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अनूठी परंपरा : अंगारों पर नंगे पांव कूदे लोग
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बाखली में सदियाला की परंपरा के दौरान अंगारों पर कूदते हुए लो
कुल्लू। जिले में अनूठी देव परंपराएं हैं, जिनका निर्वहन सदियों से किया जा रहा है। ऐसी ही अनूठी परंपरा पाहनाला क्षेत्र के गांव बाखली में रविवार को निभाई गई। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अश्लील जुमले बोलते हुए लोग अंगारों पर कूद गए। नंगे पांव नाच कर अंगारों को बुझाया, लेकिन किसी को कोई चोट नहीं आई। यह नजारा देख लोग दंग रह गए। यहां स्थानीय देवता के सम्मान में सदियाला (स्थानीय उत्सव) मनाया गया। इस उत्सव में यह देव परंपरा निभाई गई।
शनिवार शाम को यहां पर जागरा (आग) जलाया गया। इसमें देव परंपरा का निर्वहन किया। रविवार सुबह करीब 5:00 बजे अश्लील जुमलों के साथ गांव के लोग नंगे पांव अंगारों पर नाचे। स्थानीय निवासी शेर सिंह ने कहा कि देवता की शक्ति का ही यह प्रमाण होता है कि जलते अंगारों पर कूदने के बावजूद किसी को चोट तक नहीं लगती है।
कहा कि सदियाला में आए हुए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इसके साथ ही मणिकर्ण घाटी के सौहच में सदियाला की परंपरा निभाई गई। गड़सा घाटी के कुछ गांवों में भी सदियाला मनाया गया। जिला मुख्यालय के साथ लगती महाराजा कोठी के पीज में सदियाला मनाया गया। मकर संक्रांति से चल रहे उत्सवों का भी समापन हो गया है।
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शनिवार शाम को यहां पर जागरा (आग) जलाया गया। इसमें देव परंपरा का निर्वहन किया। रविवार सुबह करीब 5:00 बजे अश्लील जुमलों के साथ गांव के लोग नंगे पांव अंगारों पर नाचे। स्थानीय निवासी शेर सिंह ने कहा कि देवता की शक्ति का ही यह प्रमाण होता है कि जलते अंगारों पर कूदने के बावजूद किसी को चोट तक नहीं लगती है।
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कहा कि सदियाला में आए हुए मेहमानों को पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इसके साथ ही मणिकर्ण घाटी के सौहच में सदियाला की परंपरा निभाई गई। गड़सा घाटी के कुछ गांवों में भी सदियाला मनाया गया। जिला मुख्यालय के साथ लगती महाराजा कोठी के पीज में सदियाला मनाया गया। मकर संक्रांति से चल रहे उत्सवों का भी समापन हो गया है।
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