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राम मंदिर मणिकर्ण का लंगर, हिडिंबा मंदिर मनाली का प्रसाद पाया अव्वल
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कुल्लू। धार्मिक नगरी मणिकर्ण में स्थित राम मंदिर और हिडिंबा मंदिर मनाली ढुंगरी खाद्य सुरक्षा के मानकों पर खरे उतरे हैं। राम मंदिर मणिकर्ण और हिडिंबा माता मंदिर मनाली को खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भारत की ओर से भोग प्रोग्राम के तहत प्रमाणित किया गया है। प्राधिकरण की ओर से दोनों मंदिरों को सर्टिफिकेट भी दिए गए हैं। प्राधिकरण की ओर से प्रमाणपत्र हासिल करने वाले ये जिले के पहले मंदिर हैं।
ब्लीसफुल हाइजीन ऑफरिंग टू गॉड (भोग) प्राधिकरण मंदिरों में बांटे जाने वाले प्रसाद, लंगर आदि की व्यवस्था को जांचने के लिए बनाया गया है। इसमें पानी और खाने के सैंपल, खाना बनाने वालों की मेडिकल फिटनेस से अन्य व्यवस्थाओं को कसौटी पर परखा जाता है। फरवरी 2021 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की एक टीम मणिकर्ण आई थी। टीम ने यहां पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए। लंगर बनाने वालों की भी मेडिकल फिटनेस जांची गई, जो सही पाई गई। जिस रसोई में खाना बनाया जा रहा था, वहां पर बहुत अच्छी सफाई व्यवस्था पाई गई थी। भंडार में स्टोर की उचित व्यवस्था मिली। लंगर में झूठा छोड़ने की शिकायत भी नहीं थी। टीम ने सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त पाया। इसके साथ मनाली के हिडिंबा मंदिर में लंगर नहीं लगता है। लेकिन हर दिन यहां पर प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर में हलवा आदि का प्रसाद बनाते हैं। टीम ने निरीक्षण के दौरान यहां पर बांटे जाने वाले प्रसाद को खाद्य सुरक्षा के मानकों के तहत सही पाया। सभी चीजों को जांचने के बाद हाल ही में दोनों मंदिर को सर्टिफिकेट दिए गए। इसके साथ रायसन में चल रही पेय पदार्थों की निजी फैक्टरी को फोर स्टार रेटिंग मिली है। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा जिला कुल्लू व लाहौल की सहायक आयुक्त भविता टंडन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भारत की ओर से राम मंदिर मणिकर्ण और हिडिंबा मंदिर मनाली को भोग प्रोग्राम के तहत प्रमाणित किया गया है। यह जिले के लिए हर्ष का विषय है।
कुल्लू से पहले मणिकर्ण में हुआ था दशहरा
भगवान राम की मूर्ति को जब अयोध्या से कुल्लू लाए थे तो इस मूर्ति को पहले मणिकर्ण लाया गया था। मणिकर्ण में भगवान राम का प्राचीन मंदिर है। कुल्लू से पहले मणिकर्ण में दशहरा मनाया गया था। यहां पर दशहरा के दौरान भगवान रामचंद्र को रथ में बिठाकर रथयात्रा निकाली जाती है। कुल्लू घाटी के लगभग सभी देवता धार्मिक नगरी मणिकर्ण में पवित्र स्नान के लिए जाते हैं। देवता राम मंदिर में हाजिरी लगाते हैं। यहां पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लंगर चलाया जाता है। साथ ही रहने के लिए अच्छी सुविधा वाले कमरे भी हैं।
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हिडिंबा मंदिर में सैकड़ों लोग नवाते हैं शीश
मनाली के ढुंगरी स्थित हिडिंबा माता मंदिर में रोज लगभग सैकड़ों श्रद्धालु रोज शीश नवाते हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक हिडिंबा माता मंदिर जाना नहीं भूलते। हिडिंबा माता को राजपरिवार की दादी कहा जाता है। माता हिडिंबा की दशहरा में अहम भूमिका रहती है।
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ब्लीसफुल हाइजीन ऑफरिंग टू गॉड (भोग) प्राधिकरण मंदिरों में बांटे जाने वाले प्रसाद, लंगर आदि की व्यवस्था को जांचने के लिए बनाया गया है। इसमें पानी और खाने के सैंपल, खाना बनाने वालों की मेडिकल फिटनेस से अन्य व्यवस्थाओं को कसौटी पर परखा जाता है। फरवरी 2021 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की एक टीम मणिकर्ण आई थी। टीम ने यहां पर खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए। लंगर बनाने वालों की भी मेडिकल फिटनेस जांची गई, जो सही पाई गई। जिस रसोई में खाना बनाया जा रहा था, वहां पर बहुत अच्छी सफाई व्यवस्था पाई गई थी। भंडार में स्टोर की उचित व्यवस्था मिली। लंगर में झूठा छोड़ने की शिकायत भी नहीं थी। टीम ने सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त पाया। इसके साथ मनाली के हिडिंबा मंदिर में लंगर नहीं लगता है। लेकिन हर दिन यहां पर प्रसाद चढ़ाया जाता है। मंदिर में हलवा आदि का प्रसाद बनाते हैं। टीम ने निरीक्षण के दौरान यहां पर बांटे जाने वाले प्रसाद को खाद्य सुरक्षा के मानकों के तहत सही पाया। सभी चीजों को जांचने के बाद हाल ही में दोनों मंदिर को सर्टिफिकेट दिए गए। इसके साथ रायसन में चल रही पेय पदार्थों की निजी फैक्टरी को फोर स्टार रेटिंग मिली है। इस संबंध में खाद्य सुरक्षा जिला कुल्लू व लाहौल की सहायक आयुक्त भविता टंडन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भारत की ओर से राम मंदिर मणिकर्ण और हिडिंबा मंदिर मनाली को भोग प्रोग्राम के तहत प्रमाणित किया गया है। यह जिले के लिए हर्ष का विषय है।
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कुल्लू से पहले मणिकर्ण में हुआ था दशहरा
भगवान राम की मूर्ति को जब अयोध्या से कुल्लू लाए थे तो इस मूर्ति को पहले मणिकर्ण लाया गया था। मणिकर्ण में भगवान राम का प्राचीन मंदिर है। कुल्लू से पहले मणिकर्ण में दशहरा मनाया गया था। यहां पर दशहरा के दौरान भगवान रामचंद्र को रथ में बिठाकर रथयात्रा निकाली जाती है। कुल्लू घाटी के लगभग सभी देवता धार्मिक नगरी मणिकर्ण में पवित्र स्नान के लिए जाते हैं। देवता राम मंदिर में हाजिरी लगाते हैं। यहां पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लंगर चलाया जाता है। साथ ही रहने के लिए अच्छी सुविधा वाले कमरे भी हैं।
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हिडिंबा मंदिर में सैकड़ों लोग नवाते हैं शीश
मनाली के ढुंगरी स्थित हिडिंबा माता मंदिर में रोज लगभग सैकड़ों श्रद्धालु रोज शीश नवाते हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक हिडिंबा माता मंदिर जाना नहीं भूलते। हिडिंबा माता को राजपरिवार की दादी कहा जाता है। माता हिडिंबा की दशहरा में अहम भूमिका रहती है।