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Kullu News: बावड़ी का पानी... सिस्टम की सुस्ती पर गुस्सा पी रहे लोग
Sun, 28 Sep 2025 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Sun, 28 Sep 2025 11:04 PM IST
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चकुरठा क्षेत्र के पांच गांवों के लोगों के लिए रोज की लड़ाई बना बावड़ी से पानी ढोना
ग्रामीण बोले- डेढ़ माह बाद भी बहाल नहीं हुई पेयजल योजना, किल्टों में ला रहे कैन
चेताया, तीन-चार दिन में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की तो सड़कों पर उतरेंगे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कभी जो पाइप से बहता था, अब उसे सिर पर ढोना पड़ रहा है। कुल्लू के चकुरठा क्षेत्र के पांच गांवों शाहुंला, पढारनी, लौल, मठेहण और सदरली के लोगों के लिए पानी सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि रोज की लड़ाई बन गया है।
बारिश ने न केवल सड़कें तोड़ीं, बल्कि गांवों की पेयजल योजनाओं की रीढ़ भी तोड़ दी। हालात यह हैं कि डेढ़ किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोत से पानी लाना दिनचर्या बन गया है। किल्टों में कैन डालकर लोग प्यास भी बुझा रहे हैं और सिस्टम की सुस्ती पर गुस्सा भी पी रहे हैं।
भारी बारिश के करीब डेढ़ माह बाद भी पेयजल योजना बहाल नहीं हो पाई है। उठाऊ पेयजल योजना बालीचौकी भी बारिश से बंद है। मजबूरी में लोक प्राकृतिक जल स्रोत बावड़ी से पानी ढोकर प्यास बुझा रहे हैं। विभाग की ओर से कछुआ गति से किए जा रहे कार्य को लेकर लोगों में रोष है।
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गौर रहे कि शाहुंला, पढारनी, लौल, मठेहण, सदरली गांव में लोगों को करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर बावड़ी से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। किल्टों में केन डालकर ग्रामीण अपने घर पहुंचा रहे हैं। पशुओं को भी बावड़ी तक ले जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अगस्त में हुई भारी बारिश से इन गांवों की पेयजल योजना को क्षति पहुंची है। प्रेम राणा, रमेश चंद, केहर सिंह, दुनी चंद, हीरा लाल, शेर सिंह, इंद्र सिंह, कुरमी राम, डोला राम और लग्न चंद ने कहा कि लोगों को पेयजल न मिलने के कारण समस्या हो रही है। आपदा के बाद अभी भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। एक तरफ बारिश से कई सड़कें बंद हैं। रास्ते भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। दूसरी ओर, पेयजल किल्लत ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। उन्होंने जल शक्ति विभाग को चेताया है कि अगर तीन-चार दिनों के अंदर पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं हुई तो ग्रामीण विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि विभाग के अधिकारियों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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ग्रामीण बोले- डेढ़ माह बाद भी बहाल नहीं हुई पेयजल योजना, किल्टों में ला रहे कैन
चेताया, तीन-चार दिन में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की तो सड़कों पर उतरेंगे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। कभी जो पाइप से बहता था, अब उसे सिर पर ढोना पड़ रहा है। कुल्लू के चकुरठा क्षेत्र के पांच गांवों शाहुंला, पढारनी, लौल, मठेहण और सदरली के लोगों के लिए पानी सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि रोज की लड़ाई बन गया है।
बारिश ने न केवल सड़कें तोड़ीं, बल्कि गांवों की पेयजल योजनाओं की रीढ़ भी तोड़ दी। हालात यह हैं कि डेढ़ किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोत से पानी लाना दिनचर्या बन गया है। किल्टों में कैन डालकर लोग प्यास भी बुझा रहे हैं और सिस्टम की सुस्ती पर गुस्सा भी पी रहे हैं।
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भारी बारिश के करीब डेढ़ माह बाद भी पेयजल योजना बहाल नहीं हो पाई है। उठाऊ पेयजल योजना बालीचौकी भी बारिश से बंद है। मजबूरी में लोक प्राकृतिक जल स्रोत बावड़ी से पानी ढोकर प्यास बुझा रहे हैं। विभाग की ओर से कछुआ गति से किए जा रहे कार्य को लेकर लोगों में रोष है।
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गौर रहे कि शाहुंला, पढारनी, लौल, मठेहण, सदरली गांव में लोगों को करीब एक से डेढ़ किलोमीटर दूर बावड़ी से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। किल्टों में केन डालकर ग्रामीण अपने घर पहुंचा रहे हैं। पशुओं को भी बावड़ी तक ले जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक अगस्त में हुई भारी बारिश से इन गांवों की पेयजल योजना को क्षति पहुंची है। प्रेम राणा, रमेश चंद, केहर सिंह, दुनी चंद, हीरा लाल, शेर सिंह, इंद्र सिंह, कुरमी राम, डोला राम और लग्न चंद ने कहा कि लोगों को पेयजल न मिलने के कारण समस्या हो रही है। आपदा के बाद अभी भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। एक तरफ बारिश से कई सड़कें बंद हैं। रास्ते भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। दूसरी ओर, पेयजल किल्लत ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। उन्होंने जल शक्ति विभाग को चेताया है कि अगर तीन-चार दिनों के अंदर पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं हुई तो ग्रामीण विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने कहा कि विभाग के अधिकारियों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं।