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जिले की पंचायतें साफ-सुथरी आएंगी नजर
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कुल्लू। कुरकुरे, चिप्स सहित अन्य पैकिंग सामान का कचरा अब पंचायतों में देखने को नहीं मिलेगा। इसके लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ने पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की योजना तैयार की है। इसके तहत हर घर से पॉलीथिन व प्लास्टिक का कचरा लिया जाएगा।
ग्रामीणों को प्लास्टिक की बोतलों में कुरकुरे, चिप्स, मेगी आदि के खाली लिफाफों को भरकर रखना होगा। इसके लिए बाकायदा ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। डीआरडीए परियोजना अधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि इससे पूर्व ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने के लिए डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी की गई है। इसके प्रथम चरण में जिले की 32 पंचायतों से घर-घर जाकर कूड़ा लिया जा रहा है। गौरतलब है कि पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह पर्यावरण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में डीआरडीए ने पॉलीथिन व प्लास्टिक कचरे के निस्तारण का यह तरीका खोजा है। योजना के पहले चरण में पंचायत जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवियों, महिला व युवक मंडलों के सदस्यों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में डीआरडीए परियोजना अधिकारी सुरजीत ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है।, लेकिन अभी लोग इसको लेकर संजीदा नहीं है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जाएगा और पंचायत को प्लास्टिक व पॉलीथिन मुक्त बनाने में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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ग्रामीणों को प्लास्टिक की बोतलों में कुरकुरे, चिप्स, मेगी आदि के खाली लिफाफों को भरकर रखना होगा। इसके लिए बाकायदा ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। डीआरडीए परियोजना अधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि इससे पूर्व ग्राम पंचायतों को स्वच्छ बनाने के लिए डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी की गई है। इसके प्रथम चरण में जिले की 32 पंचायतों से घर-घर जाकर कूड़ा लिया जा रहा है। गौरतलब है कि पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह पर्यावरण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में डीआरडीए ने पॉलीथिन व प्लास्टिक कचरे के निस्तारण का यह तरीका खोजा है। योजना के पहले चरण में पंचायत जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवियों, महिला व युवक मंडलों के सदस्यों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में डीआरडीए परियोजना अधिकारी सुरजीत ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है।, लेकिन अभी लोग इसको लेकर संजीदा नहीं है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जाएगा और पंचायत को प्लास्टिक व पॉलीथिन मुक्त बनाने में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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