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Kullu News: उम्मीद की पहली सीढ़ी बन भुजुंड पहुंचीं एसडीएम
Sat, 18 Oct 2025 10:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sat, 18 Oct 2025 10:09 PM IST
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लाहौल के भुजुंड में ग्रामीणों के साथ एसडीएम अलीशा चौहान।-संवाद
78 साल से मूलभूत सुविधाओं की राह देख रहा 90 की आबादी और 70 वोटों वाला गांव
गांव तक पहुंचने वाली पहली प्रशासनिक अधिकारी अधिकारी बनीं अलीशा चौहान
ग्रामीणों की समस्या सुन पीडब्ल्यूडी को एक हफ्ते में सड़क का काम शुरू करने के निर्देश
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। देश आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है लेकिन प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति का भुजुंड गांव अब भी सड़क सुविधा से वंचित है।
करीब 90 की आबादी और 70 वोटरों वाला यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। न सड़क, न स्वास्थ्य केंद्र है। यहां तक कि जो प्राथमिक स्कूल कभी बच्चों की शिक्षा का केंद्र था, वह भी विद्यार्थियों की कमी के चलते सरकार ने बंद कर दिया है। अलीशा चौहान गांव तक पहुंचने वाली पहली प्रशासनिक अधिकारी बनी हैं। एसडीएम का यह पैदल दौरा उम्मीद है कि इस बार बदलाव की पहली सीढ़ी साबित होगा। एसडीएम अपने पूरे प्रशासनिक अमले के साथ करीब डेढ़ घंटे की कठिन चढ़ाई पार कर पहली बार गांव तक पहुंचीं। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद उन्होंने मौके पर ही लोक निर्माण विभाग को एक सप्ताह के भीतर सड़क का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुजुंड गांव की समस्याओं को जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा। ग्रामीण रवि ठाकुर ने बताया कि एसडीएम के दौरे से गांव में उम्मीद की किरण जगी है। अब उन्हें विश्वास है कि सड़क का सपना साकार होगा। ग्रामीण नंदलाल, देवी सिंह और प्यार सिंह का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क के टेंडर कई बार आमंत्रित किए लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। इस बीच गांव के लोग तार स्पेन के जरिए राशन और कृषि उत्पाद मुख्य सड़क तक पहुंचाने को मजबूर हैं।
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सर्दियों में दुनिया से कट जाता है पूरा गांव
सर्दियों में जब बर्फबारी होती है तो यह गांव दुनिया से कट जाता है। स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण ग्रामीणों को मामूली बीमारी तक के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। भुजुंड के लोग वर्षों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन और सरकार अब उनके गांव की सच्चाई को समझेंगे और उन्हें भी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा
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गांव तक पहुंचने वाली पहली प्रशासनिक अधिकारी अधिकारी बनीं अलीशा चौहान
ग्रामीणों की समस्या सुन पीडब्ल्यूडी को एक हफ्ते में सड़क का काम शुरू करने के निर्देश
अशोक राणा
केलांग (लाहौल-स्पीति)। देश आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है लेकिन प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति का भुजुंड गांव अब भी सड़क सुविधा से वंचित है।
करीब 90 की आबादी और 70 वोटरों वाला यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। न सड़क, न स्वास्थ्य केंद्र है। यहां तक कि जो प्राथमिक स्कूल कभी बच्चों की शिक्षा का केंद्र था, वह भी विद्यार्थियों की कमी के चलते सरकार ने बंद कर दिया है। अलीशा चौहान गांव तक पहुंचने वाली पहली प्रशासनिक अधिकारी बनी हैं। एसडीएम का यह पैदल दौरा उम्मीद है कि इस बार बदलाव की पहली सीढ़ी साबित होगा। एसडीएम अपने पूरे प्रशासनिक अमले के साथ करीब डेढ़ घंटे की कठिन चढ़ाई पार कर पहली बार गांव तक पहुंचीं। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद उन्होंने मौके पर ही लोक निर्माण विभाग को एक सप्ताह के भीतर सड़क का निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुजुंड गांव की समस्याओं को जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा। ग्रामीण रवि ठाकुर ने बताया कि एसडीएम के दौरे से गांव में उम्मीद की किरण जगी है। अब उन्हें विश्वास है कि सड़क का सपना साकार होगा। ग्रामीण नंदलाल, देवी सिंह और प्यार सिंह का कहना है कि लोक निर्माण विभाग ने सड़क के टेंडर कई बार आमंत्रित किए लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। इस बीच गांव के लोग तार स्पेन के जरिए राशन और कृषि उत्पाद मुख्य सड़क तक पहुंचाने को मजबूर हैं।
सर्दियों में दुनिया से कट जाता है पूरा गांव
सर्दियों में जब बर्फबारी होती है तो यह गांव दुनिया से कट जाता है। स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण ग्रामीणों को मामूली बीमारी तक के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। भुजुंड के लोग वर्षों से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन और सरकार अब उनके गांव की सच्चाई को समझेंगे और उन्हें भी मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा
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