-मुक्की कर कपड़े फाड़े और जांघ पर काटा। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच पूरी कर चालान अदालत में दायर किया। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। अदालत ने गवाहों के बयान और तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
सजा की मात्रा पर सुनवाई के दौरान दोषी के वकील ने तर्क दिया है कि दोषी व्यक्ति की उम्र 54 वर्ष और उसका कोई पूर्व दोषसिद्धि रिकॉर्ड नहीं है। वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। उस पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी है। दोषी की वृद्धावस्था को देखते हुए उसके प्रति नरम रुख अपनाया जाना चाहिए।
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इस पर अदालत ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। प्रतिष्ठा के भय से कई मामले दर्ज नहीं किए जाते। केवल सीमित संख्या में ही मामले दर्ज होते हैं और उनमें से भी सीमित मामलों में दोषसिद्धि होती है। इस प्रकार के अपराधों में इतनी वृद्धि के साथ, अपराध और दंड के बीच संतुलन का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दोषी को नहीं दिया गया।
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जुर्माना अदा न करने पर दोषी को 15-15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। एक सितंबर 2015 को महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि घर के पीछे सफाई करते समय आरोपी ने धक्का-मुक्की कर कपड़े फाड़े और जांघ पर काटा। महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच पूरी कर चालान अदालत में दायर किया। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। अदालत ने गवाहों के बयान और तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।
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सजा की मात्रा पर सुनवाई के दौरान दोषी के वकील ने तर्क दिया है कि दोषी व्यक्ति की उम्र 54 वर्ष और उसका कोई पूर्व दोषसिद्धि रिकॉर्ड नहीं है। वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। उस पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी है। दोषी की वृद्धावस्था को देखते हुए उसके प्रति नरम रुख अपनाया जाना चाहिए।
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इस पर अदालत ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। प्रतिष्ठा के भय से कई मामले दर्ज नहीं किए जाते। केवल सीमित संख्या में ही मामले दर्ज होते हैं और उनमें से भी सीमित मामलों में दोषसिद्धि होती है। इस प्रकार के अपराधों में इतनी वृद्धि के साथ, अपराध और दंड के बीच संतुलन का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दोषी को नहीं दिया गया।