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Kullu News: सर्दियों के लिए चारा इकट्ठा करने में जुटीं ग्रामीण महिलाएं
Sun, 19 Oct 2025 10:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 19 Oct 2025 10:11 PM IST
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जिले में सेब सीजन निपटने के बाद संभाला अब घास कटाई की कटाई के लिए मोर्चा
पशुपालन से जुड़ी हैं कुल्लू की 80 फीसदी महिलाएं, सर्दियों के लिए जमा कर रहीं चारा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सेब सीजन के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने घास कटाई में मोर्चा संभाल लिया है। दराटी और रस्सी के साथ महिलाएं इन दिनों खेतों में घास की कटाई करने में व्यस्त हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दियों के लिए पशुओं का चारा जमा किया जाता है। घास कटाई में महिलाएं अग्रणी रहती हैं। गांवों में 80 फीसदी महिलाएं पशुपालन से जुड़ी हैं।
गौर रहे कि जून, जुलाई और अगस्त में इस बार बारिश का दौर अधिक रहा। सितंबर के पहले सप्ताह के बाद मौसम खुलने के बाद किसानों को राहत मिली। सितंबर के आखिरी सप्ताह तक सीजन चला। अक्तूबर में घास कटाई का कार्य शुरू हुआ। ग्रामीण इलाकों में दराटी से महिलाओं घास काटने में महारत हासिल हैं। महिलाएं सुबह और शाम को घास कटाई के साथ दिन के समय घास काे सुखाने का काम निपटा रही हैं। महिला ममता देवी और रेशमा ने कहा कि कृषि के साथ गांवों में पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। दूध बेचकर महिलाएं अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। मवेशियों के लिए सर्दियों में चारे की सबसे अधिक समस्या रहती है। इसलिए चारे की व्यवस्था करना बेहद जरूरी होता है। कई लोगों ने घास कटाई के लिए घास काटने वाले मशीनें भी खरीदी हैं लेकिन मशीन से घास काटने के बाद भी इसे समेटने और सुखाने का भी महिलाएं ही कर रही हैं। उधर, बाल विकास परियोजना अधिकारी गजेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। चूल्हा-चौका के साथ देश की सरहदों की रक्षा तक महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है।
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पशुपालन से जुड़ी हैं कुल्लू की 80 फीसदी महिलाएं, सर्दियों के लिए जमा कर रहीं चारा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सेब सीजन के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने घास कटाई में मोर्चा संभाल लिया है। दराटी और रस्सी के साथ महिलाएं इन दिनों खेतों में घास की कटाई करने में व्यस्त हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दियों के लिए पशुओं का चारा जमा किया जाता है। घास कटाई में महिलाएं अग्रणी रहती हैं। गांवों में 80 फीसदी महिलाएं पशुपालन से जुड़ी हैं।
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गौर रहे कि जून, जुलाई और अगस्त में इस बार बारिश का दौर अधिक रहा। सितंबर के पहले सप्ताह के बाद मौसम खुलने के बाद किसानों को राहत मिली। सितंबर के आखिरी सप्ताह तक सीजन चला। अक्तूबर में घास कटाई का कार्य शुरू हुआ। ग्रामीण इलाकों में दराटी से महिलाओं घास काटने में महारत हासिल हैं। महिलाएं सुबह और शाम को घास कटाई के साथ दिन के समय घास काे सुखाने का काम निपटा रही हैं। महिला ममता देवी और रेशमा ने कहा कि कृषि के साथ गांवों में पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। दूध बेचकर महिलाएं अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही हैं। मवेशियों के लिए सर्दियों में चारे की सबसे अधिक समस्या रहती है। इसलिए चारे की व्यवस्था करना बेहद जरूरी होता है। कई लोगों ने घास कटाई के लिए घास काटने वाले मशीनें भी खरीदी हैं लेकिन मशीन से घास काटने के बाद भी इसे समेटने और सुखाने का भी महिलाएं ही कर रही हैं। उधर, बाल विकास परियोजना अधिकारी गजेंद्र कुमार ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। चूल्हा-चौका के साथ देश की सरहदों की रक्षा तक महिलाओं ने अपना लोहा मनवाया है।
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