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Kullu News: परंपरा... देव विधि से सचेत हो उठा मूर्छित नड़
Sun, 10 Aug 2025 10:35 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 10 Aug 2025 10:35 PM IST
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गड़सा घाटी के हवाई गांव में देवता जमलू ऋषि के सम्मान में मनाया काहिका उत्सव
अद्भुत नजारा देखने के लिए उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु, ग्रामीणों ने नाटी भी डाली
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। गड़सा घाटी के हवाई गांव में देवता जमलू ऋषि के सम्मान में आयोजित काहिका उत्सव में रविवार को परंपरागत नड़ को मूर्छित कर सचेत करने की अनूठी देव विधि निभाई गई।
इस दैवीय आयोजन को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़े। लोकसंगीत, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नाटी की थाप पर ग्रामीण संस्कृति की झलक ने उत्सव को यादगार बना दिया। उत्सव के दौरान देवता से जुड़े लोगों ने पहले नड़ को मूर्छित करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके उसके बाद उसे देव विधि के अनुसार ही सचेत किया गया।
इस प्रक्रिया को देखकर यहां मौजूद लोग अचंभित रह गए। इस दौरान मौजूद लोगों ने देवता जमलू के सामने माथा टेका और उनसे आशीर्वाद लिया। ग्रामीण और दूर-दूर से आए श्रद्धालु भी नाटी पर झूम उठे। पारंपारिक लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर महिला और पुरुषों ने नाटी डाली। इससे उत्सव के दौरान ठेठ ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने को मिली।
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गौरतलब है कि शुक्रवार से गड़सा घाटी के हवाई गांव में देवता जमलू के सम्मान काहिका उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को नड़ नृत्य देखने को मिला था और रविवार को नड़ को मूर्छित करने की परंपरा देखने को मिली। कुल्लू घाटी में अलग-अलग घाटियों में काहिका उत्सव मनाने की परंपरा है। हवाई गांव में भी देव आदेश पर काहिका उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव के चलते हवाई में दिनभर चहल-पहल रही।
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अद्भुत नजारा देखने के लिए उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु, ग्रामीणों ने नाटी भी डाली
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। गड़सा घाटी के हवाई गांव में देवता जमलू ऋषि के सम्मान में आयोजित काहिका उत्सव में रविवार को परंपरागत नड़ को मूर्छित कर सचेत करने की अनूठी देव विधि निभाई गई।
इस दैवीय आयोजन को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु उमड़े। लोकसंगीत, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नाटी की थाप पर ग्रामीण संस्कृति की झलक ने उत्सव को यादगार बना दिया। उत्सव के दौरान देवता से जुड़े लोगों ने पहले नड़ को मूर्छित करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके उसके बाद उसे देव विधि के अनुसार ही सचेत किया गया।
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इस प्रक्रिया को देखकर यहां मौजूद लोग अचंभित रह गए। इस दौरान मौजूद लोगों ने देवता जमलू के सामने माथा टेका और उनसे आशीर्वाद लिया। ग्रामीण और दूर-दूर से आए श्रद्धालु भी नाटी पर झूम उठे। पारंपारिक लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप पर महिला और पुरुषों ने नाटी डाली। इससे उत्सव के दौरान ठेठ ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने को मिली।
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गौरतलब है कि शुक्रवार से गड़सा घाटी के हवाई गांव में देवता जमलू के सम्मान काहिका उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को नड़ नृत्य देखने को मिला था और रविवार को नड़ को मूर्छित करने की परंपरा देखने को मिली। कुल्लू घाटी में अलग-अलग घाटियों में काहिका उत्सव मनाने की परंपरा है। हवाई गांव में भी देव आदेश पर काहिका उत्सव का आयोजन किया गया। उत्सव के चलते हवाई में दिनभर चहल-पहल रही।