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Kullu News: बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में निभाई परंपरा
Thu, 04 Sep 2025 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 04 Sep 2025 10:58 PM IST
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रास्ते बंद होने से बारिश के बीच नहीं पहुंच सके श्रद्धालु
मौसम को देखते हुए घरों में रहने की गई थी अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बारिश के बीच वीरवार को बीस भादो पर कुल्लू जिले के तीर्थ स्थलों महज परंपरा का निर्वहन किया गया। बीस भादो के मौके पर धार्मिक नगरी मणिकर्ण, क्लाथ, वशिष्ठ में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
जिया संगम में भी परंपरा का निर्वहन किया गया। पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते कई सड़कें और रास्ते बंद हैं। श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ स्थान पर पहुंचना मुश्किल था।
भुंतर-मणिकर्ण सड़क भूस्खलन के चलते बंद है। सबसे अधिक भीड़ बीस भादो पर मणिकर्ण में होती थी। यहां गर्म पानी के कुंड में सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते थे। इस बार तीर्थ स्थान में सिर्फ परंपरा का ही निर्वहन हुआ। खीरगंगा, जैसे पहाड़ों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में झीलों तक बारिश के चलते श्रद्धालु नहीं जा सके। हालांकि मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं से भी अपने घरों में ही सुरक्षित रहने की अपील की गई थी। दूसरी ओर, बीस भादो पर गड़सा घाटी में शौठ निहारगडू पर भी देव परंपरा निभाई गई। यहां झरने में सैकड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते थे। यहां पिछले तीन वर्षों से कोई पुल नहीं है। स्थानीय लोगों ने मिलकर एक लकड़ी का पुल बनाया था। जून में हुई बारिश से पुल बह गया है। मणिकर्ण में पवित्र स्नान करने आए स्थानीय श्रद्धालु मानचंद और गेहर सिंह ने कहा कि बीस भादो पर मणिकर्ण में दिखने वाली चहल-पहल इस बार गायब रही। मौसम के चलते श्रद्धालु तीर्थ स्थलों में नहीं पहुंच सके। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में परंपरा का निर्वहन हुआ है।
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मौसम को देखते हुए घरों में रहने की गई थी अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बारिश के बीच वीरवार को बीस भादो पर कुल्लू जिले के तीर्थ स्थलों महज परंपरा का निर्वहन किया गया। बीस भादो के मौके पर धार्मिक नगरी मणिकर्ण, क्लाथ, वशिष्ठ में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
जिया संगम में भी परंपरा का निर्वहन किया गया। पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते कई सड़कें और रास्ते बंद हैं। श्रद्धालुओं के लिए तीर्थ स्थान पर पहुंचना मुश्किल था।
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भुंतर-मणिकर्ण सड़क भूस्खलन के चलते बंद है। सबसे अधिक भीड़ बीस भादो पर मणिकर्ण में होती थी। यहां गर्म पानी के कुंड में सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते थे। इस बार तीर्थ स्थान में सिर्फ परंपरा का ही निर्वहन हुआ। खीरगंगा, जैसे पहाड़ों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में झीलों तक बारिश के चलते श्रद्धालु नहीं जा सके। हालांकि मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं से भी अपने घरों में ही सुरक्षित रहने की अपील की गई थी। दूसरी ओर, बीस भादो पर गड़सा घाटी में शौठ निहारगडू पर भी देव परंपरा निभाई गई। यहां झरने में सैकड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते थे। यहां पिछले तीन वर्षों से कोई पुल नहीं है। स्थानीय लोगों ने मिलकर एक लकड़ी का पुल बनाया था। जून में हुई बारिश से पुल बह गया है। मणिकर्ण में पवित्र स्नान करने आए स्थानीय श्रद्धालु मानचंद और गेहर सिंह ने कहा कि बीस भादो पर मणिकर्ण में दिखने वाली चहल-पहल इस बार गायब रही। मौसम के चलते श्रद्धालु तीर्थ स्थलों में नहीं पहुंच सके। जिला देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने कहा कि बीस भादो पर तीर्थ स्थलों में परंपरा का निर्वहन हुआ है।
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