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Kullu News: चित्रकारी से संस्कृति का आदान -प्रदान कर रहे कर्नाटक के रवि

Thu, 06 Mar 2025 10:56 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Thu, 06 Mar 2025 10:56 PM IST
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Ravi from Karnataka is exchanging culture through painting
कुल्लू के क्राफ्ट मेले में लगाई पेटिंग की दुकान।-संवाद
चित्रकारी के माध्यम से नाॅर्थ और साउथ की खाई को पाटना का जुनून
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28 हजार की पेंटिंग में कश्मीर से कन्याकुमारी तक का किया है चित्रण
जहां भी जाते हैं प्रकृति को समझते हैं, फिर कैनवास पर उकेरते हैं तस्वीर

गांधी शिल्प बाजार में पहुंचे हैं अपनी मनाई हुई पेंटिंग के साथ

गौरीशंकर

कुल्लू। जिला मुख्यालय के गांधी शिल्प बाजार में कर्नाटक के रवि एमआर वागले ने एक पेंटिंग के जरिये कश्मीर से कन्या कुमारी तक भौगोलिक तस्वीर दिखाने का प्रयास किया है।
हिम शिखरों से लेकर झरने, मैदान और उपजाऊ क्षेत्र के माध्यम से अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक तस्वीर के साथ वहां की जलवायु और संस्कृति को भी प्रदर्शित करने की कोशिश की है। 28 हजार रुपये की यह तस्वीर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने एक दूसरी तस्वीर के माध्यम से चार ऋतुओं यानी मौसम को कैनवास पर उकेरा है। इसकी कीमत 26 हजार रुपये रखी गई है।
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रवि एमआर वागले ने कहा कि वह नॉर्थ और साउथ इंडिया के बीच सांस्कृतिक बैरियर को तोड़ना चाहते हैं। यहां के राज्य एक-दूसरे प्रदेशों की संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों से परिचित हों, इसके लिए पेंटिंग के जरिये प्रयास कर रहे हैं। वह एकरोलिक कैनवास पर चित्रकारी करते हैं।
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एक साल के भ्रमण का अनुभव
चित्रकार वागले का कहना है कि उन्होंने एक साल में पूरा देश घूमा है और अलग अलग राज्यों की प्रकृति को समझने के बाद एक महीने में काश्मीर से कन्याकुमारी के भौगोलिक और सांस्कृतिक परिवेश को कैनवास पर उकेरने में सफल हो पाया हूं। इस पेंटिंग के जरिये इन राज्यों की संस्कृति और भौगोलिक परिस्थिति को एक्सप्लेन कर सकता हूं।

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वागले की यह है खासियत

गांधी शिल्प बाजार कुल्लू में अपनी पेंटिंग लेकर पहुंचे चित्रकार रवि एमआर वागले का कहना है कि वह जहां भी जाते हैं वहां के प्राकृतिक सौंदर्य और भौगोलिक परिवेश को समझते हैं और उसी स्थान पर चित्रकारी करते हैं। जिसे वह दूसरे राज्यों में जाकर प्रदर्शित करते हैं। जिससे एक राज्य की संस्कृति और प्रकृति को दूसरा राज्य समझ पाता है।

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गोल्ड मेडलिस्ट हैं वागले
चित्रकार रवि एमआर वागले बैचलर आॅफ विजुअल आर्ट में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उनका कहना है कि हालांकि वह वर्ष 2016 तक इंटरनेशलन स्तर पर अपनी बनाई हुई पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाते थे लेकिन नोटबंदी के कारण उन्हें मुसीबत हुई थी जिस कारण काम कम हुआ था। कोरोना काल में फिर मुसीबत का दौर आया लेकिन इससे उभरकर इस काल के बाद अपने आप को पूरी तरह से पेंटिंग में समर्पित कर दिया है। अब सरकार जहां भी प्रदर्शनी लगाती है वहां अपनी पेंटिंग लेकर पहुंच जाते हैं।

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