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Mandi Cloud Burst: बेटी ने मलबे में दबने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, पिता ने तीन लोगों का किया रेस्क्यू

Thu, 10 Jul 2025 04:24 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 10 Jul 2025 04:24 PM IST
सार

Mandi Cloud Burst: जिला मंडी में आपदा की रात पिता और बेटी ने अदम्य साहस का परिचय दिया। भरत राज और उनकी बेटी तुनेजा ठाकुर ने हिम्मत तोड़ देने वाली परिस्थिति में भी दिल नहीं छोड़ा और... पढ़ें पूरी कहानी

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Mandi Cloud Burst Daughter did not lose courage after being buried under debris father rescued three people
डिजाइन फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में आपदा की रात 30 जून को कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया और दूसरे लोगों की भी जानें बचाई। सराज विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले शरण गांव के पिता और बेटी की है। भरत राज और उनकी बेटी तुनेजा ठाकुर ने इस आपदा में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।

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भरत राज और उनकी बेटी तुनेजा ठाकुर ने बताया कि 30 जून की रात को जब घर के पीछे वाली साइड से भारी मलबा आने लगा तो आस पास के घरों के करीब 20 लोग इनके घर पर आकर इकट्ठा हो गए, लेकिन जब मलबा और बढ़ गया और घर में पानी घुसने लगा तो सभी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे।
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तुनेजा को नहीं निकाल पाए पिता भरत राज
वहीं, तुनेजा ठाकुर और उसकी छोटी बहन टिंवकल, माता मंशा देवी, दादा हरि सिंह और एक अन्य महिला राधू देवी मलबे में फंस गए। भरत राज ने टविंकल, मंशा देवी, हरि सिंह और राधू देवी को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल दिया, लेकिन तुनेजा को नहीं निकाल सके। अपनी बेटी की चीखो पुकार सुनकर मन विचलित हो उठा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री ने दोनों की दी शाबाशी
तुनेजा ने बताया कि वो मलबे के साथ थोड़ी आगे तक बह गई और छाती तक डूब गई थी। एक लकड़ी के टुकड़े को पकड़कर खुद को बहने से बचाया। उसके बाद खुद को जैसे तैसे इससे बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान की तरफ भागी। सुबह जब परिवार के लोगों के साथ मिलना हुआ तो सभी की जान में जान आई। उसके बाद सभी बगस्याड़ स्कूल पहुंचे और अभी तक वहीं पर ही रह रहे हैं। सराज दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी दोनों को शाबाशी दी। अभी यह परिवार बगस्याड़ स्कूल के अस्थायी शिविर में रह रहा है। तुनेजा और भरत राज ने बताया कि आपदा ने उनका सबकुछ छीन लिया है। तुनेजा बीएसई की पढ़ाई कर रही है।

'पढ़ाई का खर्च उठाए सरकार'
तुनेजा ने सरकार से मांग उठाई है कि अब उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं बचा है और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में सरकार इनकी पढ़ाई के बारे में सोचे और उसका खर्च उठाए। वहीं, भरत राज ने सरकार से प्रभावितों के स्थायी पुर्नवास की तरफ प्रभावी कार्रवाई की गुहार लगाई है। बगस्याड़ क्षेत्र के तीन पटवार वृतों के तहत 27 घर, तीन दुकानें और 28 गौशालाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा 15 घर, 3 दुकानें और 2 गौशालाओं को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 
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