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Kullu News: बर्फ के फाहे गिरते देख किसान-बागवानों के खिले चेहरे
Fri, 23 Jan 2026 10:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 23 Jan 2026 10:47 PM IST
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समूची घाटी में बर्फबारी से किसानों की उम्मीदे जगी
संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल लाहौल घाटी में बसंत की पहली सुबह आसमान से बर्फ के फाहे गिरते देख किसान-बागवानों के चेहरे खिल उठे।
लंबे अंतराल के बाद बर्फबारी की मुराद पूरी होते देख किसानों को आगामी फसल सीजन के लिए सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीदें जग गई है। यहां कृषि एवं बागवानी शरद ऋतु में पड़ने वाली बर्फबारी पर ही अधिक निर्भर रहती है। इस बार फिर से बर्फबारी का इंतजार किसानों-बागवानों में लंबा खिंच गया था। इस शरद ऋतु में लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार सुबह बर्फ के फाहे गिरते देख किसानों-बागवानों ने राहत की सांस ली है। घाटी के करीब 4500 किसानों-बागवानों के परिवार कृषि एवं बागवानी पर निर्भर हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि घाटी में दिसंबर, जनवरी या इससे पहले पड़ने वाली बर्फ घाटी के किसान-बागवानों के साथ वन संपदा को किसी संजीवनी से कम नहीं होती।
कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के प्रभारी वैज्ञानिक डाॅ. सुभाष कुमार ने कहा कि लाहौल घाटी के किसानों एवं बागवानों की खेती एवं बागवानी के लिए सर्दी के मौसम का यह बर्फ किसी संजीवनी से कम नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। शीत मरुस्थल लाहौल घाटी में बसंत की पहली सुबह आसमान से बर्फ के फाहे गिरते देख किसान-बागवानों के चेहरे खिल उठे।
लंबे अंतराल के बाद बर्फबारी की मुराद पूरी होते देख किसानों को आगामी फसल सीजन के लिए सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीदें जग गई है। यहां कृषि एवं बागवानी शरद ऋतु में पड़ने वाली बर्फबारी पर ही अधिक निर्भर रहती है। इस बार फिर से बर्फबारी का इंतजार किसानों-बागवानों में लंबा खिंच गया था। इस शरद ऋतु में लंबे इंतजार के बाद शुक्रवार सुबह बर्फ के फाहे गिरते देख किसानों-बागवानों ने राहत की सांस ली है। घाटी के करीब 4500 किसानों-बागवानों के परिवार कृषि एवं बागवानी पर निर्भर हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि घाटी में दिसंबर, जनवरी या इससे पहले पड़ने वाली बर्फ घाटी के किसान-बागवानों के साथ वन संपदा को किसी संजीवनी से कम नहीं होती।
कृषि विज्ञान केंद्र कुकुमसेरी के प्रभारी वैज्ञानिक डाॅ. सुभाष कुमार ने कहा कि लाहौल घाटी के किसानों एवं बागवानों की खेती एवं बागवानी के लिए सर्दी के मौसम का यह बर्फ किसी संजीवनी से कम नहीं है।
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