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Kullu News: अंग्रेजों ने भी माना था देव लक्ष्मी नारायण का लोहा
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बंजार/कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की शोभा बढ़ा रहे कलवारी के देव लक्ष्मी नारायण का लोहा अंग्रेज भी मानते थे। दशकों पूर्व प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति बनी थी। देवता के कारदार हरमेश लाल शर्मा और भंडारी मोहर सिंह ठाकुर ने कहा कि उस वक्त देवता ने लोगों को सूखे से छुटकारा दिलाया था।
कहा कि दशकों पहले कुल्लू सहित हिमाचल में भयानक सूखा पड़ा। अंग्रेज बंजार घाटी के कलवारी में देवता लक्ष्मी नारायण के दरबार में पहुंचे और देवता से बारिश करने की गुहार लगाई। देवता ने उस समय अंग्रेजों को भी सूखे से मुक्ति दिलाई थी। अंग्रेज भी देवता लक्ष्मी नारायण का लोहा मानते थे।
दशहरा उत्सव में ग्राम पंचायत कलवारी के आराध्य देवता लक्ष्मी नारायण अस्थायी शिविर में विराजमान हैं। देवता के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। देव कारकूनों के अनुसार देवता लक्ष्मी नारायण के रथ में दाईं ओर जमदग्नि ऋषि की छड़ी और बाईं ओर शेषनाग की छड़ी हमेशा विराजमान रहती है। कहा कि देवता कुल्लू दशहरा में आए हुए हैं। देवता का कलवारी के भूआरा नामक स्थान पर मंदिर है। उन्होंने कहा कि शनिवार को दशहरा की परंपरा का निर्वहन करने के बाद देवता अपने देवालय की ओर रवाना हो जाएंगे। संवाद
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कहा कि दशकों पहले कुल्लू सहित हिमाचल में भयानक सूखा पड़ा। अंग्रेज बंजार घाटी के कलवारी में देवता लक्ष्मी नारायण के दरबार में पहुंचे और देवता से बारिश करने की गुहार लगाई। देवता ने उस समय अंग्रेजों को भी सूखे से मुक्ति दिलाई थी। अंग्रेज भी देवता लक्ष्मी नारायण का लोहा मानते थे।
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दशहरा उत्सव में ग्राम पंचायत कलवारी के आराध्य देवता लक्ष्मी नारायण अस्थायी शिविर में विराजमान हैं। देवता के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। देव कारकूनों के अनुसार देवता लक्ष्मी नारायण के रथ में दाईं ओर जमदग्नि ऋषि की छड़ी और बाईं ओर शेषनाग की छड़ी हमेशा विराजमान रहती है। कहा कि देवता कुल्लू दशहरा में आए हुए हैं। देवता का कलवारी के भूआरा नामक स्थान पर मंदिर है। उन्होंने कहा कि शनिवार को दशहरा की परंपरा का निर्वहन करने के बाद देवता अपने देवालय की ओर रवाना हो जाएंगे। संवाद
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