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हिमाचल: राष्ट्रपति मुर्मू को भेंट की लाहौल की पारंपरिक थांका पेंटिंग, संस्कृति की अनमोल निशानी बनी खास याद

Thu, 08 Oct 2026 12:02 PM IST
Ankesh Dogra दिनेश जस्पा, उदयपुर/लाहौल स्पीति।
दिनेश जस्पा, उदयपुर/लाहौल स्पीति। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 08 Oct 2026 12:02 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लाहौल दौरे के दौरान उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी पारंपरिक थांका पेंटिंग भेंट की गई। अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल पर जनजातीय विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनुराधा राणा ने पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति को यह पेंटिंग प्रदान की। थांका कला लाहौल की बौद्ध आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

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president droupadi murmu thanka painting lahaul cultural symbol
अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल में पहुंची राष्ट्रपति को थांका पेटिंग भेंट करते हुए। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल पहुंचने पर लाहौल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खास झलक देखने को मिली। जनजातीय विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनुराधा राणा ने राष्ट्रपति को क्षेत्र की पारंपरिक कला का प्रतीक थांका पेंटिंग भेंट की। विधायक ने पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए उन्हें यह पेंटिंग प्रदान की। थांका पेंटिंग लाहौल-स्पीति की बौद्ध परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से गहराई से जुड़ी हुई है। राष्ट्रपति को भेंट की गई यह कलाकृति उनके लाहौल दौरे की एक विशेष स्मृति के रूप में देखी जा रही है।

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सिर्फ चित्र नहीं, आस्था और ज्ञान की अभिव्यक्ति
थांका पेंटिंग को केवल पारंपरिक चित्रकला के तौर पर नहीं देखा जाता। इसमें बौद्ध धर्म की धार्मिक मान्यताओं, ध्यान, आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान की परंपरा को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। इन चित्रों में भगवान बुद्ध, बोधिसत्व, बौद्ध देवी-देवताओं, मंडलों और विभिन्न धार्मिक प्रतीकों को बेहद बारीकी से उकेरा जाता है। कई चित्रों में बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षाओं से जुड़े प्रसंगों को भी स्थान दिया जाता है।
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कपड़े पर तैयार होती है थांका कला
परंपरागत रूप से थांका पेंटिंग कपड़े पर तैयार की जाती है। चित्र पूरा होने के बाद इसे लकड़ी के फ्रेम या रेशमी आवरण से सजाया जाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण इन चित्रों को मठों, मंदिरों और कई घरों में भी प्रदर्शित किया जाता है। लाहौल-स्पीति में बौद्ध संस्कृति की गहरी जड़ें होने के कारण थांका कला यहां की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है।
 
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राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ा ऐतिहासिक पहलू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अटल टनल और लाहौल दौरा क्षेत्र के लिए कई मायनों में खास रहा। वह अटल टनल का दौरा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले जून 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अटल टनल और लाहौल की वादियों का दौरा किया था।
 

लाहौल की धरती पर पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति
लाहौल-स्पीति देश के प्रमुख जनजातीय क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का लाहौल की धरती पर पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति को थांका पेंटिंग भेंट किए जाने के दौरान स्थानीय संस्कृति और परंपरा को सम्मान देने का संदेश भी सामने आया। एक ओर अटल टनल आधुनिक इंजीनियरिंग और विकास का प्रतीक है, तो दूसरी ओर थांका पेंटिंग लाहौल की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है।

विकास और विरासत का अनोखा संगम
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अटल टनल जैसे आधुनिक निर्माण और लाहौल की पारंपरिक कला का यह मेल क्षेत्र की बदलती तस्वीर को भी सामने लाता है। थांका पेंटिंग के माध्यम से राष्ट्रपति को लाहौल की उस सांस्कृतिक विरासत की झलक मिली, जिसे स्थानीय समुदाय पीढ़ियों से संजोता आया है।
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