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Kullu News: पढ़ाई बनी पहाड़, जोखिम से कम नहीं स्कूल जाना
Sun, 24 Aug 2025 10:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 24 Aug 2025 10:37 PM IST
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जिले के कई क्षेत्रों में आफत बना मौसम, कहीं सड़कें-पुल बहे तो कहीं टूट गए रास्ते
पढ़ाई के लिए मजबूरी में पीठ पर उठाकर बच्चों को स्कूल तक ला रहे अभिभावक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में आफत बनी बारिश अब बच्चों की शिक्षा तक पहुंच गई है। टूटी सड़कों, बह चुके पुलों और मिटे हुए रास्तों के बीच नौनिहालों की पढ़ाई थम सी गई है।
कई दुर्गम गांवों में अभिभावकों को खुद बच्चों को कंधों पर उठाकर स्कूल पहुंचाना पड़ रहा है जबकि कुछ क्षेत्रों में जोखिम इतना अधिक है कि स्कूल तक जाना ही मुमकिन नहीं। कुल्लू और बंजार उपमंडल में बादल फटने और भारी बारिश के कारण सड़कें, रास्ते, पैदल पुलिया और वाहन योग्य पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को विद्यालयों तक पहुंचाना आफत बना हुआ है। इससे अभिभावकों ही दिक्कतें भी बढ़ी है।
गौर रहे कि गत 25 जून को उपमंडल बंजार के सैंज के जीवानाला और 19 अगस्त को उपमंडल कुल्लू की लगघाटी की पंचायत चौपाड़सा में बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। इससे पिछले डेढ़ माह से जनजीवन अस्त-व्यस्त चल रहा है। बादल फटने से आम लोगों के साथ विद्यार्थियों की दिक्कतें अधिक बढ़ गई हैं। सैंज घाटी की बात करें तो दुर्गम क्षेत्र शाक्टी, मरौड़, शुगाड़ के नौनिहालों को विद्यालयों तक पहुंचना किसी परेशानी से कम नहीं हैं। बादल फटने से हुई तबाही के बाद बिहाली गांव के दोटे-छोटे विद्यार्थियों को अभिभावकों को स्वयं विद्यालय पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसा ही हाल लगघाटी की ग्राम पंचायत चौपाड़सा के विद्यार्थियों का है। पंचायत में तीन प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन रास्ते, पुलिया न होने की वजह से नौनिहालों का इन विद्यालयों तक पहुंच पाना किसी आफत से कम नहीं हैं। अभिभावकों को अपनी और बच्चों की जान-जोखिम में डाल विद्यालयों तक पहुंचना पड़ रहा है।
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प्रभावित क्षेत्रों के शिक्षकों से रिपोर्ट मांगी है। अगर स्थिति नाजुक है तो उपमंडल अधिकारी से आग्रह कर अवकाश की अनुमति ली जाएगी। विद्यार्थियों की जिंदगी के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। - डॉ. सुनील दत्त, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक
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पढ़ाई के लिए मजबूरी में पीठ पर उठाकर बच्चों को स्कूल तक ला रहे अभिभावक
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में आफत बनी बारिश अब बच्चों की शिक्षा तक पहुंच गई है। टूटी सड़कों, बह चुके पुलों और मिटे हुए रास्तों के बीच नौनिहालों की पढ़ाई थम सी गई है।
कई दुर्गम गांवों में अभिभावकों को खुद बच्चों को कंधों पर उठाकर स्कूल पहुंचाना पड़ रहा है जबकि कुछ क्षेत्रों में जोखिम इतना अधिक है कि स्कूल तक जाना ही मुमकिन नहीं। कुल्लू और बंजार उपमंडल में बादल फटने और भारी बारिश के कारण सड़कें, रास्ते, पैदल पुलिया और वाहन योग्य पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को विद्यालयों तक पहुंचाना आफत बना हुआ है। इससे अभिभावकों ही दिक्कतें भी बढ़ी है।
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गौर रहे कि गत 25 जून को उपमंडल बंजार के सैंज के जीवानाला और 19 अगस्त को उपमंडल कुल्लू की लगघाटी की पंचायत चौपाड़सा में बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। इससे पिछले डेढ़ माह से जनजीवन अस्त-व्यस्त चल रहा है। बादल फटने से आम लोगों के साथ विद्यार्थियों की दिक्कतें अधिक बढ़ गई हैं। सैंज घाटी की बात करें तो दुर्गम क्षेत्र शाक्टी, मरौड़, शुगाड़ के नौनिहालों को विद्यालयों तक पहुंचना किसी परेशानी से कम नहीं हैं। बादल फटने से हुई तबाही के बाद बिहाली गांव के दोटे-छोटे विद्यार्थियों को अभिभावकों को स्वयं विद्यालय पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसा ही हाल लगघाटी की ग्राम पंचायत चौपाड़सा के विद्यार्थियों का है। पंचायत में तीन प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन रास्ते, पुलिया न होने की वजह से नौनिहालों का इन विद्यालयों तक पहुंच पाना किसी आफत से कम नहीं हैं। अभिभावकों को अपनी और बच्चों की जान-जोखिम में डाल विद्यालयों तक पहुंचना पड़ रहा है।
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प्रभावित क्षेत्रों के शिक्षकों से रिपोर्ट मांगी है। अगर स्थिति नाजुक है तो उपमंडल अधिकारी से आग्रह कर अवकाश की अनुमति ली जाएगी। विद्यार्थियों की जिंदगी के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। - डॉ. सुनील दत्त, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक