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Kullu News: फाइलों में स्कूल... टिन के शेड में भविष्य गढ़ रहे बच्चे
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बंजार के नाही स्कूल का टीन की चादरों के द्वारा ग्रामीणो के श्रमदान करने बनाया गया भवन।-संवाद
कुल्लू। बंजार उपमंडल की पेखड़ी पंचायत में राजकीय माध्यमिक विद्यालय नाही का ढाई मंजिला काष्ठकुणी भवन दिखने में सुंदर है लेकिन पूरी तरह से असुरक्षित है। 2025 की आपदा में पत्थर गिरने से भवन को नुकसान पहुंचा है। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की जिंदगी दांव पर लगाकर इसी असुरक्षित भवन में तीन महीने तक पढ़ाई करवाई।
इसके बाद बच्चे बरामदे में पढ़ने को मजबूर हुए। अभिभावकों और ग्राम पंचायत के शिक्षा विभाग और सरकार के समक्ष भवन बनाने का आग्रह किया लेकिन कुछ नहीं हो पाया। नेताओं के दरवाजे भी खटखटाए लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ। बच्चों के भविष्य की चिंता में डूबे अभिभावकों ने फिर चंदा एकत्रित कर और श्रमदान से टिन के चार कमरे (शेड) तैयार किए। फाइलों में स्कूल जरूर है लेकिन बच्चे टिन के शेड में ही अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।
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चार महीने पहले बनाए कमरे
विद्यालय में 24 बच्चे अध्ययरत हैं। अभिभावकों ने अप्रैल मई में चार अस्थायी कमरे तैयार किए। इसके लिए किसी ने टिन की चादर दी तो किसी ने पत्थर। कोई कील लेकर आया और श्रमदान किया। समाजसेवी लोभू राम का कहना है कि जब सरकारी बजट, विभाग और पूरी व्यवस्था मौजूद है, उसके बावजूद ग्रामीणों को अगर अपने पैसे और श्रम से दीवारें खड़ी करनी पड़ेे तो यह सिस्टम की नाकामी है।
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विभाग ने दबा दी फाइल
पंचायत उपप्रधान नील चंद का कहना है कि पुराने भवन को गिराने और नया भवन बनाने को लेकर पंचायत और स्कूल की ओर से दस्तावेज विभाग को दिए हैं जिसके चलते अब विभाग के पास फाइल जमा है। अभिभावकों का कहना है कि पुराने भवन से होकर बच्चों का आना जाना है, जिसके चलते यहां हादसा होने का डर बना हुआ है।
....2014 में बना था भवन
पेखड़ी पंचायत के नाही में 2006 में प्राथमिक स्कूल का दर्जा माध्यमिक स्तर का कर दिया। 2014 में स्कूल के लिए अढ़ाई मंजिला काष्ठकुणी शैली का भवन बना। यह भवन 2025 में असुरक्षित हो गया। बच्चे तीन महीने तक असुरक्षित भवन में पढ़े। इसके बाद बरादमे में पढ़ाई करवाई गई।
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नाही स्कूल का जल्द ही दौरा किया जाएगा। वास्तुस्थिति देखकर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जबकि भवन निर्माण और उसे गिराने को लेकर विभागीय प्रक्रिया जारी है।
-रमेश चंद, बीईईओ, बंजार
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इसके बाद बच्चे बरामदे में पढ़ने को मजबूर हुए। अभिभावकों और ग्राम पंचायत के शिक्षा विभाग और सरकार के समक्ष भवन बनाने का आग्रह किया लेकिन कुछ नहीं हो पाया। नेताओं के दरवाजे भी खटखटाए लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ। बच्चों के भविष्य की चिंता में डूबे अभिभावकों ने फिर चंदा एकत्रित कर और श्रमदान से टिन के चार कमरे (शेड) तैयार किए। फाइलों में स्कूल जरूर है लेकिन बच्चे टिन के शेड में ही अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।
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चार महीने पहले बनाए कमरे
विद्यालय में 24 बच्चे अध्ययरत हैं। अभिभावकों ने अप्रैल मई में चार अस्थायी कमरे तैयार किए। इसके लिए किसी ने टिन की चादर दी तो किसी ने पत्थर। कोई कील लेकर आया और श्रमदान किया। समाजसेवी लोभू राम का कहना है कि जब सरकारी बजट, विभाग और पूरी व्यवस्था मौजूद है, उसके बावजूद ग्रामीणों को अगर अपने पैसे और श्रम से दीवारें खड़ी करनी पड़ेे तो यह सिस्टम की नाकामी है।
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विभाग ने दबा दी फाइल
पंचायत उपप्रधान नील चंद का कहना है कि पुराने भवन को गिराने और नया भवन बनाने को लेकर पंचायत और स्कूल की ओर से दस्तावेज विभाग को दिए हैं जिसके चलते अब विभाग के पास फाइल जमा है। अभिभावकों का कहना है कि पुराने भवन से होकर बच्चों का आना जाना है, जिसके चलते यहां हादसा होने का डर बना हुआ है।
....2014 में बना था भवन
पेखड़ी पंचायत के नाही में 2006 में प्राथमिक स्कूल का दर्जा माध्यमिक स्तर का कर दिया। 2014 में स्कूल के लिए अढ़ाई मंजिला काष्ठकुणी शैली का भवन बना। यह भवन 2025 में असुरक्षित हो गया। बच्चे तीन महीने तक असुरक्षित भवन में पढ़े। इसके बाद बरादमे में पढ़ाई करवाई गई।
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नाही स्कूल का जल्द ही दौरा किया जाएगा। वास्तुस्थिति देखकर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जबकि भवन निर्माण और उसे गिराने को लेकर विभागीय प्रक्रिया जारी है।
-रमेश चंद, बीईईओ, बंजार
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बंजार के नाही स्कूल का टीन की चादरों के द्वारा ग्रामीणो के श्रमदान करने बनाया गया भवन।-संवाद