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Kullu News: राहत का आश्वासन ही मिला, ढाई माह बाद भी तिरपाल में कट रही हैं सर्द रातें
Fri, 17 Oct 2025 11:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Fri, 17 Oct 2025 11:22 PM IST
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हिमालय नीति अभियान के सेमिनार में पीड़ितों ने सुनाया दर्द, बोले- टेंट लगाने के लिए भी जमीन नहीं
बच्चों और बुजुर्गाें के साथ टेंट में बिता रहे रातें, बोले- पुनर्वास के नाम पर कुछ हजार रुपये ही मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की घाटियों में आई आपदा के दो महीने बाद भी कई गांवों में परिवार खुले आसमान के नीचे तिरपालों में रह रहे हैं।
हिमालय नीति अभियान के सेमिनार में जब पीड़ितों ने अपने अनुभव साझा किए तो साफ हुआ कि राहत और पुनर्वास के नाम पर कुछ हजार रुपये देकर सरकार ने जैसे अपने कर्तव्य की औपचारिकता निभा दी है। ये परिवार तिरपाल के नीचे बच्चों और बुजुर्गाें के साथ रहने को मजबूर हैं। हिमालय नीति अभियान संस्था ने शुक्रवार को कुल्लू स्थित सिराज भवन में इस मसले पर एक मंथन सेमिनार आयोजित किया। इसमें जिले भर से प्रभावित जुटे। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि यह प्रभावितों के साथ मजाक है कि उनकी जीवन भर की कमाई और लाखों की संपत्ति तबाह हो गई लेकिन सरकारी तौर पर 5,000 से 15,000 रुपये तक ही मुआवजा दिया गया। सेमिनार में हुए मंथन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन और सरकार को सौंपी जाएगी।
आपदा के मामले में राहत मैन्युअल में संशोधन की आवश्यकता है। जिले के बागन के अलावा सैंज और बंजार के शर्ची, मातला, शरणधार आदि इलाकों में कई मकानों में दरारें पड़ने से वे रहने लायक नहीं रहे हैं। लोग तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावित लोगों ने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट में इन मकानों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दिखाया जा रहा है। यह प्रभावितों के साथ मजाक है। प्रभावितों ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि उनके पास टेंट लगाने के लिए भी जमीन नहीं बची है। समाजसेवी महिमन चंद्र शर्मा, लाहौल-स्पीति सेव संस्था से अजेय, डॉ. कुलराज सिंह कपूर, डॉ. शशिभूषण पुरोहित, बंजार ब्लॉक से बीडीसी सदस्य लीला देवी और डीणे राम आदि मौजूद रहे।
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सेमिनार में इन्होंने रखी अपनी बात
वर्कशॉप में कुब्जा देवी, मेहरू राम, जयमाला, सविता, वंती देवी, मीना देवी, जयराम, मानदासी, प्रिया, अंजू सूद, खूब राम, रिकी, रेखा, कांता देवी, तारा चंद, शमशेर सिंह, भूप सिंह, यज्ञ चंद, राजकुमार, मोहर सिंह, पूर्ण, मेहर सिंह, ज्ञान चंद, ग़ुमत राम, नील चंद, बबली, नरोतम सिंह, भूपेंद्र पाल, राम नाथ आदि प्रभावितों ने अपनी बात रखी।
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बच्चों और बुजुर्गाें के साथ टेंट में बिता रहे रातें, बोले- पुनर्वास के नाम पर कुछ हजार रुपये ही मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले की घाटियों में आई आपदा के दो महीने बाद भी कई गांवों में परिवार खुले आसमान के नीचे तिरपालों में रह रहे हैं।
हिमालय नीति अभियान के सेमिनार में जब पीड़ितों ने अपने अनुभव साझा किए तो साफ हुआ कि राहत और पुनर्वास के नाम पर कुछ हजार रुपये देकर सरकार ने जैसे अपने कर्तव्य की औपचारिकता निभा दी है। ये परिवार तिरपाल के नीचे बच्चों और बुजुर्गाें के साथ रहने को मजबूर हैं। हिमालय नीति अभियान संस्था ने शुक्रवार को कुल्लू स्थित सिराज भवन में इस मसले पर एक मंथन सेमिनार आयोजित किया। इसमें जिले भर से प्रभावित जुटे। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि यह प्रभावितों के साथ मजाक है कि उनकी जीवन भर की कमाई और लाखों की संपत्ति तबाह हो गई लेकिन सरकारी तौर पर 5,000 से 15,000 रुपये तक ही मुआवजा दिया गया। सेमिनार में हुए मंथन पर विस्तृत रिपोर्ट प्रशासन और सरकार को सौंपी जाएगी।
आपदा के मामले में राहत मैन्युअल में संशोधन की आवश्यकता है। जिले के बागन के अलावा सैंज और बंजार के शर्ची, मातला, शरणधार आदि इलाकों में कई मकानों में दरारें पड़ने से वे रहने लायक नहीं रहे हैं। लोग तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावित लोगों ने बताया कि पटवारी की रिपोर्ट में इन मकानों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दिखाया जा रहा है। यह प्रभावितों के साथ मजाक है। प्रभावितों ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि उनके पास टेंट लगाने के लिए भी जमीन नहीं बची है। समाजसेवी महिमन चंद्र शर्मा, लाहौल-स्पीति सेव संस्था से अजेय, डॉ. कुलराज सिंह कपूर, डॉ. शशिभूषण पुरोहित, बंजार ब्लॉक से बीडीसी सदस्य लीला देवी और डीणे राम आदि मौजूद रहे।
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सेमिनार में इन्होंने रखी अपनी बात
वर्कशॉप में कुब्जा देवी, मेहरू राम, जयमाला, सविता, वंती देवी, मीना देवी, जयराम, मानदासी, प्रिया, अंजू सूद, खूब राम, रिकी, रेखा, कांता देवी, तारा चंद, शमशेर सिंह, भूप सिंह, यज्ञ चंद, राजकुमार, मोहर सिंह, पूर्ण, मेहर सिंह, ज्ञान चंद, ग़ुमत राम, नील चंद, बबली, नरोतम सिंह, भूपेंद्र पाल, राम नाथ आदि प्रभावितों ने अपनी बात रखी।
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