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मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शीश नवाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू/खराहल। अधिष्ठात्री जगन्नाथी भुवनेश्वरी देवी के सम्मान में आयोजित पुईद मेले में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं और हारियानों ने माता के दरबार में शीश नवाया और आशीर्वाद लिया।
देवलुओं और कारकूनों ने पुईद में सूर्य अस्त होने के बाद माता का रथ ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की मधुर ध्वनि के बीच मंदिर से बाहर निकाला। इसके बाद माता ने देव परंपरा के साथ मंदिर की परिक्रमा शुरू की। मंदिर के चारों ओर परिक्रमा का दौर संध्याकाल तक चलता रहा। माता ने सौह में नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच देव नृत्य भी किया। गूर ने भी माता के साथ देव नृत्य किया। कोरोना काल के दो साल बाद मेले को बडे़ उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पुईद पंचायत के पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा ने कहा कि माता के दरबार में सुबह से ही श्रद्धालु और भक्तों की भीड़ उमड़ी है। माता के दर्शन के लिए खराहल घाटी के अलावा कुल्लू जिले के दूरदराज से भी लोग पहुंचे। देवलू अशोक ठाकुर, युवराज ठाकुर, जयदेव शर्मा, गोकुल शर्मा, सुनू राम ठाकुर, मास्टर चंदेराम ने कहा कि माता का रथ सूर्य अस्त होने के बाद ही निकला जाता है। यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। उधर, जगन्नाथी के कारदार चमन ठाकुर ने कहा कि माता मेले में चार दिनों से देव परंपरा का निर्वहन बखूबी से कर रही हैं। माता ने बुधवार को देव नृत्य और मंदिर की परिक्रमा देव विधिविधान से की।
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कुल्लू/खराहल। अधिष्ठात्री जगन्नाथी भुवनेश्वरी देवी के सम्मान में आयोजित पुईद मेले में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ा। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं और हारियानों ने माता के दरबार में शीश नवाया और आशीर्वाद लिया।
देवलुओं और कारकूनों ने पुईद में सूर्य अस्त होने के बाद माता का रथ ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की मधुर ध्वनि के बीच मंदिर से बाहर निकाला। इसके बाद माता ने देव परंपरा के साथ मंदिर की परिक्रमा शुरू की। मंदिर के चारों ओर परिक्रमा का दौर संध्याकाल तक चलता रहा। माता ने सौह में नरसिंगों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच देव नृत्य भी किया। गूर ने भी माता के साथ देव नृत्य किया। कोरोना काल के दो साल बाद मेले को बडे़ उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। पुईद पंचायत के पूर्व प्रधान उत्तम शर्मा ने कहा कि माता के दरबार में सुबह से ही श्रद्धालु और भक्तों की भीड़ उमड़ी है। माता के दर्शन के लिए खराहल घाटी के अलावा कुल्लू जिले के दूरदराज से भी लोग पहुंचे। देवलू अशोक ठाकुर, युवराज ठाकुर, जयदेव शर्मा, गोकुल शर्मा, सुनू राम ठाकुर, मास्टर चंदेराम ने कहा कि माता का रथ सूर्य अस्त होने के बाद ही निकला जाता है। यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। उधर, जगन्नाथी के कारदार चमन ठाकुर ने कहा कि माता मेले में चार दिनों से देव परंपरा का निर्वहन बखूबी से कर रही हैं। माता ने बुधवार को देव नृत्य और मंदिर की परिक्रमा देव विधिविधान से की।
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