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Kullu News: आधुनिकता से जंग लड़ रहा है परंपरागत वस्तुओं का बाजार

Wed, 15 Oct 2025 05:30 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Wed, 15 Oct 2025 05:30 PM IST
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The market for traditional goods is fighting a battle with modernity.
राकेश
कारोबार---
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दशहरा उत्सव में आपदा के कारण भी पड़ी इस बार मंदी की मार
कृषि से लेकर रसोई तक की हाथ से बनी वस्तुओं की मांग घटी
गौरीशंकर
कुल्लू। आधुनिकता की चकाचौंध में परंपरागत वस्तुओं का बाजार सिमटता जा रहा है। कुल्लू दशहरा उत्सव में कृषि से लेकर रसोई घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को बेचने वालों की संख्या काफी अधिक होती थी लेकिन इस बार इनकी संख्या काफी घट गई है। उन्हें भी मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। एक दशक से हाथों के बनाई लकड़ी और लोहे से बनी वस्तुओं की डिमांड कम हुई है।
हालांकि मेले में इन वस्तुओं की दुकानें जरूर दिखाई देती है लेकिन अब उतनी खरीदारी नहीं होती जो एक दशक पहले तक हुआ करती थी। कुल्लू दशहरा उत्सव में कृषि और रसोई आदि का सामान लेकर दुकानें लगाकर बैठे लोगों का कहना है कि इस बार खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। हालांकि इस बार आपदा के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में सेब और अन्य फसलें नहीं बिक पाई हैं जिस कारण इन वस्तुओं की खरीदारी में इस बार कमी देखने को मिल रही है। आमतौर पर भी इन वस्तुओं की खरीदारी दिनोंदिन कम होती जा रही है। जितनी तेजी से बाजार में नई-नई मशीनें आ रही हैं वैसे-वैसे हाथों से बनी वस्तुओं की मांग कम होती जा रही है।
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ये सामान सजा है परंपरागत बाजार में
कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान सजे परंपरागत वस्तुओं के बाजार में कुल्हाडी, दराट, किलनी, टोकरी, किल्टा, छननी, शूप सहित हाथों से बनी अन्य कृषि और घरेलु उपयोग की वस्तुएं बेचने के लिए सजा रखी हैं। लेकिन इसके लिए ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं। परंपरागत वस्तुओं का कारोबार करने वाले लोगों की मानें तो इस बार कुछ ज्यादा ही कमी आई है।
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बाक्स,
इस बार आपदा के चलते कम खरीदारी हो रही है। इसका सीधा असर परंपरागत वस्तुओं के कारोबार पर पड़ रहा है। इस कार्य को करते हुए 53 साल हो चुके हैं लेकिन साल दर साल इन वस्तुओं की मांग कम होती जा रही है। -हरफू राम, दोहरानाला
बाक्स,
यह कारोबार लगातार सिमटता जा रहा है, वे इस क्षेत्र में 40 सालों से काम कर रहे हैं। लेकिन जो कारोबार दस साल पहले हुआ करता था उसमें और आज के कारोबार में काफी ज्यादा अंतर आया है। -राकेश, कुल्लू

बाक्स,
काफी समय से यह कारोबार घाटे का सौदा बन गया है। हालांकि पहले कृषि कार्य काफी अधिक होता था इस कारण काफी उपकरण बिकते थे लेकिन अब कृषि ने बागवानी का रूप ले लिया है इस कारण उपकरण उपयोग कम हो गया है। इससे परंपरागत वस्तुओं के बाजार पर असर पड़ा है। -भिखू राम दोहरानाला

राकेश

राकेश

राकेश

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