लाहौल-स्पीति में तलाशी जाएंगी जैविक खेती की संभावनाएं
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उपायुक्त लाहौल-स्पीति विवेक भाटिया ने कहा कि लाहौल स्पीति जिला पर्यावरण की दृष्टि से प्रदूषण मुक्त जिला है। ऐसे में यहां पर जैविक उत्पादों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। आज के दौर में विश्व में जैविक खेती की और विशेष जोर दे रहे हैं और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए विवेक भाटिया ने कहा कि जैविक खेती के संबंध में आगामी 24 अप्रैल को विशेष ग्रामसभा की बैठक लाहौल मंडल के सभी 28 पंचायतों में आयोजित की जाएंगी। जिसमें किसानों को जैविक खेती के बारे में विशेष जानकारी दी जाएगी तथा उन सभी पंचायतों में संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
जहां जैविक खेती के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि जिले में जैविक खेती को अपनाने के लिए किसानों को जागरूक कर प्रेरित किया जाएगा। जैविक उत्पादों की विशेष गुणवत्ता के कारण राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्कृष्ट उत्पाद के रूप में पहचान इसकी बढ़ती महत्व का प्रतीक है। लाहौल स्पीति के लोगों की आर्थिकी पूर्ण रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में जैविक खेती अपनाने से किसानों की न केवल आय में बढ़ोतरी होगी। बल्कि फसल चक्कर तथा पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ अधिक उत्पादन भी होगा।
सरकार किसानों को जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी तथा वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। कृषि विभाग उपदान पर वर्मी कंपोस्ट इकाई स्थापित करने तथा जैविक प्रबंधन के क्षेत्र में किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है। जैविक खेती में पोषक तत्वों का प्रबंधन बारे जानकारी देते हुए विवेक भाटिया ने कहा कि जैविक कृषि ऐसी पद्धति है। जिसमें प्रकृति व पर्यावरण को स्वच्छ व संतुलित रखते हुए भूमि की संजीवता, जल गुणवता, जैव विविधता आदि बनाएं रखते हुए दीर्घकालीन एवं टिकाऊ कृषि उत्पादन किया जा सकता है।