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Kullu News: न सेब से लदे वाहन, न ही सुनाई दे रही बोलियों की गूंज

Mon, 22 Dec 2025 10:55 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Updated Mon, 22 Dec 2025 10:55 PM IST
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Neither vehicles loaded with apples nor the echo of the voices heard
सेब और नगदी फसलों का सीजन ढलते ही पतलीकूहल सब्जी मंडी में पसरा सन्नाटा
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हर साल मई-जून में नाशपाती और प्लम के साथ मंडी में लौटती है जीवन की सुगबुगाहट

संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। पतलीकूहल सब्जी मंडी में अब सन्नाटा छा गया है। सेब सीजन ढलते ही गाड़ियों की कतारें थम गई हैं। नीलामी की बोली की गूंज अब सुनाई नहीं देती। नगदी फसलों सेब, नाशपाती और प्लम की धड़कन के बिना मंडी जैसे ठहर गई हो। हर सीजन के साथ उम्मीदें फिर से जागती हैं।
समय : सुबह 9 बजे। स्थान : नग्गर रोड से सटी पतलीकूहल सब्जी मंडी और चारों ओर पसरा सन्नाटा। करीब एक महीना पहले यहां सुबह गाड़ियों की लंबी कतारें लगती थीं। अब बागवानों की चहल-पहल और नीलामी की बोली की गूंज गायब थी। सेब सीजन समाप्त होने के साथ पतलीकूहल सब्जी मंडी पर सन्नाटे का पहरा बैठ गया है। पतलीकूहल चौक से नीचे ब्यास नदी के तट पर जटेहड़ बिहाल में स्थित सब्जी मंडी के प्रांगण में कुछ समय पहले तक सेब से लदी गाड़ियों की कतारें, बागवानों की आवाजें और सेब नीलामी की बोली लगने की गूंज सुनाई देती थी। अब मंडी परिसर में न खरीदार दिख रहे हैं और न ही नीलामी की कोई हलचल।
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भले ही सब्जी मंडी का हो लेकिन इसकी धड़कन नगदी फसलों से चलती है। यहां सबसे ज्यादा कारोबार सेब का होता है। इसके बाद नाशपाती, प्लम और अंत में जापानी फल मंडी की रौनक बढ़ाते हैं। सब्जियां नाममात्र की आती हैं। हर साल मई-जून आते ही नाशपाती और प्लम के साथ मंडी में जीवन की सुगबुगाहट लौट आती है। जुलाई में अर्ली वैरायटी का सेब दस्तक देता है। अगस्त में रॉयल सेब की आवक मंडी को पूरी तरह गुलजार कर देती है।
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अब मंडी परिसर में पसरी चुप्पी सिर्फ खाली दुकानों की नहीं, बल्कि उन उम्मीदों की भी है जो हर सीजन के साथ फिर से जागती हैं। किसानों और आढ़तियों की मांग है कि ऑफ-सीजन में भी मंडी को जीवित रखने के लिए वैकल्पिक विपणन व्यवस्था बनाई जाए जिससे पतलीकूहल की मंडी सिर्फ मौसमों की मोहताज न रहे।
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मंडी का सीजन मई-जून से शुरू होता है और नगदी फसलों के सहारे चलता है। सीजन खत्म होते ही व्यापार थम गया है। अब अगले साल कारोबार गति पकड़ेगा। - कुंज लाल ठाकुर, अध्यक्ष आढ़ती संघ, पतलीकूहल सब्जी मंडी

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सेब जैसी नगदी फसलों के लिए घर-द्वार पर उत्पाद बेचने कि विकल्प देने के मकसद से लोकल मंडियां खोली गई हैं। बागवानों को इनका फायदा भी मिल रहा है। - राम सिंह मियां, अध्यक्ष, एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति
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