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Kullu News: निजी भूमि पर शंकु प्रजाति के पेड़ों के कटान की अनुमति दे सरकार
Fri, 14 Nov 2025 05:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 14 Nov 2025 05:44 AM IST
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हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ ने उठाई मांग
कहा, कटान से सरकार के राजस्व में भी होगी बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ के नवनियुक्त अध्यक्ष अनिल सूद ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने बीते साल दिसंबर माह से निजी भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि सरकार ने खैर को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है और उनकी कटाई को 10 वर्षीय फेलिंग कार्यक्रम के तहत नियंत्रित किया जा रहा है। लेकिन अन्य शंकु प्रजातियों के पेड़ जैसे देवदार, चील, कैल और फर आदि के संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ सरकार से मांग की है कि इस पर लगाई गई रोक को हटाई जाए।
अनिल सूद ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में इन प्रजातियों की कटाई निजी भूमि पर अधिकतम 33 प्रतिशत है और यह कार्य राज्य वन विकास निगम के माध्यम से किया जाता है। अनिल सूद ने कहा कि वृक्ष मालिकों, किसानों को इन वृक्षों के विक्रय पर वन निगम की ओर से करोड़ों का भुगतान किया जाता है। इस कार्य से चरान और ढुलाई मजदूरों, ट्रकों और ट्रेक्टर मालिकों को वन निगम के सेल डिपुओं तक माल पहुंचाने से रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे निगम, केंद्र, राज्य सरकार को भी शुल्क मिलता है। लेकिन अब इन वृक्षों की कटाई पर रोक है जिस कारण इससे सरकार और निगम को भी नुकसान हो रहा है। जबकि किसान वर्षों से अपनी वृक्षों की मार्किंग एवं कटाई की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिससे उन्हें आय का साधन मिल सके।
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कहा, कटान से सरकार के राजस्व में भी होगी बढ़ोतरी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ के नवनियुक्त अध्यक्ष अनिल सूद ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने बीते साल दिसंबर माह से निजी भूमि पर हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि सरकार ने खैर को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है और उनकी कटाई को 10 वर्षीय फेलिंग कार्यक्रम के तहत नियंत्रित किया जा रहा है। लेकिन अन्य शंकु प्रजातियों के पेड़ जैसे देवदार, चील, कैल और फर आदि के संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम श्रमिक आपूर्ति मेट संघ सरकार से मांग की है कि इस पर लगाई गई रोक को हटाई जाए।
अनिल सूद ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में इन प्रजातियों की कटाई निजी भूमि पर अधिकतम 33 प्रतिशत है और यह कार्य राज्य वन विकास निगम के माध्यम से किया जाता है। अनिल सूद ने कहा कि वृक्ष मालिकों, किसानों को इन वृक्षों के विक्रय पर वन निगम की ओर से करोड़ों का भुगतान किया जाता है। इस कार्य से चरान और ढुलाई मजदूरों, ट्रकों और ट्रेक्टर मालिकों को वन निगम के सेल डिपुओं तक माल पहुंचाने से रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि इससे निगम, केंद्र, राज्य सरकार को भी शुल्क मिलता है। लेकिन अब इन वृक्षों की कटाई पर रोक है जिस कारण इससे सरकार और निगम को भी नुकसान हो रहा है। जबकि किसान वर्षों से अपनी वृक्षों की मार्किंग एवं कटाई की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिससे उन्हें आय का साधन मिल सके।
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