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Kullu News: एफटीए के विरोध में उतरे बागवान, केंद्र सरकार के खिलाफ लगाए नारे
Thu, 23 Jul 2026 05:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 23 Jul 2026 05:49 AM IST
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पतलीकूहल (कुल्लू)। भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के विरोध में बुधवार को पतलीकूहल में किसान सभा कुल्लू के बैनर तले बागवानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सेब, बागवानी और डेयरी उत्पादों को एफटीए से बाहर रखने की मांग उठाई।
किसान सभा के जिला सचिव गोविंद भंडारी ने कहा कि प्रस्तावित समझौता हिमाचल के सेब उत्पादकों, दूध उत्पादकों और छोटे किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका भारतीय सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क हटाकर उसे 0 से 10 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। यदि ऐसा हुआ तो कुल्लू और शिमला के सेब उत्पादकों को भारी नुकसान होगा और स्थानीय बाजार प्रभावित होगा।
अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात से प्रदेश का ग्रामीण दुग्ध अर्थतंत्र प्रभावित होगा। वहीं, बीजों पर पेटेंट संबंधी प्रावधान लागू होने से किसान अपने पारंपरिक बीजों पर अधिकार खो सकते हैं।
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किसान सभा ने मांग की कि सेब, बागवानी और डेयरी उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा जाए, समझौते का पूरा मसौदा संसद में सार्वजनिक किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित किए बिना कोई व्यापार समझौता न किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 10 अगस्त को जिला मुख्यालय में जेल भरो आंदोलन आयोजित किया जाएगा। आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
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किसान सभा के जिला सचिव गोविंद भंडारी ने कहा कि प्रस्तावित समझौता हिमाचल के सेब उत्पादकों, दूध उत्पादकों और छोटे किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका भारतीय सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क हटाकर उसे 0 से 10 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है। यदि ऐसा हुआ तो कुल्लू और शिमला के सेब उत्पादकों को भारी नुकसान होगा और स्थानीय बाजार प्रभावित होगा।
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अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात से प्रदेश का ग्रामीण दुग्ध अर्थतंत्र प्रभावित होगा। वहीं, बीजों पर पेटेंट संबंधी प्रावधान लागू होने से किसान अपने पारंपरिक बीजों पर अधिकार खो सकते हैं।
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किसान सभा ने मांग की कि सेब, बागवानी और डेयरी उत्पादों को एफटीए से बाहर रखा जाए, समझौते का पूरा मसौदा संसद में सार्वजनिक किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित किए बिना कोई व्यापार समझौता न किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 10 अगस्त को जिला मुख्यालय में जेल भरो आंदोलन आयोजित किया जाएगा। आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।