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Kullu News: ... बंदूक के बदले फिरंगियों को दिया नग्गर कैसल कमा रहा लाखों
Thu, 09 Jan 2025 10:20 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Updated Thu, 09 Jan 2025 10:20 PM IST
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रोजाना सैकड़ों की संख्या में आ रहे सैलानी, एंट्री फीस से ही एक दिन में हो रही 50 हजार रुपये की कमाई
साल 1905 में आए भूकंप से भी नहीं हिली थी इमारत, लकड़ी-पत्थर से इस्तेमाल से बनाया है महल
उझी घाटी की 500 साल पुरानी इमारत को साल 2012 में घोषित किया गया है राष्ट्रीय धरोहर
संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। उझी घाटी का 500 साल पुराना नग्गर कैसल सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नग्गर कैसल को 9 अगस्त, 2012 को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।
वास्तुकला का बेजोड़ नमूना होने से नग्गर कैसल में लकड़ी-पत्थर का इस्तेमाल हुआ है। कैसल को देखने के लिए एंट्री फीस से रोज 50,000 रुपये की कमाई होती है। खास बात यह है कि 1905 में आया भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया था।
बर्फ से ढकीं पहाड़ियों की तलहटी में देवदार के जंगल के बीच विशालकाय चट्टानों पर बना ऐतिहासिक नग्गर कैसल अपनी खूबसूरती, बेजोड़ वास्तुशिल्प और इतिहास को समेटे हुए है। नग्गर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा है। बताया जाता है कि जिला मुख्यालय कुल्लू के सुल्तानपुर शिफ्ट होने के बाद कुल्लू के राजा इस महल को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इस्तेमाल करते रहे। 1846 में तत्कालीन राजा ज्ञान सिंह ने महज एक बंदूक के बदले इस धरोहर को अंग्रेज अफसर को दे दिया था। बाद में इसका उपयोग ग्रीष्मकालीन न्यायालय के रूप में होने लगा। खास बात यह है कि इसके निर्माण में लोहे की एक कील का भी इस्तेमाल नहीं हुआ है। कैसल कुल्लू जिले का एक ऐतिहासिक महल है, जिसे सोलहवीं शताब्दी में राजा सिद्ध सिंह ने काष्ठकुणी शैली में बनवाया था। 1978 में नग्गर कैसल को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम को सौंपा गया। इसके बाद इसे एक होटल के रूप में चलाया जा रहा है। इसमें कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है
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जगतीपट मंदिर में होती है जगती
कैसल परिसर में जगतीपट नाम से एक मंदिर भी है। इसमें विपदा के समय जगती यानी देव संसद बुलाई जाती है। जिले में जब भी कोई विपदा आती है, उसका निपटारा यहां किया जाता है। मनाली में बन रहे स्की विलेज के विरोध को लेकर भी देव समाज ने जगती का आयोजन किया था और स्की विलेज का निर्माण नहीं हो पाया था।
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1905 में आया भूकंप भी कुछ नहीं कर पाया
इस महल का निर्माण लकड़ी और पत्थर से काष्ठकुणी शैली में इस प्रकार किया गया है कि किसी तरह का भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सके। 1905 में आए विनाशकारी भूकंप भी भूकंपरोधी काष्ठकुणी शैली नग्गर कैसल को कुछ नहीं कर पाया था।
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वाजपेयी भी लगा चुके हैं जनता का दरबार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अकसर छुट्टियां बिताने मनाली आते थे। ऐसे में 2001 में जब पीएम मोदी हिमाचल के भाजपा प्रभारी थे तो इस दौरान नग्गर कैसल में तत्कालीन पीएम वाजपेयी यहां जनता दरबार भी लगवा चुके हैं।
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नग्गर कैसल को देखने के लिए रोराना काफी संख्या में सैलानी आते हैं। कैसल को देखने के लिए एंट्री फीस से रोज 50,000 रुपये की कमाई होती है। पर्यटन विभाग के डीजीएम बीएस ओक्टा ने कहा कि नग्गर कैसल को देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं।
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साल 1905 में आए भूकंप से भी नहीं हिली थी इमारत, लकड़ी-पत्थर से इस्तेमाल से बनाया है महल
उझी घाटी की 500 साल पुरानी इमारत को साल 2012 में घोषित किया गया है राष्ट्रीय धरोहर
संजय ठाकुर
पतलीकूहल (कुल्लू)। उझी घाटी का 500 साल पुराना नग्गर कैसल सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नग्गर कैसल को 9 अगस्त, 2012 को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।
वास्तुकला का बेजोड़ नमूना होने से नग्गर कैसल में लकड़ी-पत्थर का इस्तेमाल हुआ है। कैसल को देखने के लिए एंट्री फीस से रोज 50,000 रुपये की कमाई होती है। खास बात यह है कि 1905 में आया भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया था।
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बर्फ से ढकीं पहाड़ियों की तलहटी में देवदार के जंगल के बीच विशालकाय चट्टानों पर बना ऐतिहासिक नग्गर कैसल अपनी खूबसूरती, बेजोड़ वास्तुशिल्प और इतिहास को समेटे हुए है। नग्गर एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा है। बताया जाता है कि जिला मुख्यालय कुल्लू के सुल्तानपुर शिफ्ट होने के बाद कुल्लू के राजा इस महल को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इस्तेमाल करते रहे। 1846 में तत्कालीन राजा ज्ञान सिंह ने महज एक बंदूक के बदले इस धरोहर को अंग्रेज अफसर को दे दिया था। बाद में इसका उपयोग ग्रीष्मकालीन न्यायालय के रूप में होने लगा। खास बात यह है कि इसके निर्माण में लोहे की एक कील का भी इस्तेमाल नहीं हुआ है। कैसल कुल्लू जिले का एक ऐतिहासिक महल है, जिसे सोलहवीं शताब्दी में राजा सिद्ध सिंह ने काष्ठकुणी शैली में बनवाया था। 1978 में नग्गर कैसल को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम को सौंपा गया। इसके बाद इसे एक होटल के रूप में चलाया जा रहा है। इसमें कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है
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जगतीपट मंदिर में होती है जगती
कैसल परिसर में जगतीपट नाम से एक मंदिर भी है। इसमें विपदा के समय जगती यानी देव संसद बुलाई जाती है। जिले में जब भी कोई विपदा आती है, उसका निपटारा यहां किया जाता है। मनाली में बन रहे स्की विलेज के विरोध को लेकर भी देव समाज ने जगती का आयोजन किया था और स्की विलेज का निर्माण नहीं हो पाया था।
1905 में आया भूकंप भी कुछ नहीं कर पाया
इस महल का निर्माण लकड़ी और पत्थर से काष्ठकुणी शैली में इस प्रकार किया गया है कि किसी तरह का भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सके। 1905 में आए विनाशकारी भूकंप भी भूकंपरोधी काष्ठकुणी शैली नग्गर कैसल को कुछ नहीं कर पाया था।
वाजपेयी भी लगा चुके हैं जनता का दरबार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अकसर छुट्टियां बिताने मनाली आते थे। ऐसे में 2001 में जब पीएम मोदी हिमाचल के भाजपा प्रभारी थे तो इस दौरान नग्गर कैसल में तत्कालीन पीएम वाजपेयी यहां जनता दरबार भी लगवा चुके हैं।
नग्गर कैसल को देखने के लिए रोराना काफी संख्या में सैलानी आते हैं। कैसल को देखने के लिए एंट्री फीस से रोज 50,000 रुपये की कमाई होती है। पर्यटन विभाग के डीजीएम बीएस ओक्टा ने कहा कि नग्गर कैसल को देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं।