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Kullu News: मरौड़ और शुगाड़ के बच्चों की शिक्षा में रोड़ा बना शाक्टी नाला
Fri, 22 Aug 2025 05:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 22 Aug 2025 05:58 AM IST
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न्यूली/सैंज (कुल्लू)। दुर्गम गांव मरौड़ और शुगाड़ के बच्चों की आंखों में स्कूल जाने की चमक फीकी पड़ रही है। टूटा हुआ रास्ता और नाले पर बना पुल बह जाने से अब मासूम किताबें कापियां थामे चौखट पर ही रुक जाते हैं।
माता-पिता भी बेबस हैं। उनका दिल चाहता है कि बच्चे पढ़ लिखकर आगे बढ़ें मगर टूटा पुल उनके सपनों और शिक्षा के बीच खाई बन रहा है। पिछले दिनों शाक्टी नाले में आई बाढ़ में शाक्टी को एक तरफ शुगाड़ और दूसरी तरफ मरौड़ को जोड़ने वाले पैदल पुल बह गए हैं। उसके बाद से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मरौड़ को जोड़ने वाली पुलिया तीन बार बह चुकी है। पहली बार प्रशासन द्वारा बनाई गई पुलिया ध्वस्त हो गई। उसके बाद दो बार ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पुलिया बनाई लेकिन दोनों बार ही जलस्तर बढ़ जाने से बह गई। अब आलम यह है कि नाले को आर-पार करने के लिए कोई विकल्प ही नहीं है। इस कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
क्षेत्र में नेटवर्क की भी दिक्कत
ग्रामीण प्रकाश चंद, हीरा चंद, गोपाल, जीतू, डोला, राज पाल का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर पुलिया तैयार की लेकिन वह भी नाले में बह गई। अब बच्चों को शाक्टी स्थित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय तक जाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है जबकि क्षेत्र में नेटवर्क की भी दिक्कत है जिस कारण ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं लग सकती हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
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शुगाड़ में भी आने जाने का कोई साधन नहीं
इसके साथ ही शुगाड़ की स्थिति भी यही बनी हुई है। इस गांव को जोड़ने वाली पुलिया भी बह गई है और अब आने जाने का कोई साधन नहीं है। ऐसे में खासकर स्कूली बच्चों को ज्यादा दिक्कत आ रही है। आम जनजीवन तो पहले ही प्रभावित है। लोगों को रोजमर्रा का सामान लाने में भी परेशानी हो रही है। उधर, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा डॉ. सुनील दत्त का कहना है कि इस संदर्भ में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत कर हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।
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माता-पिता भी बेबस हैं। उनका दिल चाहता है कि बच्चे पढ़ लिखकर आगे बढ़ें मगर टूटा पुल उनके सपनों और शिक्षा के बीच खाई बन रहा है। पिछले दिनों शाक्टी नाले में आई बाढ़ में शाक्टी को एक तरफ शुगाड़ और दूसरी तरफ मरौड़ को जोड़ने वाले पैदल पुल बह गए हैं। उसके बाद से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि मरौड़ को जोड़ने वाली पुलिया तीन बार बह चुकी है। पहली बार प्रशासन द्वारा बनाई गई पुलिया ध्वस्त हो गई। उसके बाद दो बार ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पुलिया बनाई लेकिन दोनों बार ही जलस्तर बढ़ जाने से बह गई। अब आलम यह है कि नाले को आर-पार करने के लिए कोई विकल्प ही नहीं है। इस कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
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क्षेत्र में नेटवर्क की भी दिक्कत
ग्रामीण प्रकाश चंद, हीरा चंद, गोपाल, जीतू, डोला, राज पाल का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर पुलिया तैयार की लेकिन वह भी नाले में बह गई। अब बच्चों को शाक्टी स्थित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय तक जाने के लिए कोई विकल्प नहीं बचा है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है जबकि क्षेत्र में नेटवर्क की भी दिक्कत है जिस कारण ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं लग सकती हैं। ऐसे में बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।
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शुगाड़ में भी आने जाने का कोई साधन नहीं
इसके साथ ही शुगाड़ की स्थिति भी यही बनी हुई है। इस गांव को जोड़ने वाली पुलिया भी बह गई है और अब आने जाने का कोई साधन नहीं है। ऐसे में खासकर स्कूली बच्चों को ज्यादा दिक्कत आ रही है। आम जनजीवन तो पहले ही प्रभावित है। लोगों को रोजमर्रा का सामान लाने में भी परेशानी हो रही है। उधर, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा डॉ. सुनील दत्त का कहना है कि इस संदर्भ में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत कर हल निकालने का प्रयास किया जाएगा।