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Kullu News: कागजों में बढ़ा दर्जा... सुविधाएं नहीं, सैंज सीएचसी में चार बजे लटक जाता है ताला
Fri, 17 Jan 2025 11:03 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 17 Jan 2025 11:03 PM IST
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रात्रिकालीन सेवाएं भी ठप, 50 बिस्तर की सुविधा भी, लेकिन भर्ती नहीं होता कोई मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न होने से मरीजों को लगानी पड़ रही कुल्लू की दौड़
हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। पीएचसी सैंज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा तो मिला है, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ पाई हैं। इसका दर्जा अब तक सिर्फ कागजों में ही बढ़ा है।
इस स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी का दर्जा मिले नौ साल हो चुके हैं। इसके भवन का निर्माण भी किया गया है, लेकिन डॉक्टर न मिलने से मरीजों को 60 किलोमीटर दूर कुल्लू की दौड़ लगानी पड़ रही है। सीएचसी सैंज में वर्तमान में दो डॉक्टर हैं। यहां एक साल से रात्रि आपातकालीन सेवाएं भी बंद हैं। अब शाम चार बजे के बाद ताला लटका दिया जाता है। सहारा नामक संस्था ने यहां अपने खर्च पर दो नर्सें नियुक्त की थीं, जिन्हें अब हटा दिया गया है। ऑन काल सेवा भी बंद है।
कहने को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 50 बिस्तरों की सुविधा है, लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। रात्रि सेवा भी बंद है। इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत सैंज घाटी की 20 पंचायतों की करीब 25 हजार आबादी आती है। सुविधाएं न मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। यहां एक दिन में औसतन एक सौ मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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स्थानीय निवासी लाल चंद, दुनी चंद, श्याम लाल, भाग चंद, शेर सिंह, लोतराम, राज कुमार, तिलक राज, मीने राम, रोशन लाल, फते चंद, नीलम कुमार, किशोरी लाल और तापे राम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से कई बार डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन इस पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज को अपग्रेड तो किया गया है, लेकिन अभी तक डॉक्टर नहीं भेजे गए हैं। स्टाफ की कमी से यहां सुचारू रूप से सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही हैं। - नारायण चौहान, सैंज
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है। ऑक्सीजन सिलिंडर, एक्स-रे की सुविधा है, लेकिन कर्मचारी न होने से लोगों को बाहर जांच करानी पड़ रही है। - मनोज राणा, सैंज
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था नही है। इमरजेंसी और ओपीडी की सुविधा उपलब्ध न होने से जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - मोहर सिंह, धाउगी
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ये पद हैं खाली
चिकित्सक के 5 में से तीन पद खाली हैं। यहां दो विशेषज्ञ चिकित्सक और एक दंत चिकित्सक तैनात हैं। फार्मासिस्ट के 2, स्टाफ नर्स के तीन, अधीक्षक, एक्स-रे टेक्निशियन, स्वच्छता निरीक्षक, वार्डन, ड्रेसर और चौकीदार का एक-एक पद खाली हैं।
-- सैंज पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी बना दिया गया है। सीएचसी के लिए वांछित पद स्वीकृत नहीं हुए हैं। विभाग की ओर से सेवाएं देने के लिए समय समय पर स्टाफ भेजा जा रहा है। - डाॅ. नागराज पवार, सीएमओ
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ये पंचायतें है निर्भर
सैंज अस्पताल से देहुरीधार, शैंशर, गाड़ापारली, शांघड़, सुचैहण, बनोगी, दुशाहड़, धाउगी, कनौन, लारजी, कोटला, चकुरठा, थाटीबीड़, गोपालपुर, भलाहण, तलाड़ा, देवगढ़ गोही, रैला-एक और रैला-दो पंचायतों के लोग निर्भर हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर न होने से मरीजों को लगानी पड़ रही कुल्लू की दौड़
हरिराम चौधरी
सैंज (कुल्लू)। पीएचसी सैंज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा तो मिला है, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ पाई हैं। इसका दर्जा अब तक सिर्फ कागजों में ही बढ़ा है।
इस स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी का दर्जा मिले नौ साल हो चुके हैं। इसके भवन का निर्माण भी किया गया है, लेकिन डॉक्टर न मिलने से मरीजों को 60 किलोमीटर दूर कुल्लू की दौड़ लगानी पड़ रही है। सीएचसी सैंज में वर्तमान में दो डॉक्टर हैं। यहां एक साल से रात्रि आपातकालीन सेवाएं भी बंद हैं। अब शाम चार बजे के बाद ताला लटका दिया जाता है। सहारा नामक संस्था ने यहां अपने खर्च पर दो नर्सें नियुक्त की थीं, जिन्हें अब हटा दिया गया है। ऑन काल सेवा भी बंद है।
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कहने को तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 50 बिस्तरों की सुविधा है, लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। रात्रि सेवा भी बंद है। इस स्वास्थ्य केंद्र के तहत सैंज घाटी की 20 पंचायतों की करीब 25 हजार आबादी आती है। सुविधाएं न मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। यहां एक दिन में औसतन एक सौ मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
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स्थानीय निवासी लाल चंद, दुनी चंद, श्याम लाल, भाग चंद, शेर सिंह, लोतराम, राज कुमार, तिलक राज, मीने राम, रोशन लाल, फते चंद, नीलम कुमार, किशोरी लाल और तापे राम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से कई बार डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन इस पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज को अपग्रेड तो किया गया है, लेकिन अभी तक डॉक्टर नहीं भेजे गए हैं। स्टाफ की कमी से यहां सुचारू रूप से सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही हैं। - नारायण चौहान, सैंज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था है। ऑक्सीजन सिलिंडर, एक्स-रे की सुविधा है, लेकिन कर्मचारी न होने से लोगों को बाहर जांच करानी पड़ रही है। - मनोज राणा, सैंज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज में ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था नही है। इमरजेंसी और ओपीडी की सुविधा उपलब्ध न होने से जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। - मोहर सिंह, धाउगी
ये पद हैं खाली
चिकित्सक के 5 में से तीन पद खाली हैं। यहां दो विशेषज्ञ चिकित्सक और एक दंत चिकित्सक तैनात हैं। फार्मासिस्ट के 2, स्टाफ नर्स के तीन, अधीक्षक, एक्स-रे टेक्निशियन, स्वच्छता निरीक्षक, वार्डन, ड्रेसर और चौकीदार का एक-एक पद खाली हैं।
ये पंचायतें है निर्भर
सैंज अस्पताल से देहुरीधार, शैंशर, गाड़ापारली, शांघड़, सुचैहण, बनोगी, दुशाहड़, धाउगी, कनौन, लारजी, कोटला, चकुरठा, थाटीबीड़, गोपालपुर, भलाहण, तलाड़ा, देवगढ़ गोही, रैला-एक और रैला-दो पंचायतों के लोग निर्भर हैं।