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कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर किया विरोध
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कुल्लू। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कोरोना के कहर के बावजूद जारी है। हिमाचल किसान सभा कुल्लू ने शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर प्रदर्शन किया।
ग्रामीण स्तर पर यह प्रदर्शन कोरोना नियमों को ध्यान में रखते किए गए। इस दौरान केंद्र सरकार के प्रति रोष जताया। हिमाचल किसान सभा के राज्य सह सचिव होतम सिंह सौंखला ने कहा कि पांच जून 2020 को केंद्र सरकार ने गैर संवैधानिक तरीके से किसान विरोधी कानून लागू किए। इसके बाद किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। 26 नवंबर 2020 से दिल्ली सीमा पर किसान इन कानूनों को रद्द करने के लिए आंदोलन पर डटे हैं। इस आंदोलन में 600 से अधिक किसान अपनी जान भी गवां चुके हैं। लेकिन केंद्र सरकार अपनी हठ पर अड़ी हुई है। लेकिन देशभर के किसान भी अपने हक के लिए पीछे हटने वाले नहीं है। किसान आंदोलन अब गांव-गांव तक पहुंच गया है। दस दिन पहले ही जिले में 100 से अधिक स्थानों पर काले झंडे दिखाकर इन कानूनों का विरोध किया गया था। शनिवार को इन कानूनों की प्रतियां जलाई गई हैं। प्रतियां जलाकर किसानों ने अपना विरोध जताया है। इन तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाया जाए। प्रदेश में सेब, सब्जियां, लहसुन का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। जब तक सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेती है, यह विरोध जारी रहेगा।
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ग्रामीण स्तर पर यह प्रदर्शन कोरोना नियमों को ध्यान में रखते किए गए। इस दौरान केंद्र सरकार के प्रति रोष जताया। हिमाचल किसान सभा के राज्य सह सचिव होतम सिंह सौंखला ने कहा कि पांच जून 2020 को केंद्र सरकार ने गैर संवैधानिक तरीके से किसान विरोधी कानून लागू किए। इसके बाद किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। 26 नवंबर 2020 से दिल्ली सीमा पर किसान इन कानूनों को रद्द करने के लिए आंदोलन पर डटे हैं। इस आंदोलन में 600 से अधिक किसान अपनी जान भी गवां चुके हैं। लेकिन केंद्र सरकार अपनी हठ पर अड़ी हुई है। लेकिन देशभर के किसान भी अपने हक के लिए पीछे हटने वाले नहीं है। किसान आंदोलन अब गांव-गांव तक पहुंच गया है। दस दिन पहले ही जिले में 100 से अधिक स्थानों पर काले झंडे दिखाकर इन कानूनों का विरोध किया गया था। शनिवार को इन कानूनों की प्रतियां जलाई गई हैं। प्रतियां जलाकर किसानों ने अपना विरोध जताया है। इन तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाया जाए। प्रदेश में सेब, सब्जियां, लहसुन का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। जब तक सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेती है, यह विरोध जारी रहेगा।
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