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Kullu News: मनमोहक झांकी से संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
Sun, 04 May 2025 10:15 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 04 May 2025 10:15 PM IST
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सैंज मेलें के दुसरे दिन निकली महिला मंडल की झांकिया।-संवाद
महिलाओं और विद्यार्थियों ने निभाई अहम भूमिका
नालागढ़ बाजार से बस अड्डा तक निकाली झांकी
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज/न्यूली (कुल्लू)। जिला स्तरीय सैंज मेले के दूसरे दिन महिलाओं और विद्यार्थियों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। मेले में घाटी के 26 महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाओं और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सैंज और दो निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने झांकी में अहम भूमिका निभाई। नालागढ़ बाजार से बस अड्डा सैंज तक झांकी निकाली गई।
इसमें महिलाओं और विद्यार्थियों ने शिक्षा, नशा, स्वच्छता, एकता, मतदान, पर्यावरण के अलावा विकट परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना करने का संदेश दिया। सैंज मेले में हर वर्ष झांकियां निकाली जाती हैं। इस बार झांकी लुप्त होती पुरातन कुल्लू की समृद्ध संस्कृति पर आधारित रही। इसमें महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक परिधानों और वस्तुओं को दर्शाते हुए झांकियां निकालीं। बता दें कि साल 2023 के जुलाई माह की आपदा से सैंज घाटी में भारी नुकसान हुआ था। सैंज बाजार सहित आसपास के कई गांव बाढ़ में बह गए थे। मेला मैदान के एक छोर पर बना कलाकेंद्र भी बाढ़ की भेंट चढ़ा। आपदा से मिले जख्मों से उभरते हुए इस बार मेले के मूल स्वरूप में कोई कमी नहीं दिखी। भव्य देव मिलन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले की तरह चल रहे हैं।
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नालागढ़ बाजार से बस अड्डा तक निकाली झांकी
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज/न्यूली (कुल्लू)। जिला स्तरीय सैंज मेले के दूसरे दिन महिलाओं और विद्यार्थियों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। मेले में घाटी के 26 महिला मंडलों की सैकड़ों महिलाओं और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सैंज और दो निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने झांकी में अहम भूमिका निभाई। नालागढ़ बाजार से बस अड्डा सैंज तक झांकी निकाली गई।
इसमें महिलाओं और विद्यार्थियों ने शिक्षा, नशा, स्वच्छता, एकता, मतदान, पर्यावरण के अलावा विकट परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना करने का संदेश दिया। सैंज मेले में हर वर्ष झांकियां निकाली जाती हैं। इस बार झांकी लुप्त होती पुरातन कुल्लू की समृद्ध संस्कृति पर आधारित रही। इसमें महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक परिधानों और वस्तुओं को दर्शाते हुए झांकियां निकालीं। बता दें कि साल 2023 के जुलाई माह की आपदा से सैंज घाटी में भारी नुकसान हुआ था। सैंज बाजार सहित आसपास के कई गांव बाढ़ में बह गए थे। मेला मैदान के एक छोर पर बना कलाकेंद्र भी बाढ़ की भेंट चढ़ा। आपदा से मिले जख्मों से उभरते हुए इस बार मेले के मूल स्वरूप में कोई कमी नहीं दिखी। भव्य देव मिलन के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले की तरह चल रहे हैं।
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