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हादसे में समय बुजुर्ग और बच्चे ही थे गांव में
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटला
Updated Mon, 16 Nov 2015 07:56 PM IST
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सैंज घाटी के कोटला गांव में आग की घटना के समय घरों में केवल बुजुर्ग और बच्चे ही थे। जबकि, गांव के पुरुष देवता के साथ बालीचौकी गए हुए थे। गांव की महिलाएं नरेगा के काम के लिए गई हुई थीं। यह भी एक बड़ा कारण रहा कि आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
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हालांकि, घर से बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित निकाल लिया गया। गांव की महिला ऊषा ठाकुर, किरणा, पार्वती, तारा देवी, फतेह चंद और रूप लाल ने बताया कि हादसे के समय गांव के सभी पुरुष देवता के साथ बालीचौकी में देवली के लिए गए हुए थे। जबकि, महिलाएं नरेगा के काम के लिए घर से बाहर थीं। जैसे-जैसे लोगों को सूचना मिली वे गांव में पहुंचते गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। किसी तरह घर में फंसे बुजुर्गों और बच्चों को घर से बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर लाया गया।
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कौन पीठ पर उठा कर लाया नहीं पता
कोटला (कुल्लू)। गांव निवासी देवकी (90) और चमवेलू देवी (80) का कहना है कि आग लगने का कारणों का पता नहीं लगा। इतना जरूर है कि उन्हें कोई पीठ पर उठा कर घर से बाहर ले आया। उन्होंने कहा कि खेतों में बैठ कर अपने घरों को जलता हुआ देखते रहे। पूरी जिंदगी की कमाई जल कर पल भर में राख हो गई। अब जो शरीर पर कपड़े पहने हैं, इसके अलावा कुछ नहीं बचा है। पूरे परिवार के साथ अब कहां जाएं, नहीं पता।
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