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धारा गांव को बचाने की संभावनाएं तलाशने 20 दिन बाद पहुंची भू-वैज्ञानिकों की टीम
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कुल्लू जिला के धारा गांव में हो रहे भूस्खलन को लेकर पहुंची भू-वैज्ञानिकों की टीम।-संवाद
- फोटो : Kullu
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी के धारा गांव को बचाने की संभावनाएं और भूस्खलन के कारणों की जांच के लिए भू-वैज्ञानिकों की टीम गांव पहुंची। भूस्खलन के 20 दिन बाद प्रशासन और भू-विभाग जागा।
बुधवार दोपहर के आसपास टीम गांव पहुंची। टीम ने जमीन में पड़ रही दरारों का बारीकी से अध्ययन किया। स्थानीय प्रशासन के साथ शिमला से आए भू-वैज्ञानिक और कुल्लू के जिला खनन अधिकारी ने धंस रहे घरों को देखा और ग्रामीणों से बात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। ग्रामीणों ने उजड़ चुके घरों को दिखाते हुए कहा कि पहले सब कुछ सामान्य था। लेकिन 19 अगस्त के बाद गांव की लगभग 50 बीघा जमीन धंसनी शुरू हो गई। यह क्रम लगातार चलता रहा।
पहले खेतों में छोटी दरारें थीं बाद में यह पांच फीट तक बढ़ गईं। भूस्खलन ने पुश्तैनी घरों के साथ नए घर और सेब के बगीचे तबाह कर दिए। टीम ने धराशायी पौधों और मकानों का निरीक्षण कर इन्हें बचाने की संभावनाओं पर अध्ययन करने का भरोसा दिया है।
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ग्रामीण किशोरी लाल, तारा देवी, अजवीर सिंह और वीर सिंह ने कहा कि गांव में बने कुछ मकान कई दशक पुराने थे। यहां कभी खतरे जैसी को संभावना नहीं दिखती थी। इस बार भारी बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया। भू-वैज्ञानिकों की टीम ने पूरे घटानाक्रम के दस्तावेज तैयार किए और भूस्खलन की गति रिकार्ड करने के लिए यंत्र स्थापित किए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जमीन को धंसने से बचाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
बता दें कि धारा गांव में तीन सप्ताह से हो रहे भूस्खलन से 13 परिवार प्रभावित हुए हैं। कई लोगों के खेत, बगीचे और घरों को नुकसान पहुंचा है। तहसीलदार सैंज हीरा चंद नलवा ने बताया कि गांव को धंसने से बचाने के लिए प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है। बताया कि भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी। इस मौके पर सैंज के तहसीलदार हीरा चंद नलवा, पंचायत की प्रधान सीतावती और गांव के प्रभावित लोग उपस्थित रहे।
ग्रामीण घरों से दूर रहें
जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। तब तक ग्रामीणों को क्षतिग्रस्त हुए मकानों से दूरी बनाए रखनी होगी।
सुरेश कुमार, जिला खनन अधिकारी
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बुधवार दोपहर के आसपास टीम गांव पहुंची। टीम ने जमीन में पड़ रही दरारों का बारीकी से अध्ययन किया। स्थानीय प्रशासन के साथ शिमला से आए भू-वैज्ञानिक और कुल्लू के जिला खनन अधिकारी ने धंस रहे घरों को देखा और ग्रामीणों से बात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली। ग्रामीणों ने उजड़ चुके घरों को दिखाते हुए कहा कि पहले सब कुछ सामान्य था। लेकिन 19 अगस्त के बाद गांव की लगभग 50 बीघा जमीन धंसनी शुरू हो गई। यह क्रम लगातार चलता रहा।
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पहले खेतों में छोटी दरारें थीं बाद में यह पांच फीट तक बढ़ गईं। भूस्खलन ने पुश्तैनी घरों के साथ नए घर और सेब के बगीचे तबाह कर दिए। टीम ने धराशायी पौधों और मकानों का निरीक्षण कर इन्हें बचाने की संभावनाओं पर अध्ययन करने का भरोसा दिया है।
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ग्रामीण किशोरी लाल, तारा देवी, अजवीर सिंह और वीर सिंह ने कहा कि गांव में बने कुछ मकान कई दशक पुराने थे। यहां कभी खतरे जैसी को संभावना नहीं दिखती थी। इस बार भारी बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया। भू-वैज्ञानिकों की टीम ने पूरे घटानाक्रम के दस्तावेज तैयार किए और भूस्खलन की गति रिकार्ड करने के लिए यंत्र स्थापित किए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जमीन को धंसने से बचाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
बता दें कि धारा गांव में तीन सप्ताह से हो रहे भूस्खलन से 13 परिवार प्रभावित हुए हैं। कई लोगों के खेत, बगीचे और घरों को नुकसान पहुंचा है। तहसीलदार सैंज हीरा चंद नलवा ने बताया कि गांव को धंसने से बचाने के लिए प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है। बताया कि भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई होगी। इस मौके पर सैंज के तहसीलदार हीरा चंद नलवा, पंचायत की प्रधान सीतावती और गांव के प्रभावित लोग उपस्थित रहे।
ग्रामीण घरों से दूर रहें
जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। तब तक ग्रामीणों को क्षतिग्रस्त हुए मकानों से दूरी बनाए रखनी होगी।
सुरेश कुमार, जिला खनन अधिकारी