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Kullu News: टनल से रिसाव ने उड़ाई रातों की नींद उड़ी, बहा दिया चैन
Thu, 24 Sep 2026 10:42 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 24 Sep 2026 10:42 AM IST
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सैंज के पालचरा गांव में टनल रिसाव के दौरान आए मलबे में यातायात वाधित हो गया है। मलबे के बीच से
सैंज (कुल्लू)। रैला क्षेत्र में एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण दो की टनल से लगातार पानी के रिसाव और भूस्खलन ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में तीन मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जबकि कई घरों में गहरी दरारें आने से उनके कभी भी जमींदोज होने का खतरा बना हुआ है। वर्ष 2025 में भी क्षेत्र में नुकसान हुआ था।
अब 19 सितंबर को पावर हाउस से सर्ज शाफ्ट, वाल्व हाउस और आसपास की बस्तियों तक नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। जीवा, खडोहा, शुलगा, रैला, रूमरा, कहुधार और करोट गांवों में खतरा बढ़ने से लोग डर के साए में रातें गुजार रहे हैं।
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स्थानीय निवासी हरि सिंह धामी, मोती राम, डेहरु राम, बुध राम, प्रवीण शर्मा, राजेंद्र शर्मा, राजेश वशिष्ठ, दीनानाथ और जयराम गंगा राम सहित परियोजना प्रभावितों ने टनल रिसाव और भूस्खलन से हुए नुकसान के लिए परियोजना प्रबंधन की कथित लापरवाही और तकनीकी खामियों को जिम्मेदार बताया है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने, परियोजना प्रबंधन की जवाबदेही तय करने और पावर हाउस के पीछे हो रहे भूस्खलन से प्रभावित गांवों का संयुक्त निरीक्षण करवाने की मांग की है।
सड़क बंद, बाजार तक पहुंचाना मुश्किल
परियोजना में रिसाव की घटना के बाद क्षेत्र की सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए भी बंद पड़ी है। इससे ग्रामीणों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। फल-सब्जी के साथ दूध और अन्य उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सड़क बहाल नहीं हुई तो उनकी रोजमर्रा की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
परियोजना से नुकसान का मूल्यांकन कर मिले मुआवजा
पार्वती परियोजना की टनल से हो रहे रिसाव के कारण 2025 से जीवा गांव में भारी नुकसान हुआ है। कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनका मूल्यांकन करवाकर उचित मुआवजे का प्रबंध किया जाना चाहिए। -राजेश शर्मा निवासी जीवा
दूसरा मकान भी हुआ क्षतिग्रस्त
वर्ष 2025 में रैला गांव में बनाया गया उनका मकान परियोजना की लापरवाही से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था। अब पालचरा स्थित दूसरा मकान भी टनल रिसाव के कारण तबाह हुआ है। उन्होंने सरकार, परियोजना प्रबंधन और प्रशासन से शीघ्र नुकसान का मूल्यांकन करवाकर राहत देने की मांग की। -डावे राम नेगी निवासी पालचरा
दरारें बढ़ीं, कृषि भूमि भी तबाह
गांव के घरों में दरारें आ चुकी हैं। वर्ष 2025 से ये दरारें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खतरा पैदा हो गया है। कृषि योग्य भूमि को भी नुकसान हुआ है। इसका मूल्यांकन करवाना जरूरी है। -इंद्र चंद निवासी शुलगा
कई साल से हो रहा रिसाव
पावर हाउस से लेकर सर्ज शाफ्ट तक कई साल से रिसाव हो रहा है। इससे आसपास के मकानों में दरारें आ गई हैं। नुकसान और खतरे को देखते हुए प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को मौके का निरीक्षण करवाकर मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। -जुगत राम धामी रैला निवासी
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ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में तीन मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जबकि कई घरों में गहरी दरारें आने से उनके कभी भी जमींदोज होने का खतरा बना हुआ है। वर्ष 2025 में भी क्षेत्र में नुकसान हुआ था।
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अब 19 सितंबर को पावर हाउस से सर्ज शाफ्ट, वाल्व हाउस और आसपास की बस्तियों तक नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। जीवा, खडोहा, शुलगा, रैला, रूमरा, कहुधार और करोट गांवों में खतरा बढ़ने से लोग डर के साए में रातें गुजार रहे हैं।
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स्थानीय निवासी हरि सिंह धामी, मोती राम, डेहरु राम, बुध राम, प्रवीण शर्मा, राजेंद्र शर्मा, राजेश वशिष्ठ, दीनानाथ और जयराम गंगा राम सहित परियोजना प्रभावितों ने टनल रिसाव और भूस्खलन से हुए नुकसान के लिए परियोजना प्रबंधन की कथित लापरवाही और तकनीकी खामियों को जिम्मेदार बताया है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने, परियोजना प्रबंधन की जवाबदेही तय करने और पावर हाउस के पीछे हो रहे भूस्खलन से प्रभावित गांवों का संयुक्त निरीक्षण करवाने की मांग की है।
सड़क बंद, बाजार तक पहुंचाना मुश्किल
परियोजना में रिसाव की घटना के बाद क्षेत्र की सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए भी बंद पड़ी है। इससे ग्रामीणों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। फल-सब्जी के साथ दूध और अन्य उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सड़क बहाल नहीं हुई तो उनकी रोजमर्रा की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
परियोजना से नुकसान का मूल्यांकन कर मिले मुआवजा
पार्वती परियोजना की टनल से हो रहे रिसाव के कारण 2025 से जीवा गांव में भारी नुकसान हुआ है। कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनका मूल्यांकन करवाकर उचित मुआवजे का प्रबंध किया जाना चाहिए। -राजेश शर्मा निवासी जीवा
दूसरा मकान भी हुआ क्षतिग्रस्त
वर्ष 2025 में रैला गांव में बनाया गया उनका मकान परियोजना की लापरवाही से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ था। अब पालचरा स्थित दूसरा मकान भी टनल रिसाव के कारण तबाह हुआ है। उन्होंने सरकार, परियोजना प्रबंधन और प्रशासन से शीघ्र नुकसान का मूल्यांकन करवाकर राहत देने की मांग की। -डावे राम नेगी निवासी पालचरा
दरारें बढ़ीं, कृषि भूमि भी तबाह
गांव के घरों में दरारें आ चुकी हैं। वर्ष 2025 से ये दरारें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे खतरा पैदा हो गया है। कृषि योग्य भूमि को भी नुकसान हुआ है। इसका मूल्यांकन करवाना जरूरी है। -इंद्र चंद निवासी शुलगा
कई साल से हो रहा रिसाव
पावर हाउस से लेकर सर्ज शाफ्ट तक कई साल से रिसाव हो रहा है। इससे आसपास के मकानों में दरारें आ गई हैं। नुकसान और खतरे को देखते हुए प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को मौके का निरीक्षण करवाकर मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए। -जुगत राम धामी रैला निवासी