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महिलाओं और कन्याओं ने निकाली कलश यात्रा
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संवाद न्यूज एजेंसी
मनाली (कुल्लू)। ऊझी घाटी के गोशाल गांव में गो महायज्ञ का शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ विधिवत आगाज हो गया है। देवभूमि कुल्लू में पहली बार गो महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
ग्रामीण महिलाओं और कन्याओं ने ब्यास नदी से पवित्र जल लेकर कलश यात्रा में भाग लिया। देवता गौतम ऋषि, वेद ब्यास और कंचन नाग के मंदिर के प्रांगण में तैयार की गई यज्ञशाला में ऊझी घाटी के देवी-देवता विराजमान हो गए हैं। महायज्ञ में भाग लेने के लिए वीरवार को 17 देवी-देवता पहुंचे थे। विघ्नकर्ता एवं विघ्नहर्ता भगवान गणेश की अग्र पूजा के पश्चात महायज्ञ में हवन आदि की शुरूआत हो गई। चार जुलाई तक हवन करने के बाद पूर्णाहुति होगी, जबकि इसी दिन देवभोज का आयोजन किया जाएगा। महायज्ञ में रोज भागवत एवं गोकथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
पर्यटन नगरी मनाली के अंतर्गत ऊझी घाटी के गोशाल गांव का माहौल इन दिनों देवमय हो गया है। मंदिर परिसर मंत्रोच्चारण से गूंज उठा है। वीरवार को देव समागम के साथ ही महायज्ञ की शुरूआत हो गई थी। सात दिनों तक यज्ञशाला में 21 ब्राह्मण रोज जाप करेंगे। गौरतलब है कि इस महायज्ञ का आयोजन घाटी के नौ गांव कोठी, सोलंग, पलचान, रुआड, कुलंग, मछाच, बुरुआ, शनाग व गोशाल के ग्रामीण मिलकर कर रहे हैं। गोशाल के आराध्यदेवों व्यास ऋषि, गौतम ऋषि व कंचन नाग के प्रांगण में आयोजित हो रहे इस महायज्ञ में पराशर ऋषि कुलंग, वशिष्ठ ऋषि वशिष्ठ, मनु ऋषि व माता हिडिंबा मनाली गांव, सियाली महादेव सियाल, शंख नारायण नसोगी, गोहरी देवता पारशा, शांडिल्य ऋषि शालीन, सृष्टि नारायण अलेउ, शरवरी माता व थान देवता शूरू, फाहली नाग प्रीणी, तक्षक नाग भनारा, संध्या गायत्री जगतसुख, प्यूली नाग बटाहर, गणेश भगवान घुड़दौड़ व बशुकी नाग हलाण गोशाल गांव में पहुंच गए हैं। देवता के कारदार हरि सिंह एवं महायज्ञ आयोजन कमेटी के अध्यक्ष वेदराम ठाकुर ने बताया कि रोज हवन के पश्चात हर रोज 12:00 बजे से 3:00 बजे तक गोकथा एवं भागवत कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
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मनाली (कुल्लू)। ऊझी घाटी के गोशाल गांव में गो महायज्ञ का शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ विधिवत आगाज हो गया है। देवभूमि कुल्लू में पहली बार गो महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
ग्रामीण महिलाओं और कन्याओं ने ब्यास नदी से पवित्र जल लेकर कलश यात्रा में भाग लिया। देवता गौतम ऋषि, वेद ब्यास और कंचन नाग के मंदिर के प्रांगण में तैयार की गई यज्ञशाला में ऊझी घाटी के देवी-देवता विराजमान हो गए हैं। महायज्ञ में भाग लेने के लिए वीरवार को 17 देवी-देवता पहुंचे थे। विघ्नकर्ता एवं विघ्नहर्ता भगवान गणेश की अग्र पूजा के पश्चात महायज्ञ में हवन आदि की शुरूआत हो गई। चार जुलाई तक हवन करने के बाद पूर्णाहुति होगी, जबकि इसी दिन देवभोज का आयोजन किया जाएगा। महायज्ञ में रोज भागवत एवं गोकथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
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पर्यटन नगरी मनाली के अंतर्गत ऊझी घाटी के गोशाल गांव का माहौल इन दिनों देवमय हो गया है। मंदिर परिसर मंत्रोच्चारण से गूंज उठा है। वीरवार को देव समागम के साथ ही महायज्ञ की शुरूआत हो गई थी। सात दिनों तक यज्ञशाला में 21 ब्राह्मण रोज जाप करेंगे। गौरतलब है कि इस महायज्ञ का आयोजन घाटी के नौ गांव कोठी, सोलंग, पलचान, रुआड, कुलंग, मछाच, बुरुआ, शनाग व गोशाल के ग्रामीण मिलकर कर रहे हैं। गोशाल के आराध्यदेवों व्यास ऋषि, गौतम ऋषि व कंचन नाग के प्रांगण में आयोजित हो रहे इस महायज्ञ में पराशर ऋषि कुलंग, वशिष्ठ ऋषि वशिष्ठ, मनु ऋषि व माता हिडिंबा मनाली गांव, सियाली महादेव सियाल, शंख नारायण नसोगी, गोहरी देवता पारशा, शांडिल्य ऋषि शालीन, सृष्टि नारायण अलेउ, शरवरी माता व थान देवता शूरू, फाहली नाग प्रीणी, तक्षक नाग भनारा, संध्या गायत्री जगतसुख, प्यूली नाग बटाहर, गणेश भगवान घुड़दौड़ व बशुकी नाग हलाण गोशाल गांव में पहुंच गए हैं। देवता के कारदार हरि सिंह एवं महायज्ञ आयोजन कमेटी के अध्यक्ष वेदराम ठाकुर ने बताया कि रोज हवन के पश्चात हर रोज 12:00 बजे से 3:00 बजे तक गोकथा एवं भागवत कथा का भी आयोजन किया जा रहा है।
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